हिंदी न्यूज़ – Bank Merger Triggers Fear of Job Loss, Many Customers thinking of Shifting Accounts-तीन बैंकों के विलय से कर्मचारियों में नौकरी का जाने का भय, बैंक बदलने की सोच रहे खातेदार

रौनक सिंह गुंजन

वित्त मंत्री अरुण जेटली की ओर से तीन बैंकों के विलय के ऐलान के बाद देना बैंक के कर्मचारी विनय प्रकाश को उनके मातहत कर्मचारियों के लगातार फोन आ रहे हैं. हर कोई उनसे नौकरी के बारे में पूछ रहा है. केंद्र सरकार ने फैसला लिया है कि विजया बैंक, देना बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा का विलय किया जाएगा. इस फैसले से तीनों बैंकों के जूनियर एम्पलॉई डरे हुए हैं.

प्रकाश ने कहा, ‘रात में मुझे करीब दस फोन आए. वह पूछ रहे थे कि अब क्या होगा. वरिष्ठ अधिकारी इस बारे में जानते हैं लेकिन दूसरों की चिंता करना स्वाभाविक है. इससे पहले जब भी बैंकों के विलय हुए लोगों की नौकरियां गईं लेकिन इस बार कुछ अच्छा होने की उम्मीद है.’

हालांकि केंद्र के ऐलान में नौकरी बची रहने को लेकर खास आश्वासन नहीं मिला है, ऐसे में निचले पदों पर काम करने वाले बैंक कर्मी अधिक चिंतित हैं. दिल्ली स्थित एक एटीएम के गार्ड राम चौहान, विलय के बारे में नहीं जानते हैं लेकिन पिछली बार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के सहायक बैंकों के विलय के दौरान उन्होंने लोगों की नौकरियां जाते देखी हैं.यह भी पढ़ें:  रुपये की गिरावट को रोकने के लिए पीएम मोदी उठा सकते हैं ये तीन कदम!

चौहान ने कहा, ‘मेरे एक सहकर्मी ने बताया कि तीन बैंक एक होने वाले हैं. मैं इसका मतलब नहीं जानता लेकिन विलय के बाद बगल के स्टेट बैंक ऑफ पटियाला एटीएम में तैनात एक गार्ड की नौकरी चली गई.’

नौकरी जाने के खतरों से ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉईज एसोसिएशन (AIBEA) के जनरल सेक्रेटरी सीएच वेंकटचलम ने भी इनकार नहीं किया. उन्होंने केंद्र की ओर से बैंकों के विलय को लेकर किए गए फैसले का विरोध करते हुए कहा, ‘पहली बात यह कि इस बात के कोई सबूत नहीं हैं कि बैंकों का विलय करने से उनकी ताकत बढ़ती है या वह और बेहतर हो जाते हैं.’

उन्होंने कहा कि SBI के विलय से कोई चमत्कार नहीं हुआ.

सीएच वेंकटचलम ने कहा, ‘दूसरी ओर इसका परिणाम हुआ कि कई शाखाएं बंद कर दी गईं, बैड लोन बढ़ गए, स्टाफ और व्यवसाय में कमी के परिणाम सामने आए. 200 साल में पहली बार SBI घाटे में आया.’

वेंकटचलम के अनुसार SBI के पांच सहायक बैंकों के 31 मार्च 2017 को पैंसठ हजार करोड़ रुपए बैड लोन थे और एसबीआई के 112,000 करोड़ रुपए थे. कुल मिला कर बैड लोन 177,000 करोड़ रुपए हो गए. उन्होंने कहा कि विलय के बाद साल 2018 में 225,000 करोड़ रुपए के बैड लोन बढ़ गए. साल 2018 में पूरी बैंकिंग इंडस्ट्री पर 895,600 करोड़ का बैड लोन था. बैंकों के विलय के बाद कई ग्राहक अपना खाता बंद कर दूसरे बैंक में चले जाते हैं.

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मुंबई के एक निवासी राहुल कौशिक ने कहा, ‘मेरे पास विजया बैंक का एकाउंट है. मैं कुछ भी नहीं बदलने देना चाहता है. यह गलत है, क्या ग्राहकों को चुनने का कोई अधिकार नहीं है.

इससे पहले,  भारतीय रिजर्व बैंक से 21 सरकारी नियंत्रित बैंको के बीच विलय के लिए उम्मीदवारों की एक सूची तैयार करने के लिए कहा गया था. इससे बैड लोन से प्रभावित बैंकिंग प्रणाली को मजबूत बनाने की बात कही जा रही है. अगस्त में एक बैठक में वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने भारतीय रिजर्व बैंक से विलय के लिए समय सीमा का सुझाव देने के लिए कहा था.

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