हिंदी न्यूज़ – भाजपा के केंद्रीय पर्यवेक्षक स्थिति का जायजा लेने जाएंगे गोवा-bjp observers leaders to take stock of situation in goa

गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर की अस्वस्थता के मद्देनजर राज्य की राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के तीन केंद्रीय पर्यवेक्षकों की एक टीम रविवार को दोपहर को गोवा पहुंची. दूसरी ओर विपक्षी दल कांग्रेस का कहना है कि वह घटनाक्रम पर नजर रख रही है और राज्य में सरकार बनाने की संभावनाएं टटोलेगी. अभी इस तटीय राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार है. कुछ मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि भाजपा पर्रिकर के स्वस्थ होने तक गोवा में मुख्यमंत्री पद के लिए विकल्प तलाश रही है.

मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के बीमार रहने के कारण राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं. पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे पर्रिकर नई दिल्ली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में इलाज करा रहे हैं.

भाजपा ने अपने राष्ट्रीय महासचिवों बीएल संतोष और राम लाल और गोवा के प्रभारी विजय पुराणिक को राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए भेजा है. वह राजनीतिक हालात का जायजा लेंगे और पार्टी के नेताओं तथा सहयोगी दलों के साथ चर्चा करेंगे. गोवा में बीजेपी सरकार गोवा फॉरवर्ड पार्टी, महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी और निर्दलीयों के सहयोग से सत्तारूढ़ है.

केंद्रीय पर्यवेक्षकों ने रविवार को शहर के एक होटल में पार्टी के विधायकों और गोवा भाजपा प्रमुख तेंदुलकर तथा दक्षिणी गोवा से सांसद नरेंद्र सवाईकर से मुलाकात की. बैठक के बाद गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे ने कहा कि उन्होंने मौजूदा राजनीतिक स्थिति के बारे में अपनी राय दी और अब पार्टी को फैसला करना है. राणे ने हालांकि बैठक का ब्यौरा देने से इनकार कर दिया.उन्होंने कहा, ‘हमने उन्हें तथ्यों से अवगत कराया. हम में से हर एक की अपनी राय है और हमने उन्हें उनसे अवगत कराया. क्या बातचीत हुई, यह सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा.’ गोवा विधानसभा के उपाध्यक्ष माइकल लोबो ने संवाददाताओं से कहा कि बैठक सरकार के कामकाज और पर्रिकर की बीमारी पर केंद्रित रही.

लोबो ने कहा, ‘पार्टी आलाकमान द्वारा भेजे गए पर्यवेक्षक स्थिति का जायजा ले रहे हैं. उन्हें आलाकमान को रिपोर्ट करने दीजिए और समस्या के समाधान के लिए हमारे पास आने दीजिए.’ इससे पहले माइकल लोबो ने शनिवार को कहा था कि पार्टी के दूत सहयोगियों को सुझाव देंगे कि उन्हें भगवा पार्टी का हिस्सा बनना चाहिए.

लोबो ने कहा, ‘जीएफपी और एमजीपी को भाजपा में विलय का प्रस्ताव दिया जाएगा. इसके बाद ही हम दूसरे मुद्दों पर बात करेंगे जैसे कि कौन अगला मुख्यमंत्री होगा या कौन प्रभार संभालेगा या इससे संबंधित कुछ और.’

40 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के अभी 14 विधायक हैं जबकि जीएफपी और एमजीपी के तीन-तीन विधायक हैं. उसे तीन निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन प्राप्त है. कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं जबकि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के पास एक विधायक है.

इस बीच, कांग्रेस ने रविवार को कहा कि वह घटनाक्रम पर नजर रख रही है और गोवा में सरकार बनाने की संभावनाएं तलाश सकती है लेकिन उसने कहा कि वह ‘राज्य के हितों के साथ समझौता नहीं करेगी.’

अखिल भारतीय कांग्रेस समिति के सचिव एवं गोवा में पार्टी के प्रभारी ए. चेल्लाकुमार ने कहा, ‘हमारा रुख बहुत स्पष्ट है. निश्चित तौर पर हम सभी संभावनाओं को टटोलेंगे लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि हम गोवावासियों की विचारधारा या हितों से समझौता करके ऐसा करेंगे. हमें गोवा के लोगों के हितों से समझौता करके सत्ता पाने की जल्दबाजी नहीं है. कांग्रेस लोगों के प्रति जवाबदेह है.’

उन्होंने कहा, ‘हमारे सभी विधायक एकजुट हैं. हम अभी देख रहे हैं कि सत्तारूढ़ खेमे में क्या चल रहा है? अंदरुनी कलह शुरू हो गई है. कैबिनेट मंत्रियों ने एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाने शुरू कर दिए हैं.’ चेल्लाकुमार ने कहा कि भाजपा के खेमे में गए विधायकों के पास अब अपनी गलती सुधारने का समय है. पर्रिकर को शनिवार सुबह एम्स में भर्ती कराया गया था. उनका इस साल की शुरुआत में अग्नाशय संबंधी बीमारी के लिए अमेरिका में तीन महीने लंबा इलाज चला था.

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