हिंदी न्यूज़ – क्या कर्नाटक में सच साबित होगा न्यूटन का ये नियम? – Karnataka Govt. Likely to Book BJP leaders in Horse Trade

शरत शर्मा कलगारु

केंद्र और राज्य दोनों के बीजेपी नेता एचडी कुमारस्वामी की सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं. संभावना है कि इनसे निपटने के लिए कर्नाटक सरकार एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) का इस्तेमाल कर सकती है. इसे देख कर राजनातिक जानकारों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या हर क्रिया की बराबर प्रतिक्रिया वाला न्यूटन का नियम राज्य की राजनीति में सच साबित हो जाएगा.

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बीजेपी के राज्य प्रमुख बीएस येदियुरप्पा फिर से मुख्यमंत्री बनने की जोरदार कोशिशों में लगे हुए हैं, जबकि कुमारस्वामी और गठबंधन के नेता उन्हें रोकने में लगे हैं. ऑपरेशन कमल को रोकने की एक युक्ति में सरकार ने एसीबी के दरवाजे खटखटाए हैं. विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक एसीबी, बीएस येदियुरप्पा, पूर्व मंत्री और विधायक श्रीरामुलु और बीजेपी महामंत्री मुरलीधर राव समेत कुछ लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने वाली है.विधानसभा चुनावों के बाद जिस तरह से बीजेपी को राज्यपाल ने मई में सरकार बनाने के लिए मौका दिया उसे लेकर कई तरफ से राज्यपाल की आलोचना की गई थी. बहरहाल बीजेपी बहुमत साबित नहीं कर सकी और उस पर कांग्रेसी विधायकों को खरीदने के आरोप भी लगाए गए.

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येदियुरप्पा, मुरलीधर राव और श्रीरामुलु, खनन के दिग्गज जनार्दन रेड्डी, सुभाष इकुरु और येदियुरप्पा की फोन पर आवाज को कांग्रेस एमएलसी वीएस युगरप्पा ने जारी भी किया था. मीडिया रिपोर्ट के आधार पर आरटीआई कार्यकर्ता दिनेश कल्लाहल्ली ने एसीबी में 22 मई को एक शिकायत दर्ज कराई. एसीबी के अधिकारी इसे दर्ज करके उचित मौके की तलाश कर रहे थे.

7 अगस्त को एसीबी ने मामला दर्ज कराने वाले दिनेश को जांच अधिकारी के सामने उपस्थित होने का नोटिस भेजा. अब इस मामले की प्राथमिक जांच की जा रही है. कुमारस्वामी सरकार अब इस मामले को लेकर उसी तरह के हमले करने की तैयारी में है जैसा आयकर को लेकर कांग्रेस और जेडीएस के नेता डीके शिवकुमार और कुमारस्वामी के सहयोगियों के साथ किया गया था.

हॉर्स ट्रेडिंग ?
राज्यपाल से सरकार बनाने का न्योता मिलने के तुरंत बाद खनन दिग्गज जनार्दन रेड्डी को कांग्रेस के विधायकों को हाईजैक करने का जिम्मा सौंपा गया. बीजेपी किसी भी तरह जादुई आंकड़े तक पहुंचना चाहती थी. येदियुरप्पा किसी भी हालत में मुख्यमंत्री बनने का मौका नहीं गंवाना चाहते थे. उन्हें ये भी पता था कि अगले चुनाव में उनकी जगह कोई और ला दिया जाएगा.

बीएस येदियुरप्पा, अध्यक्ष, कर्नाटक बीजेपी

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कांग्रेस के संकटमोचक डीके शिवकुमार को कांग्रेस ‘विधायकों को बचा कर’ रखने की जिम्मेदारी सौंपी गई. शिवकुमार इस काम के लिए मशहूर हैं और उन्हें ये जिम्मा तीसरी बार सौंपा गया. 2002 में कांग्रेस की अगुवाई वाली महाराष्ट्र की विलासराव देशमुख सरकार को भी एसएम कृष्णा के दौर में विधायकों को डीके शिवकुमार के रिजॉर्ट में लाकर ही बचाया गया था. उसी दौर में शिवकुमार लाइम लाइट में आए थे और गांधी परिवार से उनके रिश्ते मजबूत हुए थे.

जब गुजरात में बीजेपी ने सोनिया गांधी के राजनीतिक सचिव अहमद पटेल को राज्य सभा चुनावों में हराने की कोशिश की थी तब भी शिवकुमार ने ही गुजरात के विधायकों को यहां लाकर रखा था. उन पर उस वक्त आयकर और प्रवर्तन निदेशालय के छापे भी पड़े थे. अहमद पटेल जीत गए और शिवकुमार की साख भी बढ़ी.

इस साल भी मई में डीके शिवकुमार को फिर से उसी तरह की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने अपना काम किया. इस दौरान बीजेपी नेता कथित तौर पर फोन करके कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त करने की कोशिश कर रहे थे.

रिकॉर्ड की हुई आवाज सार्वजनिक करते हुए कांग्रेस विधायक वीएस उग्रप्पा ने आरोप लगाया कि येदियुरप्पा और श्रीरामुलु समेत मुरलीधर राव ने बहुत से विधायकों को संपर्क किया. इन आवाजों को देशभर की मीडिया को भी सुनाया गया था. इसी आरोप के आधार पर आरटीआई कार्यकर्ता कल्लाहल्ली ने इस मामले में एक शिकायत दर्ज कराई. एसीबी ने अब मामला उठाया है और इसकी जांच कर रही है. इसकी संभावना है कि वो अब येदियुरप्पा और मुरलीधर राव को भी नोटिस जारी करे.

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