हिंदी न्यूज़ – लोकसभा चुनाव: गठबंधन को साधने के लिए राहुल गांधी का ये है फॉर्मूला- rahul gandhi’s plan coalition for 2019 Lok Sabha Elections

नरेंद्र मोदी के विजय रथ को 2019 के लोकसभा चुनाव में रोकने के लिए कांग्रेस एक बड़े और मजबूत गठबंधन पर आस लगाए बैठी है. इस राह में पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैर-भाजपा राजनीतिक पार्टियों को एक साथ जोड़ने की है. हालांकि पार्टी ने अंदरखाने इसकी कवायद शुरू कर दी है. कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की कोर कमेटी की बैठक की. करीब दो घंटे से ज्यादा चली इस बैठक में पार्टी ने अपने वरिष्ठ नेताओं को अलग-अलग पार्टियों से गठबंधन और सीट शेयरिंग पर बात करने की जिम्मेदारी दी है.

देशभर की कई विपक्षी पार्टियां मोदी विरोधी मंच तैयार करने की कवायद में जुटी हैं. एक ओर जहां पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी दिल्ली आकर गैर भाजपाई दलों से मुलाकात करके वन इज़ टू वन (1=1) का फॉर्मूला दे गईं. वहीं तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर फेडरल फ्रंट की वकालत कर रहे हैं.

ऐसे में कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती गैर बीजेपी दलों को एक मंच पर लाने की है, लेकिन कई ऐसी राजनीतिक पार्टियां हैं, जो भाजपा और कांग्रेस दोनों से बराबर दूरी बनाए रखना चाहती हैं. ऐसे में नवीन पटनायक, के. चंद्रशेखर राव, चंद्रबाबू नायडू सरीखे  नेताओं को भाजपा विरोधी मंच पर लाना कांग्रेस की प्राथमिकता है. हाल ही में शरद यादव ने साझा विरासत बचाओ मंच के माध्यम से ऐसे राजनीतिक दलों को साथ लाने की कोशिश की.

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी मोदी के विजय रथ को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है. जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस की पहली प्राथमिकता 2019 में एक बड़ा मोदी विरोधी मंच तैयार करने का है. इसके साथ ही नरेंद्र मोदी को सत्ता में आने से रोकने के लिए कांग्रेस प्रधानमंत्री पद पर अपना दावा भी छोड़ने को तैयार है. कांग्रेस कोर कमेटी की हालिया हुई बैठक में गठबंधन को लेकर लंबी चर्चा हुई, जिसमें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं को विपक्षी दलों से गठबंधन को लेकर बातचीत की जिम्मेदारी सौंपी है.नेताओं को दी गई है ये जिम्मेदारी

अशोक गहलोत: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हिंदीभाषी प्रदेशों की जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें सपा, बसपा, आरएलडी जैसी पार्टियों से सीट शेयरिंग पर चर्चा करनी है. वहीं तीन राज्य मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनाव में भी गठबंधन करना उनकी ही जिम्मे है.

मल्लिकार्जुन खड़गे: महाराष्ट्र कांग्रेस के नए प्रभारी महासचिव मल्लिकार्जुन खड़गे को एनसीपी और महाराष्ट्र की दूसरी छोटी पार्टियों से बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है.

गुलाम नबी आज़ाद: दक्षिण भारत की राजनीतिक पार्टियां, जिसमें डीएमके, टीडीपी, टीआरएस, जेडीएस सहित आधे दर्जन पार्टियों से गुलाम नबी आज़ाद सीट बंटवारे पर चर्चा करेंगे. इसके साथ ही आज़ाद के ऊपर कश्मीर में फारूक अब्दुल्ला की नेशनल कॉन्फ्रेंस से भी सीटों के तालमेल की जिम्मेदारी है.

एके एंटनी और अहमद पटेल: इसके अलावा कांग्रेस ने पहले ही गठबंधन को लेकर एके एंटनी की अध्यक्षता में एक कमिटी बना रखी है,  जो गठबंधन को आखिरी रूप देगा. इस बाबत यह कमिटी हर राज्य में इंटर्नल सर्वे करा रही है. इसके साथ ही सोनिया गांधी के पूर्व राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को बिहार, झारखंड की छोटी पार्टियों सहित ममता बनर्जी की टीएमसी को साधने की जिम्मेदारी दी गई है.

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