हिंदी न्यूज़ – ट्रिपल तलाक अब होगा दंडनीय अपराध, सिर्फ इस शर्त पर मिलेगी आरोपी पति को जमानत/ president ram nath kovind approval triple talaq ordinance

ट्रिपल तलाक अब होगा दंडनीय अपराध, सिर्फ इस शर्त पर मिलेगी आरोपी पति को जमानत

सांकेतिक तस्वीर

भाषा

Updated: September 20, 2018, 4:04 AM IST

ट्रिपल तलाक से जुड़े अध्यादेश को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने बुधवार को मंजूरी दे दी. कानून मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी. अधिकारी ने कहा कि राष्ट्रपति ने अध्यादेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. इससे पहले बुधवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में इस अध्यादेश पर मुहर लगी थी. सरकार के इस अध्यादेश से मुस्लिम महिलाओं को 6 महीने तक राहत मिलने का रास्‍ता साफ हो गया है. अब इसे 6 महीने के भीतर संसद में मंजूरी के लिए पेश करना होगा.

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से तीन तलाक पर पाबंदी लगाए जाने के बाद भी यह जारी है, जिसके कारण सरकार को यह अध्यादेश लागू करने की अवश्यकता पड़ी. वहीं सरकार के इस अध्यादेश पर काग्रेस ने सवाल उठाए हैं. कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार इसे राजनीतिक रूप देने की कोशिश कर रही है. बता दें कि प्रस्तावित अध्यादेश के तहत एक साथ तीन तलाक देना अवैध एवं निष्प्रभावी होगा और इसमें दोषी पाए जाने पर तीन साल जेल की सजा का प्रावधान है.

हालांकि इस प्रस्तावित कानून का दुरुपयोग न हो इसके लिए सरकार ने कुछ सुरक्षा उपाय भी किए हैं, इसमें आरोपी मुकदमे से पहले मजिस्ट्रेट की अदालत में जमानत की गुहार लगा सकता है. केद्रीय मंत्री रविशकंर प्रसाद ने कहा कि इस प्रस्तावित कानून में अपराध को गैर-जमानती बनाया गया है, लेकिन आरोपी मुकदमे से पहले अदालत का रुख कर सकता है. जहां मजिस्ट्रेट आरोपी की पत्नी का पक्ष सुनने के बाद जमानत मंजूर कर सकते हैं. प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद देशभर में बड़ी संख्या में मुस्लिम महिलाओं के साथ नाइंसाफी हो रही थी. ये मामला महिलाओं की गरिमा और उनके सम्मान का है. इसलिए हम ये अध्यादेश लेकर आए हैं.

सिर्फ इस शर्त पर आरोपी पति को मिलेगी जमानतसूत्रों ने बताया कि इसमें मजिस्ट्रेट को सुनिश्चित करना होगा कि आरोपी पति को तभी जमानत दी जाए जब वो प्रस्तावित कानून के मुताबिक पत्नी को मुआवजा देने पर सहमत हो जाए. मुआवजे की राशि मजिस्ट्रेट ही तय करेंगे. मजिस्ट्रेट पति और उसकी पत्नी के बीच विवाद सुलझाने के लिए अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं. पुलिस भी तीन तलाक के मामले में तभी एफआईआर दर्ज करेगी जब पीड़िता, सगे-संबंधी या शादी के बाद बने उसके रिश्तेदार खुद शिकायत दर्ज कराएं. इस मामले में किसी पड़ोसी के कहने पर शिकायत दर्ज नहीं की जाएगी. प्रसाद ने कहा कि समाधेय अपराध के तहत दोनों पक्षों के पास मामला वापस लेने का भी अधिकार होगा.

बच्चे के लिए मांग सकती है संरक्षण का अधिकार
प्रस्तावित कानून केवल एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत पर लागू होगा और यह पीड़िता को अपने लिए एवं अपने बच्चे के लिए ‘गुजारा भत्ता’ मांगने के लिए मजिस्ट्रेट के पास जाने की शक्ति देगा. इस कानून के तहत महिला मजिस्ट्रेट के सामने अपने नाबालिग बच्चे के लिए संरक्षण का अधिकार मांग सकती है जिस पर अंतिम फैसला मजिस्ट्रेट ही लेंगे.

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