हिंदी न्यूज़ – बस इतनी सी बात जान जायेंगे तो ट्रेन में हर बार बुक कर सकेंगे कन्फर्म टिकट । What do you need to know about the Indian railway’s IRCTC train reservation system

रेल भारत में आज भी यातायात के सबसे सस्ते माध्यमों में से एक है. लेकिन रेलवे का टिकट आज भी लोगों के लिए अबूझ पहेली है. कभी-कभी आपकी 50 वेटिंग वाली टिकट भी क्लियर हो जाती है और कभी-कभी आपकी 5 वेटिंग वाली टिकट भी नहीं क्लियर होती. और आज जब ज्यादातर लोग ई-टिकट लेने लगे हैं तो आपकी टिकट क्लियर न होने का मतलब टिकट का कैंसिल हो जाना होता है. ऐसे में कई बार आपको अपने जरूरी प्रोग्राम कैंसिल करने पड़ते हैं. जिससे आपका नुकसान हो जाता है. ऐसे में जरूरी है कि आप टिकट के गणित को समझ लें ताकि आपको आगे कोई नुकसान न उठाना पड़े.

भारतीय रेलवे की ज्यादातर ट्रेनों में सारी सीटें अलग-अलग कोटे में बांट दी जाती हैं. ये कोटा कई तरह के होते हैं. इसे हमें एक ट्रेन के उदाहरण के जरिए समझना होगा. चलिए मान लेते हैं कि एक नॉर्मल एक्सप्रेस ट्रेन में अगर 12 कोच हैं. और जब हर कोच में 72 सीटें होती हैं. तो इस तरह से 12 कोचों में (12*72) = 864 सीटें हो जाएंगी. अब ये 864 सीटें इन प्रमुख कोटों में अलग-अलग बांटी जायेंगी –

जनरल कोटा
तत्काल कोटा लेडीज कोटा
पूल्ड कोटा
एचओ कोटा
डिफेंस कोटा
फॉरेन कोटा
पीएच कोटा

इनके अलावा भी कुछ कोटे होते हैं लेकिन ये प्रमुख हैं. इन सारे ही कोटों के लिए अलग-अलग सीटें रिजर्व कर दी जाती हैं. एक एक्सप्रेस ट्रेन में सामान्यत: जनरल कोटा, तत्काल कोटा, लेडीज कोटा और पूल्ड कोटा होता ही होता है. दूसरी विशेष ट्रेनों में और भी कोटे हो सकते हैं.

तत्काल कोटा
इसमें कुल सीटों में से 30 फीसदी सीटें तत्काल कोटा के लिए रिजर्व कर दी जाती हैं. यानी 864 का 30 फीसदी. मतलब 259 सीटें. इन सीटों को ट्रेन के चलने की तारीख से 1 दिन पहले बुक किया जाता है.

TQWL- ये तत्काल की वेटिंग लिस्ट होती है. तत्काल एक दिन पहले ही बुकिंग के लिए खुलता है. और इसमें ज्यादातर वे ही लोग टिकट लेते हैं जिनका अगले दिन यात्रा करना बहुत जरूरी होता है. साथ ही तत्काल का टिकट लेने वाले इसके लिए आम टिकट से ज्यादा पैसे भी खर्च करते हैं. इसलिए तत्काल में वेटिंग मिलने पर उसके कन्फर्म होने के चांसेस कम ही होते हैं क्योंकि पहले से ही इस कैटेगरी में सीटें कम होती हैं और इसके पैसेंजर्स का अधिकतर अगले दिन यात्रा करना बहुत जरूरी भी होता है. दिसंबर, 2016 तक इसे CKWL के नाम से भी जाना जाता था. तत्काल की वेटिंग लिस्ट में एक खास बात यह होती है कि तत्काल में सीट खाली होने पर जनरल वेटिंग लिस्ट की तरह आपको RAC (रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन) वाली सीट नहीं मिलती, आपको पूरी सीट मिल जाती है.

इस खबर को आप यहां देख भी सकते हैं:

लेडीज कोटा
ट्रेन के हर कोच में 2 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व होती हैं. ऐसे में अगर ट्रेन में 12 कोच हैं तो उनमें 24 सीटें महिलाओं के लिए लेडीज कोटा के तहत रिजर्व होंगीं.

पूल्ड कोटा
पूल्ड कोटा के तहत 8 फीसदी सीटें रिजर्व होती हैं. लेकिन पहले जान लीजिए कि यह पूल्ड कोटा होता क्या है? समझते हैं. अगर कोई ट्रेन 1 नंबर स्टेशन से 7 नंबर स्टेशन तक जाती है तो इसके बीच में 2 नंबर से लेकर 6 नंबर तक के स्टेशन पड़ेंगे. लेकिन 4 नंबर स्टेशन इस रूट का एक प्रमुख स्टेशन है. तो ऐसे में 8 फीसदी सीटें पूल्ड कोटे के तहत रिजर्व रहेंगीं. यानी 864 का 8 फीसदी यानी 69 सीटें इस स्टेशन के लिए पूल्ड कोटे के तहत रिजर्व होंगीं.

इसमें वेटिंग के नियम :

PQWL- इसका मतलब होता है पूल्ड कोटा वेटिंग लिस्ट. बहुत सारी ट्रेनों में पूल्ड कोटा दिया जाता है. और यह तब दिया जाता है जब बुकिंग ट्रेन जिस स्टेशन से चलती है उस स्टेशन से ट्रेन आखिरी स्टेशन के बीच किसी स्टेशन के लिए की जाती है. जैसे अगर ट्रेन दिल्ली से भोपाल होते हुए मुंबई जाती है. और इस ट्रेन में आप दिल्ली से भोपाल या भोपाल से मुंबई का टिकट ले रहे हैं और आपको वेटिंग मिल रही है तो आपको PQWL कैटेगरी में वेटिंग मिलेगी. अब सीधा सा गणित इसपर भी अप्लाई होता है. इस कैटेगरी में जनरल कैटेगरी से कम सीटें होती हैं, जाहिर है इस कैटेगरी वाली वेटिंग में टिकट के कन्फर्म होने के चांसेज जनरल वेटिंग लिस्ट से कम होते हैं.

अब फिर से एक बार हिसाब लगा लेते हैं. ट्रेन में कुल सीटें थीं – 864. तत्काल कोटा में सीटें – 259. लेडीज कोटा की सीटें – 24. पूल्ड कोटा की सीटें – 69. यानी की बची हुई सीटें – (864-259-24-69)= 512.

ऐसा भी नहीं है कि बची सारी 512 सीटें जनरल कोटे में आती हों. इसमें अभी RAC की सीटें भी होती हैं.

RAC कैसे डिसाइड होता है?
हर कोच में 9 साइड लोअर बर्थ होती है. ऐसे में जब हम ट्रेन में 12 कोच मानकर चल रहे हैं, तो पूरी ट्रेन में 108(12*9) साइड लोअर बर्थ हो जाएंगीं. इन टोटल साइड लोअर बर्थ का 35 फीसदी यानी 37 सीटें उनके लिए रिजर्व होती हैं जिन्होंने जनरल कैटेगरी में रिजर्वेशन कराया होता है और साइड लोअर बर्थ की डिमांड की होती है. यानी की कुल 108 साइड लोअर में से 71 साइड लोअर ऐसी होंगीं जो केवल RAC कैटेगरी में रिजर्व होंगीं. जिन पर 142 लोग बैठकर जायेंगे क्योंकि RAC में एक साइड लोअर पर 2 यात्रियों को जगह दी जाती है. RAC में रिजर्वेशन के नियम :

RAC- इसका पूरा नाम रिजर्वेशन अगेंस्ट कैंसिलेशन होता है. ऐसे में अगर आपको पहले से ही RAC का टिकट मिला हुआ है तो माना जाता है कि ट्रेन चलने से पहले जो चार्ट बनेगा, उसमें आपके टिकट के कन्फर्म होने के चांसेज बहुत ज्यादा हैं.

जनरल रिजर्वेशन के बारे में ये हैं नियम
अब फिर से हिसाब करते हैं. आखिरी हिसाब में सीटें बचीं थीं 512 जिनमें से 71 और कम हो गयीं. यानि जनरल की सीटें बचीं 441. माने एक 12 कोच वाली ट्रेन जिसमें कुल 864 सीटें हैं. उसमें जनरल रिजर्वेशन के लिए 441 सीटें होंगीं. यानि करीब-करीब आधी. जब इस कोटे की सारी टिकट बुक हो जाती हैं तो जनरल वेटिंग लिस्ट में बुकिंग होती है. जिसे GNWL कहते हैं. ये हैं इसके नियम :

GNWL- ये वेटिंग लिस्ट तब मिलती है जब कोई पैसेंजर ट्रेन जहां से चलती है वहां से लेकर ट्रेन के आखिरी स्टेशन तक के लिए ट्रेन में टिकट बुकिंग करवाता है. हालांकि एक-दो अगर पैसेंजर का स्टेशन पहले या आखिरी स्टेशन के पास के ही 1-2 स्टेशन वाला है तो भी उसे जनरल वेटिंग लिस्ट ही दी जाती है. जैसा कि ऊपर बताया गया कि इस कोटे के लिए सबसे ज्यादा सीटें रिजर्व होती हैं. और इसी कोटे में फाइनल चार्ट बनते वक्त आपकी सीट कन्फर्म हो जाने के चांसेज सबसे ज्यादा होते हैं.

अब जान लें कबसे बुक होने लगता है टिकट?
जनरल कोटा, लेडीज कोटा और पूल्ड कोटा यात्रा के दिन से 120 दिन पहले यानि करीब 4 महीने पहले टिकट बुक करा सकते हैं. ये तो जानते ही हैं कि तत्काल कोटा 1 दिन पहले टिकट बुक करा सकते हैं. जब टिकट बुक की जाती है तो अगर आपका सीट के मामले में कोई प्रिफरेंस नहीं है तो आपको सबसे पहले अपर बर्थ फिर मिडिल बर्थ और फिर लोअर बर्थ दी जाती है.

लोअर बर्थ का नियम
लोअर बर्थ ज्यादातर महिलाओं या फिर जिनकी उम्र 45 साल से ऊपर है, उन्हें दी जाती है.

अब अगर ये सारे टिकट, जिनका ऊपर जिक्र है बुक हो चुके हैं. फिर भी कोई टिकट बुक करता है तो उसे वेटिंग लिस्ट दी जाती है.

अब अगर आप अपने टिकट का स्टेटस चेक कर रहे हैं और वह आपको WL 60/45 दिखा रहा है यानि अभी तक केवल 15 टिकट कैंसिल हुए हैं. और आपके टिकट के कन्फर्म होने के चांसेस कम हैं. वहीं अगर WL 60/12 दिखा रहा है यानि आपके टिकट के कन्फर्म होने के चांसेस ज्यादा हैं.

कुछ खास तरह की वेटिंग लिस्ट भी होती हैं, इनके बारे में भी जान लें –
RLWL- इसका मतलब होता है रिमोट लोकेशन वेटिंग लिस्ट. दरअसल ट्रेन यात्रा के दौरान जितने स्टेशनों पर रुकती है, उनमें से कई को रिमोट लोकेशन के तौर पर मार्क किया गया होता है. जो पैसेंजर यात्रा के लिए इऩ स्टेशनों से टिकट बुक कराते हैं उन्हें वेटिंग का टिकट RLWL कैटेगरी में टिकट मिलता है. जिसके लिए रिजर्व सीटें कम होती हैं. इसलिए वेटिंग टिकट का कन्फर्म होना भी मुश्किल होता है.

RLGN- इसका मतलब रिमोट लोकेशन जनरल वेटिंग लिस्ट होता है. यह वेटिंग तब जारी की जाती है जब WL कोटा RLWL होता है. इसका मतलब होता है कि RLWL वेटिंग लिस्ट में टिकट बुक होने के बाद RLGN हो जायेगा.

RQWL- इसका मतलब रिक्वेस्ट वेटिंग लिस्ट होता है. अगर ट्रेन के रूट के किसी बीच के स्टेशन के लिए बुकिंग की जाती है और यह जनरल कोटा, रिमोट लोकेशन कोटा या पूल्ड कोटा में नहीं आता है तो ऐसे में RQWL वेटिंग लिस्ट जारी की जाती है.

RSWL- इसका मतलब रोडसाइड वेटिंग लिस्ट होता है. यह वेटिंग लिस्ट तब दी जाती है जब सीट ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से यात्रा के लिए पैसेंजर टिकट बुक करता है. यह बुकिंग छोटे स्टेशनों के लिए होती है साथ ही इनपर मिनिमम दूरी की बाध्यता भी लागू नहीं होती है.

यह भी पढ़ेंतो इसलिए रेलवे कैंसिल कर देता है इंटरनेट से लिया गया वेटिंग का टिकट

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *