हिंदी न्यूज़ – दिल्‍ली कांग्रेस में चल रही उठापटक, 2019 चुनाव तक क्‍या होगा भविष्‍यfuture of delhi pradesh congress in general election 2019 after resignation of ajay maken and political volatility

दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्‍यक्ष पद से इस्‍तीफा देने वाले अजय माकन को लेकर कांग्रेस पार्टी अभी साफतौर पर कुछ भी कहने से बच रही है. यहां तक कि इस्‍तीफा देने की बात को भी खुले तौर पर स्‍वीकार नहीं कर रही लेकिन अंदरखाने से मिल रही जानकारी के मुताबिक अजय माकन ने कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी को इस्‍तीफा सौंप दिया है. इतना ही नहीं उन्‍होंने इस जिम्‍मेदारी को न संभाल पाने की अपनी मजबूरी भी जाहिर की है.

दिल्‍ली नगर निगम चुनावों के बाद से ही दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस के भीतर उठापटक चल रही है. कांग्रेस की जमीन पर कमजोर होती स्थिति और उठापटक के बीच माकन का इस्‍तीफा कई सवाल खड़े करता है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस में चल रही इन गतिविधियों से इसके भविष्य पर क्‍या असर पड़ेगा. वहीं साल 2019 में आ रहे लोकसभा चुनावों में प्रदेश भाजपा अौर आम आदमी पार्टी को इसका क्‍या फायदा या नुकसान हो सकता है.

वरिष्‍ठ राजनीतिक पत्रकार निर्मल पाठक का कहना है कि माकन के इस्‍तीफे का हालांकि कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको ने खंडन किया है लेकिन प्रदेश कांग्रेस के भीतर असंतोष तो है. चूंकि माकन 3-4 सालों से ये जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं और काफी अनुभवी और मंजे हुए नेता हैं, लंबे समय तक जरूरी पदों पर भी रहे हैं. ऐसे में माकन का वापस अध्‍यक्ष पद संभालने या न संभालने और किसी अन्‍य नेता के इस जिम्‍मेदारी को लेने का फर्क पड़ना तय है.

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सांकेतिक फोटो:

3-4 साल जिम्‍मेदारी लेने के बाद किसी भी प्रदेश अध्‍यक्ष की एक टीम बन जाती है. पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं में भरोसा पैदा हो जाता है. माकन अगर हटते हैं तो एक वर्ग में असंतोष और अनिश्चितता की भावना पैदा होगी. जो भी नया नेता आएगा उसके साथ तालमेल की कठिनाइयां होंगी ही. नए के साथ पुरानों के संघर्ष आम बात है. ऐसे में बदलाव से मुश्किलें भी हो सकती हैं.

जहां तक भाजपा की बात है तो दिल्‍ली में उसकी स्थिति भी अच्‍छी नहीं है. ऐसे में कांग्रेस के भीतर की उठापटक से उस पर खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की चर्चाएं चल रही हैं. कांग्रेस की आप के साथ गठबंधन की क्‍या स्थ्‍िाति रहेगी यह देखना होगा. गठबंधन पर लोकल नेताओं का विरोध दोनों ही पार्टियों को झेलना होगा. वहीं कांग्रेस अगर दिल्‍ली में अकेले चुनाव लड़ती है तो उसे अतिरिक्‍त मेहनत करनी होगी. पुराना जनाधार पाने के लिए हाईकमान किस नेता को दिल्‍ली में लेकर आते हैं यह देखना दिलचस्‍प होगा.

New Delhi: Delhi Congress President Ajay Maken with party spokesperson Sharmistha Mukherjee addressing a press conference in New Delhi on Tuesday. PTI Photo (PTI3_14_2017_000154B)

हालांकि दिल्‍ली में कांग्रेस के भीतर किसी भी प्रकार के असंतोष से नेता हारुन यूसुफ ने इनकार किया है. उनका कहना है कि अजय माकन की तबियत खराब है. वे चेकअप कराने के लिए विदेश गए हैं. दिल्‍ली प्रदेश की कमान माकन ही संभालेंगे. आम चुनाव 2019 को लेकर कांग्रेस पूरी तैयारी कर रही है. कांग्रेस आम लोगों के मुद्दे जैसे सीलिंग और अतिक्रमण पर भी दिल्‍ली में काफी आवाज उठा कर लोगों के प्रति अपनी जिम्‍मेदारी बेहतर ढंग से निभा रही है.

हालांकि सूत्रों का कहना है कि अजय माकन को डॉक्‍टरों ने पूरी तर‍ह बिस्‍तर पर आराम करने के लिए कहा है. जबकि कांग्रेस को 2019 के चुनावों के लिए मजबूती से खड़ा करने के लिए किसी तेजतर्रार और अतिरिक्‍त सक्रियता दिखा पाने वाले नेता की जरूरत है. इसके अलावा दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस के भीतर ही चल रहे दो गुटों के अापसी विरोध से भी अजय माकन परेशान रहे हैं. ऐसे में पूरी संभावना है कि कांग्रेस आलाकमान किसी नए नेता को दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान सौंपेंगे. इन नामों में सबसे ऊपर दिल्‍ली की मुख्‍यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित का नाम सामने आ रहा है.

Sandeep Dikshit

कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित

पाठक कहते हैं कि संदीप दीक्षित का कद माकन के मुकाबले छोटा है. मध्‍य प्रदेश में एनजीओ चलाने वाले संदीप के पास शीला दीक्षित की उपलब्धियों के अलावा दिखाने के लिए कुछ नहीं है. वहीं एंटी शीला दीक्षित गैंग भी उन्‍हें स्‍वीकार नहीं करेगा. ऐसे में कांग्रेस आलाकमान का अगला कदम दिल्‍ली में प्रदेश कांग्रेस का भविष्‍य तय करेगा.

दिल्‍ली प्रदेश भाजपा प्रवक्‍ता नवीन का कहना है कि कांग्रेस पूरे देश के साथ ही दिल्‍ली में भी खत्‍म हो रही है. दिल्‍ली कांग्रेस के अध्‍यक्ष पद पर अजय माकन रहें या कोई और आ जाए, बीजेपी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. कांग्रेस की पूरी भूमिका ही सकारात्‍मक नहीं है. ऊपर से ही कांग्रेस की लीडरशिप खराब है. ऐसे में दिल्‍ली में भी इसका असर इस उठापटक से साफ दिख रहा है. कांग्रेस अपनी नीति और ऊपरी नेतृत्‍व के कारण खत्‍म है. कांग्रेस पार्टी संगठन में अनुशासन ही नहीं है.

हालांकि आम आदमी पार्टी की ओर से दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस में हो रही हलचल पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई. आप के प्रवक्‍ताओं से इस संबंध में बातचीत करने की कोशिश की गई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला.

गौरतलब है कि दिल्‍ली विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव में लगातार खराब प्रदर्शन कर रही दिल्‍ली प्रदेश कांग्रेस की बागडोर अजय माकन ने संभाल तो ली लेकिन उनके नेतृत्‍व में दिल्‍ली नगर निगम चुनावों में पार्टी तीसरे नंबर पर रही. इसके लिए माकन ने खुद को जिम्‍मेदार मानते हुए पार्टी से इस्‍तीफा भी पेश किया. सूत्रों का कहना है कि उसी दौरान अजय माकन को स्‍वास्‍थ्‍य संबंधी समस्‍याएं होने लगीं. वहीं कांग्रेस प्रदेश कमेटी के भीतर ही माकन का विरोधी खेमा भी अपनी गतिविधियां करता रहा.

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