हिंदी न्यूज़ – सुप्रीम कोर्ट ने मलयालम उपन्यास ‘मेशा’ पर प्रतिबंध लगाने की याचिका खारिज की – Supreme Court has dismissed the petition seeking a ban on the Malayalam novel ‘Meesha’.

विवादों में घिरे मलयालम उपन्‍यास ‘मीशा’ पर सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंध लगाने संबंधी याचिका खारिज कर दी है. इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि उपन्यास में मंदिर जाने वाली महिलाओं को खराब तरीके से दिखाया गया है.

न्यायालय ने याचिका को खारिज करते हुए कहा, ‘लेखक की रचनात्मकता का सम्मान किया जाना चाहिए.’

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि किताब को  खंड-खंड में नहीं बल्कि पूरी तरह से पढ़ने की जरूरत है. न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ भी पीठ का हिस्सा थे.

पीठ ने कहा, ‘किताब को लेकर व्यक्तिपरक धारणा को सेंसरशिप के संबंध में कानूनी दायरे में प्रवेश की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए.’

पीठ ने यह भी कहा कि जिस तरह एक चित्रकार रंगों से खेलता है उसी तरह एक लेखक को शब्दों से खेलने की इजाजत होनी चाहिए.

शीर्ष अदालत ने यह आदेश दिल्ली निवासी एन राधाकृष्णन की याचिका पर दिया है. याचिकाकर्ता ने लेखक एस हरीश के मलयाली उपन्यास मीशा से कुछ अंशों को हटाने की मांग की थी.

गौरतलब है कि दक्षिणपंथी लोगों से कथित धमकी मिलने के बाद एक मलयालम लेखक ने अपने उपन्यास को साप्ताहिक प्रकाशन से वापस ले लिया था. एस हरीश का पहला उपन्यास ‘मीशा’ किस्तों में मातृभूमि साप्ताहिक में प्रकाशित हो रहा था. साप्ताहिक के संपादक कमलराम संजीव ने ट्वीट किया कि लेखक ने उपन्यास वापस ले लिया है. संजीव ने कहा, ‘एस हरीश ने अपना उपन्यास ‘मीशा’ वापस ले लिया है, साहित्य की पीट-पीट कर हत्या की जा रही है , केरल के सांस्कृतिक इतिहास में सबसे काला दिन.’ कांग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘जो लोग हिन्दुत्व तालिबान के उभार के बारे में मेरी चेतावनियों पर विश्वास नहीं करते, उन्हें मलयालम लेखक हरीश के साथ हुई घटना से सबक लेना चाहिए.’

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