हिंदी न्यूज़ – भीमा-कोरेगांव हिंसा: नजरबंद किए गए पांचों वामपंथी विचारकों का पूरा बैकग्राउंड जानिए-Bhima Koregaon Violence: Know the background of all five house arrests thinker

भीमा-कोरेगांव हिंसा के मामले में पांच वामपंथी विचारक हाउस अरेस्ट हैं. 28 अगस्त को महाराष्ट्र पुलिस ने देश के अलग-अलग हिस्सों से इन पांचों को गिरफ्तार किया था. पुलिस का आरोप है कि पांचों विचारकों के नक्सलियों से संबंध हैं और पिछले साल पुणे के भीमा-कोरेगांव में भड़की हिंसा में पांचों की भूमिका थी. हालांकि 29 अगस्त को पुलिस द्वारा की गिरफ्तारी के विरोध में दायर की गई एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पांचों को हाउस अरेस्ट में रखने का आदेश दिया. गुरुवार को इस मामले में अगली सुनवाई होनी है. आइए जानते हैं मामले में गिरफ्तार पांंच लोग कौन हैं:-

वरवर राव (प्रसिद्ध कवि, लेखक और कार्यकर्ता )
क्रांतिकारी लेखन और सार्वजनिक भाषणों के लिए प्रसिद्ध लेखक और विचारक वरवर राव को उनके हैदराबाद स्थित घर से गिरफ्तार किया गया. उन्हें तेलुगू साहित्य के एक प्रमुख मार्क्सवादी आलोचक भी माना जाता है. राव ने दशकों तक स्नातक और स्नातक छात्रों को यह विषय पढ़ाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या की कथित साजिश के सिलसिले में पुणे पुलिस वरवर राव के घर की तलाशी ले चुकी है.

वरवर राव गिरफ्तारी पर क्या बोला उनका परिवारवरवर राव की गिरफ्तारी पर उनके परिवार ने कहा, ‘पुणे पुलिस ने उनके खिलाफ गिरफ्तारी और तलाशी वारंट पेश नहीं किया. पुलिस गवाह के रूप में अपने कर्मी को पुणे से लेकर आई थी. जबकि किसी पंचनामा रिपोर्ट में स्थानीय सम्मानित नागरिकों को गवाह बनाया जाता है. इसलिए ये भी एक अवैध कोशिश है.’

बता दें कि राव को उनके लेखन और राजनीतिक गतिविधियों के लिए पहली बार गिरफ्तार नहीं किया गया है. आंध्र प्रदेश सरकार ने 1973 में उनकी गिरफ्तारी का आदेश दिया था, लेकिन एक महीने जेल में बिताने बाद हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था. रखरखाव और आंतरिक सुरक्षा अधिनियम (एमआईएसए) के तहत इमरजेंसी के दौरान राव को फिर से गिरफ्तार किया गया था.

नागरिक अधिकार कार्यकर्ता सुधा भारद्वाज
भारद्वाज नागरिक अधिकार कार्यकर्ता
 हैं, जो छत्तीसगढ़ में लगभग तीन दशकों तक काम कर रही हैं. वह छत्तीसगढ़ में पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (पीयूसीएल) के महासचिव भी हैं और भूमि अधिग्रहण के खिलाफ बड़े पैमाने पर काम कर चुकी हैं. सुधा भारद्वाज ने मजदूरों के अधिकारों के लिए काम किया है. साथ ही दलित और जनजातीय अधिकारों के लिए काम करने वाली एडवोकेट भी हैं. पुणे पुलिस ने मंगलवार को उनके घर पर छापेमारी कर उन्हें आईपीसी की धारा 153 ए505(1) B,117,120 B के तहत गिरफ्तार किया गया है.

अपनी गिरफ्तारी पर क्या बोलीं सुधा भारद्वाज
अपनी गिरफ्तारी पर सुधा भारद्वाज ने कहा है कि मानवाधिकार उल्लंघन के खिलाफ बोलने वाले और दलितों, आदिवासियों के लिए लड़ने वाले लोगों को मौजूदा सरकार निशाना बना रही है. सुधा ने कहा, ‘मुझे लगता है कि जो भी वर्तमान शासन के खिलाफ है, चाहे वह दलित अधिकारों, जनजातीय अधिकारों या मानवाधिकारों की बात हो, विरोध में आवाज उठाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के साथ इसी तरह व्यवहार किया जा रहा है.’

अरुण फरेरा और वर्णन गोन्साल्वेज
अरुण फरेरा
 और वर्णन गोन्साल्वेज मुंबई बेस्ड कार्यकर्ता हैं. इसके पहले गोन्साल्वेज  को 2007 में गैरकानूनी गतिविधियों (रोकथाम) अधिनियम और शस्त्र अधिनियम के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था. हालांकि, 2013 में उन्हें रिलीज कर दिया गया था.

अरुण फरेरा बिजनेस ऑर्गनाइजेशन के पूर्व प्रोफेसर हैं. सुरक्षा एजेंसियों ने उन्हें  केंद्रीय समिति के सदस्य और नक्सलियों के महाराष्ट्र राज्य समिति के पूर्व सचिव के रूप में लेबल किया. वो 20 मामलों में आरोपी थे, लेकिन उन्हें सबूत की कमी की वजह से 17 मामलों में बरी कर दिया गया था. परेरा भी लेखक और कार्यकर्ता हैं.

गौतम नवलखा (नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और पत्रकार )
नवलाखा भी एक नागरिक अधिकार कार्यकर्ता और एक पत्रकार है और लंबे समय तक पीयूसीएल में शामिल हैं. उन्होंने मानव अधिकारों के मुद्दों पर कश्मीर और छत्तीसगढ़ में काम किया है. नवलाखा राजनीतिक और आर्थिक विषयों पर वीकली कॉलम भी लिखते हैं. वह कश्मीर में अपने व्यापक कार्य के लिए जाने जाते हैं और उन्होंने कश्मीर में मानवाधिकार और न्याय के लिए अंतरराष्ट्रीय पीपुल्स ट्रिब्यूनल के संयोजक के रूप में भी कार्य किया है. 2011 में नवलखा को श्रीनगर एयरपोर्ट पर कश्मीर में प्रवेश करने से रोक दिया गया था और उन्हें राज्य सरकार ने वापस दिल्ली भेज दिया था.

अपनी गिरफ्तारी पर क्या बोले गौतम नवलखा
नवलखा ने अपनी गिरफ्तारी पर कहा कि उनके खिलाफ दर्ज मामला विरोधियों को निशाना बनाने के लिए सरकार की राजनीतिक चाल है. उन्होंने कहा,  ‘एक राजनीतिक मामले को राजनीतिक रूप से लड़ा जाना चाहिए और मैं इस अवसर का स्वागत करता हूं. मुझे कुछ नहीं करना है. यह अपने राजनीतिक आकाओं के निर्देश पर काम कर रही महाराष्ट्र पुलिस पर है कि वह मुझ पर और मेरे साथियों के खिलाफ मामले को साबित करें, जिन्हें गिरफ्तार किया गया है.’

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