हिंदी न्यूज़ – SC ने NRC के लिए दावे और आपत्तियां स्वीकार करने की प्रक्रिया अगले आदेश तक टाली-Supreme Court defers process of receiving claims, objections to Assam NRC; next hearing on 19 Sept

उच्चतम न्यायालय ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के लिए दावे और आपत्तियां स्वीकार करने की प्रक्रिया शुरू करने की तारीख बुधवार को अगले आदेश तक के लिए टाल दी और आदेश दिया कि दावेदार विरासत साबित करने के लिए प्रयुक्त 15 दस्तावेजों में से दस में से किसी भी एक दस्तावेज का इस्तेमाल कर सकते हैं.

न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन की पीठ ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी समन्वयक प्रतीक हजेला की रिपोर्ट का अवलोकन करने के बाद यह आदेश दिया. इस रिपोर्ट में हजेला ने सुझाव दिया था कि राज्य के नागरिकों की सूची में दावा करने के लिए दावेदार सूची ‘ए’ में प्रदत्त कुल 15 दस्तावेजों की सूची से 10 में से किसी भी एक दस्तावेज को आधार बना सकते हैं. पीठ समन्वयक के इस सुझाव से सहमत थी.

पीठ ने राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में शामिल नहीं किए गए लोगों के दावे स्वीकार करने के तरीके के बारे में समन्वयक की रिपोर्ट की प्रति केन्द्र के साथ साझा करने में यह कहते हुए असहमति व्यक्त की कि यद्यपि सरकार की ‘बहुत अधिक दिलचस्पी’ है परंतु न्यायालय को ‘संतुलन कायम करना’ है.

शीर्ष अदालत ने असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी के लिए दावे और आपत्तियां स्वीकार करने की प्रक्रिया अगले आदेश तक स्थगित कर दी. केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इस रिपोर्ट की एक प्रति उन्हें दी जानी चाहिए क्योंकि सरकार की इसमें बहुत अधिक दिलचस्पी है.इस पर पीठ ने कहा कि ‘‘भारत सरकार की दिलचस्पी हो सकती है परंतु हमें इसमें संतुलन बनाने की आवश्यकता है.’’

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वेणुगोपाल ने यह कहते हुए रिपोर्ट की प्रति मांगने पर जोर दिया, ‘‘इसे जब मैं देख सकूंगा तभी मैं इसके बारे में अपना जवाब दाखिल कर सकूंगा.

पीठ ने कहा कि हमारी सुविचारित राय है कि इस समय जो निर्धारित किया गया है वह केन्द्र सरकार और दूसरे पक्षकारों के लिये इस मामले में दो सप्ताह के भीतर अपना दृष्टिकोण रखने के लिये पर्याप्त होना चाहिए. इसके बाद जैसा भी उचित होगा आदेश दिया जाएगा.

पीठ ने इसके साथ ही इस मामले की सुनवाई 19 सितंबर के लिये स्थगित कर दी. पीठ ने कहा कि दावे और आपत्तियों से निबटने की मानक संचालन प्रक्रिया के बारे में रिपोर्ट पर विचार किया गया है.

प्रतीक हजेला ने न्यायालय के 28 अगस्त के आदेश के अनुपालन में यह रिपोर्ट दाखिल की थी और कहा था कि नागरिक पंजी में नाम शामिल करने के लिये कोई भी दावेदार सूची-ए में शामिल दस दस्तावेजों अपने दावे के समर्थन में इस्तेमाल कर सकता है.

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इससे पहले, 28 अगस्त को शीर्ष अदालत ने कहा था कि असम के राष्ट्रीय नागरिक पंजी के मसौदे में हाल ही में शामिल किए गए लोगों में से दस प्रतिशत के नामों का फिर से सत्यापन कराने पर वह विचार कर सकता है.

शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे को बड़े पैमाने वाली मानवीय समस्या बताया था और दावेदारों को अपनी विरासत के दस्तावेजों के नये सेट दायर करने की अनुमति देने के नतीजों के बारे में राष्ट्रीय नागरिक पंजी समन्वयक को सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट देने के लिये कहा था.

राज्य में राष्ट्रीय नागरिक पंजी का अंतिम मसौदा 30 जुलाई को प्रकाशित किया गया था जिसमें 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम शामिल थे. इस सूची में 40,70,707 लोगों के नाम नहीं थे. इनमें से 37,59,630 लोगों के नाम अस्वीकार कर दिए गए हैं जबकि 2,48,077 लोगों के नाम रोक लिए गए थे.

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