हिंदी न्यूज़ – Foot Soldiers, Nerve Centres and WhatsApp: How Today’s Bharat Bandh Was Planned and Executed

News18.com

Updated: September 10, 2018, 11:59 PM IST

रौनक कुमार गुंजन

कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत ने गुरुवार को जैसे ही भारत बंद का ऐलान किया, देशभर के राज्‍य इकाइयों के कार्यकर्ताओं को इसकी सूचना दे दी गई. उन्‍हें सप्‍ताह के अाखिर में सक्रिय रहने को भी कह दिया गया. इसके बाद बड़े नेताओं के पास भाषण तैयार करने, वीडियो बनवाने और धरना-प्रदर्शन के लिए पुलिस अनुमति लेने की जिम्‍मेदारी थी, तो जमीनी कार्यकर्ताओं को लोगों को जोड़ने के साथ शांति बनाए रखने का काम दिया गया.

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बंद सोमवार सुबह नौ से दोपहर तीन बजे तक रखना तय हुआ और इसमें राज्‍य स्‍तरीय रैलियों के साथ ही पेट्रोल पंपों पर सांकेतिक धरना देने की रणनीति बनाई गई. पार्टी के बड़े नेताओं, महासचिवों, प्रदेश कांग्रेस के अध्‍यक्षों और अन्‍य वरिष्‍ठ पदाधिकारियों की बैठक में यह फैसला लिया गया. वॉट्सऐप ने भी इस बंद में कांग्रेस के लिए बड़ी भूमिका निभाई.ये भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल के दाम ने फिर तोड़ा रिकॉर्ड, 80.73 रुपए लीटर हुआ पेट्रोल

मध्‍य प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ता अमित शर्मा ने बताया, ‘बंद करवाना काफी मुश्किल काम होता है. आपको सभी लोगों को घरों के अंदर रखना होता है, ठीक इसी समय पार्टी कार्यकर्ताओं और अन्‍य लोगों को भी प्रदर्शन में शामिल करने के लिए इकट्ठा करना होता है. जैसे ही गहलोत साहब ने घोषणा की थी मुझे योजना के बारे में राज्‍य और जिला अध्‍यक्ष की ओर से संदेश मिलने लग गए थे. फौरन कई सारे वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए और लोगों को जोड़ा गया.’

शर्मा ने विस्‍तार से बताया कि ‘प्रेरणादायी’ संदेशों और लोगों की नाराजगी से जुड़ी पोस्‍ट की बौछार के बाद कार्यकर्ताओं को बंद और प्रदर्शन के नोडल पॉइंट के बारे में बताया गया. उदाहरण के तौर पर भोपाल में मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय की फूलों की दुकान को प्रदर्शन का केंद्र बनाया गया. आमतौर पर प्रदेश अध्‍यक्ष जिला स्‍तरीय अध्‍यक्षों से चर्चा के बाद नोडल पॉइंट चुनता है.

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नोडल पॉइंट चुने जाने के बाद पार्टी कार्यकर्ता खुद से शहर में चार या पांच ऐसी जगह चुनते हैं, जहां उन्‍हें तैनात किया जाना है. यहीं से भीड़ जुटना शुरू होती है.

अजमेर में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का पेट्रोल पंप पर प्रदर्शन.(Photo:PTI)

मध्‍य प्रदेश कांग्रेस प्रवक्‍ता पंकज चतुर्वेदी ने बताया, ‘प्रमुख जगहों को चुनने के बाद कार्यकर्ता स्‍थानीय गाडि़यां किराए पर लेते हैं और बंद के बारे में मुनादी कराते हैं. वे दुकानदारों और सरकारी गाडि़यों के ड्राइवरों के पास जाते हैं और उनसे सहयोग करने को कहते हैं.’

बड़ी संख्‍या में पंपलेट छपाए गए और फ्लैक्‍स तैयार कराए गए. बंद के दिन तक पार्टी ऑफिस 24 घंटे खुला रहा. प्रत्‍येक कार्यकर्ता अपने स्‍तर पर अपने क्षेत्र में लोगों को रैली में आने और काम पर न जाने के लिए राजी करता है. शर्मा के अनुसार, ‘उन्‍हें(कार्यकर्ताओं) लोगों की विचारधारा की जानकारी होती है और वे दूसरी विचारधारा वालों से मदद नहीं मांगते हैं.’

कांग्रेस कार्यकर्ता ने आगे बताया, ‘जब भी पुलिस को गड़बड़ी का डर लगता है तो वे बचाव के उपायों के तहत कुछ लोगों को हिरासत में ले लेते हैं. उनमें से कुछ हमारे कार्यकर्ता भी होते हैं और कुछ ऐसे होते हें जो बंद को सफल बनाने में हमारी मदद कर सकते हैं. इससे भीड़ पर असर पड़ता है लेकिन हम स्थिति संभाल लेते हैं.’

ऐसा ही मामला झारखंड में हुआ जहां 1000 लोगों को हिरासत में ले लिया गया और 5000 से ज्‍यादा सुरक्षाकर्मी तैनात कर दिए गए. हालांकि बंद के दिन कांग्रेस ने इसे सफल बताया तो बीजेपी ने बंद के लिए तानाशाही भरे कदम अपनाने के आरोप लगाए.

कई कांग्रेस नेताओं ने लोगों और दुकानदारों को बंद में शामिल होने के लिए रैलियां कीं. ऐसी भी खबरें आई हैं कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने कई जगहों पर जबरदस्‍ती बंद कराए. हालांकि बिहार में बात हाथ से निकल गई जहां हिंसा और आगजनी के कई मामले सामने आए. जहानाबाद में जाम में गाड़ी फंसने के चलते दो साल की बच्‍ची की मौत हो गई.

सभी राज्‍यों में ऊपरी स्‍तर पर प्‍लानिंग एक जैसी ही रही लेकिन जहां राज्‍य सरकारों ने बंद का समर्थन नहीं किया वहां प्रदर्शन के स्‍तर में अंतर रहा. उदाहरण के तौर पर पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने प्रदर्शन में हिस्‍सा लिया लेकिन बंद में शामिल होने से इनकार कर दिया.

कोलकाता के एक तृणमूल कार्यकर्ता जयंत रॉय ने बताया, ‘हमारा काम यह तय करना था कि लोग सुरक्षित काम पर पहुंच जाए और किसी को भी बंद के लिए परेशान नहीं किया जाए. हमारी पार्टी का रूख साफ था. हम तेल की बढ़ती कीमतों व गिरते रुपये के खिलाफ हैं लेकिन इसके चलते लोगों के रोजमर्रा के कामकाज को गड़बड़ नहीं करना चाहते.’

बिहार के राजद कार्यकर्ता राजेश कुमार बंद को लेकर कहते हैं, ‘यह राजनीतिक ताकत दिखाने का अवसर था. सब कुछ प्‍लान था, यहां तक कि छोटी से छोटी से रैली व मामूली सा भाषण भी और हमारे जैसे जमीनी कार्यकर्ता इसके केंद्र में थे.’

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