हिंदी न्यूज़ – मॉब लिंचिंग पर जल्द सख्त कानून बनाने की तेयारी में केंद्र सरकार-Central Goverment is Prepraing For Strict Law on Mob Lynching

देश में बढ़ती मॉब लिन्चिंग (भीड़ द्वारा पीट-पीट कर हत्या) की घटनाओं पर सोशल मीडिया कंपनियों जैसे फेसबुक, वॉट्सऐप के अधिकारियों की भी जवाबदेही तय हो सकती है. मॉब लिन्चिंग की घटनाओं पर काबू पाने के तरीकों का सुझाव देने के लिए बनाई गई सचिवों की कमिटी का यह एक प्रमुख सुझाव है. देशभर में इस तरह की हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए सरकार जल्द ही सख्त कानून बनाने की तैयारी कर रही है.

इस मुद्दे पर बनी मंत्रियों के समूह की पहली बैठक गृह मंत्रालय में हुई. मंत्रियों के समूह को सचिव स्तर कमिटी की रिपोर्ट की जानकारी दी गई. इस अहम बैठक में गृहमंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद और गृह सचिव समेत कई आला अधिकारी शामिल थे.

मॉब लिंचिंग पर मंत्रियों के समूह की कमेटी के अध्यक्ष गृहमंत्री राजनाथ सिंह हैं. इस बैठक में मॉब लिंचिंग पर बनी सचिव स्तर की कमेटी की रिपोर्ट पर चर्चा हुई. कमिटी ने लिंचिंग रोकने के लिए अलग से कानून और अगर मॉब लिंचिंग की अफवाह सोशल मीडिया से फैलती है, तो इसके मालिकों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने की सिफारिश की है. इसके अलावा कमेटी ने मॉब लिचिंग से पीड़ितों को केंद्र द्वारा सहायता और इसके आरोपियों पर गैर-जमानती धारा लगाने की सिफारिश की है.

बता दें कि मंत्रियों के समूह की कमेटी में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, परिवहन मंत्री नितिन गडकरी, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत हैं. गृह मंत्री राजनाथ सिंह जीओएम के प्रमुख हैं.पिछले एक साल के दौरान नौ राज्यों में ऐसी करीब 40 घटनाएं होने के बाद सचिवों की कमिटी का गठन किया गया था. जुलाई में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को परामर्श जारी किया था.

दोनों कमिटियों ने सिलसिलेवार तरीके से देशभर में हुई मॉब लिंचिंग की घटना, घटना की परिस्थितियां और घटना के बाद आरोपियों और पीड़ितों का क्या हुआ इन सारे पहलुओं का आंकलन किया. मंत्रियों के समूह की कमिटी अब अपनी सिफारिशें प्रधानमंत्री को भेजेगी. आनेवाले दिनों में इन दोनों कमिटियों की बैठकें जारी रहेंगी, जिनमें मॉब लिंचिंग से जुड़े अन्य मुद्दों पर भी चर्चा होगी.

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से पहले हुई इन बैठकों से सरकार अपनी मंशा साफ करना चाहती है कि मॉब लिंचिंग की घटनाओं को वो बेहद गंभीरतापूर्वक देख रही है और इसे रोकने के लिए कड़ा कानून बनाने से वो कतई पीछे नहीं हटेगी. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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