हिंदी न्यूज़ – After Section 377 Decision: Facebook Changes DP, Google Homepage Puts up ‘Rainbow Flag’–Section 377 पर सुप्रीम फैसले के बाद Google ने लगाया रेनबो फ्लैग, Facebook ने बदली डीपी

गूगल इंडिया ने सहमति के आधार पर बनाए जाने वाले समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे से बाहर करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अपने होमपेज पर रेनबो फ्लैग लगाया. विभिन्न मौकों पर डूडल लगाने वाली प्रसिद्ध इंटरनेट कंपनी ने अपने वेबपेज के सर्चबार के नीचे सात रंगों का झंडा लगाया.

माउस का कर्सर झंडे पर ले जाने पर एक पॉपअप संदेश आता है ‘सेलेब्रेटिंग इक्वल राइट्स.’ इसी तरह, फेसबुक ने भी अपना डीपी बदल लिया है और उसकी जगह कई रंगों का आईकन लगाया है.

गौरतलब है कि रेनबो फ्लैग को लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल और ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय के गौरव और सामाजिक आंदोलनों से जोड़कर देखा जाता है.

यह भी पढें: इस वकील ने Section 377 के लिए लड़ी 20 साल लंबी लड़ाईबता दें सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान बेंच ने गुरुवार को एकमत से 158 साल पुरानी भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के Section 377 के उस हिस्से को निरस्त कर दिया, जिसके तहत परस्पर सहमति से अप्राकृतिक यौन संबंध बनाना अपराध था. अदालत ने कहा कि यह प्रावधान संविधान में द्वारा दिए गए समता (बराबरी) के अधिकार का उल्लंघन करता है.

Google Home Page का स्क्रीन शॉट

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली संविधान बेंच ने परस्पर सहमति से स्थापित अप्राकृतिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखने वाले, Section 377 के हिस्से को तर्कहीन, सरासर मनमाना और बचाव नहीं करने योग्य करार दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यौन प्राथमिकता बाइलोजिकल और प्राकृतिक है. अंतरंगता और निजता किसी की निजी च्वाइस है. इसमें राज्य को दख़ल नहीं देना चाहिए. कोर्ट ने कहा कि किसी भी तरह का भेदभाव मौलिक अधिकारों का हनन है. धारा 377 संविधान के समानता के अधिकार आर्टिकल 14 का हनन करती है.

हालांकि, कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि Section 377 में प्रदत्त, पशुओं और बच्चों से संबंधित अप्राकृतिक यौन संबंध स्थापित करने को अपराध की श्रेणी में रखने वाले प्रावधान पहले जैसे ही रहेंगे. (एजेंसी इनपुट के साथ)

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