हिंदी न्यूज़ – अनुच्छेद 377: गे संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा जाए या नहीं, सुप्रीम कोर्ट का फैसला कल Supreme Court Verdict on Section 377 Decriminalising Gay Sex

Article 377: गे संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा जाए या नहीं? सुप्रीम कोर्ट का फैसला कल

प्रतीकात्मक फोटो

News18Hindi

Updated: September 5, 2018, 5:55 PM IST

समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखने वाले आर्टिकल 377 के खिलाफ लगी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को फैसला सुना सकता है. चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय बेंच ने 17 जुलाई को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था.

केंद्र सरकार ने पहले इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए वक्त मांगा था. हालांकि बाद में सरकार ने कहा था कि दो वयस्क लोगों में आपसी सहमति से बनाए संबंध को अपराध की श्रेणी में बनाए रखने या नहीं रखने का फैसला वह कोर्ट के विवेक पर छोड़ती है. हालांकि केंद्र ने कहा था कि इस धारा के अंतर्गत नाबालिगों और जानवरों के साथ अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी में रखा गया है और उसे वैसे ही बनाए रखना चाहिए.

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