हिंदी न्यूज़ – मोहन भागवत ने बताया- क्‍या है संघ, कांग्रेस की तारीफ में कही यह बात-Mohan Bhagwat Says ‘Congress Played Big Role in Freedom Struggle’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने सोमवार को कहा कि संगठन देश में एक ‘ताकत’ बनकर उभरा है और कई लोग इससे डर की वजह से इस पर निशाना साधते हैं. उन्होंने आरएसएस की व्याख्यान श्रृंखला में कहा, ‘जब आरएसएस की शक्ति बढ़ती है, तो इसके काम का स्वत: प्रचार होता है. जब इसका काम लोकप्रिय होता है, तब लोग इसके बारे में और जानना चाहते हैं. ऐसे में कुछ इसकी बढ़ती ताकत से डर जाते हैं और संघ पर निशाना साधते हैं जोकि स्वाभाविक है.’

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तीन दिवसीय कार्यक्रम ‘भारत का भविष्य: आरएसएस का दृष्टिकोण’ यहां सोमवार से शुरू हुआ, लेकिन विपक्ष के आमंत्रित नेता इससे दूर रहे. भागवत ने कहा, ‘यह कार्यक्रम आरएसएस को समझने के लिए लोगों के लिए आयोजित किया गया है, क्योंकि आज यह देश की ताकत बन गया है और इसे विश्व में महसूस किया जा रहा है.’

उन्होंने कहा, ‘आरएसएस पर बहुत सारी बहस हुई है. चर्चा और बहस होनी चाहिए लेकिन डिबेट के लिए सच्चाई का पता होना चाहिए.’ भागवत ने कहा कि संघ का कार्य विशिष्ट और अतुलनीय है.

मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय समाज विविधताओं से भरा है, किसी भी बात में एक जैसी समानता नहीं है, इसलिये विविधताओं से डरने की बजाए, उसे स्वीकार करना और उसका उत्सव मनाना चाहिए. संघ प्रमुख ने करीब डेढ़ घंटे के संबोधन में यह साफ किया कि उनका संगठन अपना प्रभुत्व नहीं चाहता. उन्होंने कहा, ‘अगर संघ के प्रभुत्व के कारण कोई बदलाव होगा तो यह संघ की पराजय होगी. हिन्दू समाज की सामूहिक शक्ति के कारण बदलाव आना चाहिए.’भाजपा पर रिमोट कंट्रोल से नियंत्रण और संघ में महिलाओं की कम भागीदारी को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर भी मोहन भागवत ने स्थिति स्पष्ट की. भागवत ने अपने संबोधन में सरकार या किसी संगठन का नाम नहीं लिया. उन्होंने कहा, संघ का स्वयंसेवक क्या काम करता है, कैसे करता है, यह तय करने के लिये वह स्वतंत्र है. उन्होंने कहा, संघ केवल यह चिंता करता है कि वह गलती न करे.

उन्होंने कहा कि आरएसएस की एक अलग पहचान है, इसलिए यह लोगों में लोकप्रिय हो जाता है और इसके कार्यकर्ताओं को अपने काम के प्रचार के लिए कहीं भागना नहीं पड़ता है. अपने भाषण में उन्‍होंने कांग्रेस की भी तारीफ की और कहा कि उसने आजादी में बड़ी भूमिका निभाई है. साथ ही देश को कई नेता दिए हैं.

सरकार और संघ के बीच समय समय पर होने वाली समन्वय बैठकों का परोक्ष तौर पर जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि समन्वय बैठक इसलिए होती है कि स्वयंसेवक विपरीत परिस्थितियों में अलग अलग क्षेत्रों में काम करते हैं. ऐसे में उनके पास कुछ सुझाव भी होते हैं. वे अपने सुझाव देते हैं, उस पर अमल होता है या नहीं होता इससे उन्हें मतलब नहीं.

संघ में महिलाओं की भागीदारी के सवाल पर भागवत का कहना था कि डॉ. हेडगेवार के समय ही यह तय हुआ था कि राष्ट्र सेविका समिति महिलाओं के लिए संघ के समानांतर कार्य करेगी. उन्होंने साफ किया कि इस सोच में बदलाव की जरूरत यदि पुरुष व महिला संगठन दोनों ओर से महसूस की जाती है तो विचार किया जा सकता है अन्यथा यह ऐसे ही चलेगा.

विज्ञान भवन में हो रहे इस कार्यक्रम में सोमवार को कुछ केंद्रीय मंत्रियों के अलावा अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी, फिल्मकार मधुर भंडारकर, अन्नू कपूर, मनीषा कोइराला जैसे बालीवुड के कलाकार भी मौजूद थे.

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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