हिंदी न्यूज़ – इस मौसम में सबसे ज्यादा होता है डेंगू, बुखार हो तो इन बातों का रखें खास ध्यान । Everything you should know about dengue, precaution, symptoms

किसी खास को डेंगू हो जाए तो लोगों का कलेजा हलक को आ जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि डॉक्टर भी इसे रहस्यमयी बीमारी मानते हैं. दरअसल कई बार डेंगू का रोगी सही दवाइयों के जरिए घर पर ही रहकर ठीक हो जाता है लेकिन कई बार रोगी को हॉस्पिटल के आईसीयू (ICU) में दिन गुजारने पड़ते हैं. और कई बार बहुत अच्छे से इलाज होने के बाद भी डेंगू का रोगी बच नहीं पाता. डॉक्टरों ने रोगियों में इस बीमारी के अलग-अलग लक्षण देखे हैं. जिनके चलते इसे पहचानने में भी डॉक्टरों को काफी वक्त लग जाता है.

आमतौर पर डेंगू के मच्छर मानसून के बाद ठहरे हुए साफ पानी में पैदा होते हैं. डेंगू वायरस का रोग है और हमारी सफेद रक्त कोशिकाओं पर हमला करता है. जिससे हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है. डेंगू को ‘ब्रेकबोन’ और ‘डैंडी फीवर’ भी कहते हैं क्योंकि इसमें शरीर में तेज दर्द होता है. नेशनल वेक्टर बॉर्न डिसीज कंट्रोल प्रोग्राम (NVBDCP) के अनुसार 2015 में, 99,913 डेंगू के मामले सामने आए थे और इन मामलों में कुल 220 लोगों की मौत हुई थी. 2016 में, ये मामले बढ़ गये और देश भर से 1,29,166 मामले सामने आए, जिनमें से 245 लोगों की मौतें हुई थीं. इस साल, मई महीने तक कुल 11,402 मामले आ चुके थे, जिनमें 11 मौतें हो चुकी हैं.

भारत में कैसे फैला डेंगू?
भारत में डेंगू का पहला केस 1956 में तमिलनाडु के वेल्लोर जिले से सामने आया था. जिसके बाद भारत में डेंगू का पहला बड़ा हमला 1963 में पश्चिम बंगाल में हुआ. कई सालों तक इसे केवल शहरों में फैलने वाली बीमारी माना जाता था लेकिन धीरे-धीरे ये पूरे देश में फैल गया. इसका बड़ा कारण घरों की छत पर रखी खुली पानी की टंकी और जमा होने वाला पानी रहा. 1996 में दिल्ली में डेंगू का भयानक हमला हुआ था. इस दौरान यहां से 10,252 डेंगू के मामले सामने आए और 423 मौतें हुईं. 2006 में भी देश ने बड़ा डेंगू का हमला देखा जब 12,317 केस सामने आए और 184 मौतें हुईं.कैसे होता है डेंगू और कितना खतरनाक है इसका मच्छर?
1. डेंगू एडीस इजिप्टी मच्छर के काटने से ही होता है. इस प्रजाति के मच्छरों में केवल मादा मच्छर में ही डेंगू के वायरस हो सकते हैं.
2. एक डेंगू मच्छर एक बार में करीब 100 अंडे देता है. डेंगू के एक मच्छर की उम्र करीब दो हफ्ते होती है.
3. डेंगू का मच्छर दिन के उजाले में काटता है. खासकर सवेरे और शाम को इसके काटने की संभावना ज्यादा होती है.
4. देखा गया है कि यह मच्छर रात में जलती लाइट में भी काट सकता है.
5. वैसे यह मच्छर 15-16 डिग्री से कम तापमान में पैदा नहीं होता.
6. डेंगू के सबसे ज्यादा मामले जुलाई से अक्टूबर के बीच सामने आते हैं.
7. दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया था कि 41 फीसदी डेंगू मच्छर प्लास्टिक के ड्रम और टंकियों में पैदा होते हैं. इसके साथ ही कूलर में 12 फीसदी और निर्माण स्थलों पर इस्तेमाल होने वाले लोहे के कंटेनरों में 17 फीसदी डेंगू मच्छर पैदा होते हैं.

क्या हैं डेंगू के लक्षण?
1. डेंगू की शुरुआती स्टेज में फ्लू जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं.
2. इसके लक्षणों में तेज बुखार, चकत्ते, शरीर में तेज दर्द, भूख कम होना, उल्टी आना आदि होता है.
3. डेंगू जब अपनी खतरनाक अवस्था में पहुंचता है तो डेंगू हेमरेजिक फीवर (DHF) बन जाता है, जो जानलेवा भी हो सकता है.
4. DHF की आगे की अवस्था डेंगू शॉक सिंड्रोम हो सकता है. जिसके खतरनाक प्रभाव हो सकते हैं. इसमें रोगी का ब्लड प्रेशर तेजी से नीचे गिरता है और शरीर के अंदरूनी अंग काम करना बंद कर देते हैं. जिसके चलते रोगी की मौत हो जाती है.

डेंगू के रोगी को बरतनी चाहिए ये सावधानी
अक्सर बुखार में लोग रोगी को एस्प्रिन दे देते हैं. लेकिन डेंगू के रोगी को एस्प्रिन नहीं देनी चाहिए. क्योंकि यह रोगी के रक्त के बहाव को तेज कर सकती है. डॉक्टर बुखार से निजात दिलाने और दर्द से निजात दिलाने के लिए ‘पैरासिटामॉल’ के प्रयोग का सुझाव देते हैं. लेकिन इसे भी डॉक्टर की सलाह के बाद ही दिया जाना चाहिए. यह वायरस से होने वाला रोग है. ऐसे में इसका कोई सीधा इलाज नहीं है. इसमें बस इस बात का ख्याल रखा जाता है कि रोगी के ब्लड प्लेटलेट कम न हों और शरीर में तरल पदार्थ जाते रहें. साथ ही इस बीमारी के इलाज के दौरान लोगों की प्लेटलेट काउंट न गिरने देने की कोशिश रहती है. 10,000 प्लेटलेट काउंट से कम होने पर ही इस रोग में रोगी की स्थिति जानलेवा होती है.

डेंगू के बारे में लोगों में फैले हैं ये भ्रम
वैसे अक्सर लोग मानते हैं कि डेंगू में प्लेटलेट्स की कमी से रोगी की मौत होती है. लेकिन ऐसा नहीं है रोगी की मौत डेंगू में कैपिलरी लीकेज के चलते होती है. इस अवस्था में लोगों की नसों में से प्रोटीन बह जाता है, जिससे खून भी लीक होने लगता है. ऐसे में ब्लडप्रेशर गिरने के साथ, शरीर में खून की कमी भी हो जाती है. इसलिए डेंगू के रोगी को तरह आहार दिया जाता है. डेंगू में तरह आहार तब तक देना चाहिए जब तक रोगी के हाई ब्लड प्रेशर और लो ब्लड प्रेशर में अंतर 40 से ज्यादा न हो जाए. लोग डेंगू को संक्रामक बीमारी भी मानते हैं. माने ऐसी बीमारी जो एक से दूसरे व्यक्ति को हो जाती हो. लेकिन डेंगू ऐसी बीमारी नहीं है. ये चार प्रकार की होती है.

एक नया रिसर्च जगा रहा है आशा
हाल ही में मुंबई में हुए एक रिसर्च में दावा किया गया कि अगर डेंगू के लक्षणों को पहले ही पहचाना जा सके तो ऐसे में डेंगू के चलते होने वाली मौतों में तेज गिरावट आ सकती है. क्योंकि ऐसा नहीं होता कि सारे ही डेंगू के मामलों में जानलेवा स्तर तक बीमारी पहुंच जाये. इसलिए यह सवाल उठता है कि किस दौरान एक रोगी में डेंगू की सबसे बुरी अवस्था का अटैक होता है और इसके लिए डॉ संजीव श्रीवास्तव ने प्रोटीन बायोमार्कर के एक ग्रुप की पहचान करने की कोशिश की.

प्रोटीन की स्टडी कर पहचानेंगे लक्षण
इस सवाल का जवाब पाने के लिए मुंबई की पीसीआर लैब ने आईआईटी बॉम्बे के साथ मिलकर एक रिसर्च किया. इसमें यह जानने की कोशिश की गई कि डेंगू के पूर्वलक्षण क्या हैं ताकि यह पता किया जा सके कि क्या किसी को डेंगू है या नहीं. इसके लिए 100 से 150 ब्लड सैंपल इकट्ठे किए गए, जिसमें से आधे ऐसे डेंगू पेशेंट थे जिन्हें तुरंत आईसीयू में भर्ती किए जाने की जरूरत थी. ऐसा डॉक्टर ने इसलिए किया कि बहुत ही अलग-अलग तरह के लक्षणों वाली इस बीमारी की आसानी से पहचान की जा सके. ये रिसर्चर ब्लड में अलग-अलग तरह की प्रोटीन की स्टडी कर एक ऐसी डायग्नोस्टिक किट बनाना चाहते हैं जो डॉक्टर्स को इस बीमारी के जानलेवा होने से पहले ही पहचानने में मदद करे.

डॉक्टर्स का मानना है कि अगर ये टेस्ट सफल रहा तो वे ऐसी किट बना सकेंगे जिससे रोगियों की बढ़ी संख्या में डेंगू के रोगियों की आसानी से पहचान की जा सकेगी. ताकि उन्हें जल्द से जल्द हॉस्पिटल ले जाकर या सही दवाएं देकर उनकी जान बचाई जा सके. इसमें एक टेस्ट प्लेटलेट से भी जुड़ा है. जो प्लेटलेट में कमी आने से पहले ही इसके बारे में आगाह कर देता है. जिससे यह देखा जाता है कि मरीज फिर से खुद प्लेटलेट बनाने में सक्षम है या नहीं.

डेंगू जैसे ही होते हैं इन रोगों के लक्षण
ऐसा भी नहीं है कि आपको हर बार डेंगू ही हो. आपको वायरल बुखार, मलेरिया, चिकुनगुनिया या जीका वायरस का बुखार भी हो सकता है. इनके लक्षण भी डेंगू से मिलते-जुलते ही होते हैं. जीका वायरस के बुखार में सिरदर्द और जोड़ों का दर्द होता है. चिकुनगुनिया में इन लक्षणों के साथ पीठ में भी दर्द एक प्रमुख लक्षण है. वायरल बुखार एक संक्रामक बीमारी है, जबकि डेंगू संक्रामक नहीं है. और मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है.

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