हिंदी न्यूज़ – शहीद की बेटी को एक साल बाद भी पिता का इंतज़ार, कहा- ‘पापा आएंगे तो कहीं जाने नहीं दूंगी’jammu kashmir martyr policeman daughter is waiting for her father so far

पिछले साल पिता के अंतिम संस्कार के दौरान रोती हुई जोहरा की भावुक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. अब एक साल बाद 8 साल की इस बच्ची का कहना है, ‘इस बार, मैं पापा को जाने नहीं दूंगी.’ बता दें कि जोहरा के घरवालों ने उसे (झूठा) दिलासा दिया है कि उसके पिता एक दिन लौटेंगे.

पिछले साल 28 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर पुलिस के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर अब्दुल रशीद शाह की पिछले साल हत्या कर दी थी. उनके पेट में गोली लगी थी. हमले के समय वह निहत्थे थे.

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शाह की बड़ी बेटी बिल्किस कहती हैं, ‘जोहरा पूछती रहती है कि उसके पिता कहां गए हैं. पिता के नहीं होने से वह चुपचाप और गमगीन रहने लगी थी. हमें आखिरकार उसे दिलासा देना पड़ा कि वह हज पर गए हैं और जल्द लौट आएंगे. जोहरा के चेहरे पर मुस्कान लौटाने में मुझे और मेरी अम्मी नसीमा को बड़ी मशक्कत करनी पड़ी.’ वहीं, जोहरा भी अपनी बड़ी बहन की बातों से संतुष्ट नजर आई. हालांकि, उसने कहा, ‘इस बार पापा आएंगे, तो मैं उन्हें कहीं जाने नहीं दूंगी.’

जोहरा खिलौने से खेलती है और उसकी बहन परिवार के अच्छे दिनों की तस्वीरें दिखाती है. जब जोहरा से कोई पूछता है तो वह किसे सबसे ज्यादा प्यार करती है तो वह चहककर कहती है, ‘पापा’. फिर बिल्किस उसे अपने गले से लगा लेती है.

बता दें कि पिता के अंतिम संस्कार के समय रोती हुई जोहरा की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी. जिसके बाद यूजर्स ने अपनी सहानुभूति जाहिर की थी. केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा था, ‘हम इस बच्ची जोहरा के आंसू भरे मासूम चेहरे को बर्दाश्त नहीं कर सकते.’

इस परिवार और शाह की दूसरी पत्नी शगुफ्ता के लिए भी पिछला एक साल बड़ी मुश्किलों से भरा रहा है. पुलिस विभाग से कोई राहत नहीं मिलने से उनके लिए चीजें बड़ी मुश्किल भरी हो गईं. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि विभाग तैयार है, लेकिन दोनों पत्नियों, नसीमा और शगुफ्ता को आपस में समझौता करना होगा.

बता दें कि दक्षिण कश्मीर में काजीगुंड के रहने वाले शाह ने अपनी पहली पत्नी को छोड़कर शगुफ्ता से शादी कर ली थी. हालांकि, अदालत में नसीमा को तलाक देने संबंधी शाह का दावा साबित नहीं हो पाया और तब आदेश दिया गया था कि नसीमा को 10,000 रुपये प्रति महीना अंतरिम भुगतान किया जाए. शाह की मौत के बाद वह पैसा आना बंद हो गया. बिल्किस कहती है, ‘हमारी देखभाल हमारे मामा कर रहे हैं.’

संपर्क करने पर शगुफ्ता भी कहती है कि उसे भी अपनी जिंदगी चलाने के लिए दर-दर की ठोकर खानी पड़ रही है. उसने कहा, ‘चार साल की बच्ची के साथ घर चलाना बड़ा मुश्किल है.’

एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि शाह के मुआवजे पर निर्णय लिए जाने से पहले कानूनी लड़ाई में थोड़ा वक्त लग सकता है. पुलिस अधिकारी दोनों ही परिवार को जल्द से जल्द किसी समझौते पर पहुंच जाने के लिए राजी करने में जुटे हैं. (एजेंसी इनपुट)

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