हिंदी न्यूज़ – बांग्ला फिल्म में उत्तर प्रदेश पर टिप्पणी को म्यूट करने का निर्देश – CBFC will not allow a disparaging reference to Uttar Pradesh

सेंसर बोर्ड ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद और अभिनेता देव अधिकारी की फिल्म के एक डॉयलॉग में ‘उत्तर प्रदेश’ शब्द को राष्ट्रीय एकता के विरुद्ध मानते हुए उसकी आवाज को खत्म करने यानी म्यूट करने के लिए कहा है. फिल्म में उत्तर प्रदेश के बारे में एक संदर्भ पर सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) ने आपत्ति उठाई है.

बोर्ड ने फिल्म ‘होईचोई अनलिमिटेड’ के निर्देशक अनिकेत चटोपाध्याय को नोटिस भेज कर उत्तर प्रदेश शब्द को म्यूट करने को कहा है. उत्तर प्रदेश शब्द वाला डॉयलॉग ट्रवेल एजेंट रजत्व दत्ता के ऑफिस के बाहर है. इसमें इसमें दिखाया गया है कि चार पुरुष अपनी चार महिला साथियों को लेकर विदेश यात्रा पर गए हैं. दत्ता कहते हैं-“आप चार पुरुष और चार महिला हैं जो सभी 30 से कम हैं.”

इस पर फिल्म में अभिनय कर रहे देव पूछते हैं- “तुम क्या मोरल पुलिस हो.” इस पर जवाब मिलता है -“छोड़ो ये सब तो उत्तर प्रदेश में होता है. तुम्हारे बाप का पैसा है जो मन वो करो. मुझे क्या.” सीबीएफसी ने सिनेमैटोग्राफ एक्ट 1952 के तहत इसे नियम के विरुद्ध माना है. इसके तहत ऐसे शब्द या दृश्य जिनसे सांप्रदायिकता या फिर राष्ट्र विरोधी या वैज्ञानिकता के विरुद्ध सोच को बढ़ावा मिलता है उन्हें रोका जाना चाहिए.

कोलकाता में सीबीएफसी सलाहकार पैनल के सदस्य पार्थ सारथी चौधरी का कहना है, “किसी को भी मेरे राज्य की छवि खराब करने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए, मजाक के लिए भी नहीं. उत्तर प्रदेश को मोरल पुलिसिंग से क्यों मिलाया जाय जब हम जानते हैं कि बंगाल में भी रेप पीड़ितों तक के साथ मोरल पुलिसिंग होती है.”

उनका ये भी कहना है, “अगर कोई बंगाल के बारे में भी छवि बिगाड़ने वाली बात कहता तो भी हम इसी तरह से प्रतिक्रिया देते. हम किसी को राष्ट्रीय एकता पर प्रहार करने नहीं देंगे. हम मजाक को समझते हैं. हमने सिर्फ शब्द को म्यूट करने को कहा है, जो नियमों के विरुद्ध है.

फिल्म के प्रोड्यूसर भी देव ही हैं. वे कहते हैं, “हमारा मकसद किसी की भावनाओं को चोट पहुंचाना नहीं है. इन दो शब्दों को म्यूट करने से हमारी फिल्म पर कोई असर नहीं होगा. मुझे यू सर्टिफिकेट से खुशी है और इसे मैं पूजा के दौरान रीलिज करने वाला हूं.”

लेकिन फिल्म के निर्देशक इससे खुश नहीं है. चटोपाध्याय का कहना है, “इससे पहले कि प्रोडक्शन हाउस कट लगाए मैं अपना पक्ष रख सकता हूं.” वे इसे लेकर सुखद आश्चर्य में है कि और भी बहुत से शब्द हैं. फिल्म में दत्ता ये भी बोलता है- रोमन्स एंड कंट्रीमैन, लेकिन जब उससे कहा जाता है कि बंगाली में बोले तो वो कहता है- “मितरों’. एक सहायक कहता है कि “वे गुजराती बंगाली है”. मन की बात और अच्छे दिनों को लेकर भी व्यंगात्मक टिप्पणियां की गई हैं.

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