हिंदी न्यूज़ – 12 Children dead in 13 days due to Diphtheria in Delhi

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में पिछले दो हफ्ते में डिप्थीरिया के कारण 12 बच्चों की मौत हुई है. इनमें से 11 बच्चों की मौत नगर निगम के एक अस्पताल में हुई. महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक सुनील कुमार गुप्ता के हवाले से एनडीएमसी ने बयान जारी कर इसकी जानकारी दी. बयान में बताया कि डिप्थीरिया के मामले आम तौर पर केवल इस मौसम में सामने आते हैं.

उन्होंने कहा, “छह से नौ सितंबर के बीच डिप्थीरिया के 85 मरीजों को भर्ती कराया गया, जिनमें 11 मरीजों को नहीं बचाया जा सका. इनमें से 79 दिल्ली से बाहर के और छह दिल्ली के हैं.”

उन्होंने बताया कि मरीज नौ साल तक की उम्र के थे. उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में स्थित इस अस्पताल का कामकाज उत्तरी दिल्ली नगर निगम देखता है.

विश्व में 2017 में दो करोड़ बच्चे पूर्ण टीकाकरण के लाभ से वंचित रहे’संयुक्त राष्ट्र के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में लगभग दो करोड़ बच्चे पूर्ण टीकाकरण के लाभ से वंचित थे. इनमें से 80 लाख (40 प्रतिशत) नाजुक हालत में रहते हैं, जिनमें संघर्ष से प्रभावित देश शामिल हैं. यूनिवर्सल टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) को वर्ष 2014 में मिशन इंद्रधनुष के रूप में फिर से शुरू किया गया था. इसका लक्ष्य 2020 तक टीकाकरण के दायरे को 90 प्रतिशत तक फैलाना था.

यूआईपी के तहत टीकाकरण जारी अनुसूची में टीकों के बारे में जानकारियां दी गई हैं.

बीसीजी (बैसिलस कैल्मेट गुरिन) जन्म पर एक खुराक (1 साल तक यदि पहले नहीं दिया गया हो).

डीपीटी (डिप्थीरिया, पर्टुसिस और टिटनेस टोक्सॉयड) पांच खुराक : तीन प्राइमरी खुराक छह सप्ताह, 10 सप्ताह व 14 सप्ताह बाद और दो बूस्टर खुराक 16-24 महीने एवं 5 साल की उम्र में.

ओपीवी (ओरल पोलियो टीका) पांच खुराक : तीन प्राथमिक खुराक छह, 10 और 14 सप्ताह बाद और एक बूस्टर खुराक 16-24 महीने की उम्र में.

हिपेटाइटिस बी टीका चार खुराक : जन्म के 24 घंटे के भीतर 0 खुराक और छह, 10 और 14 सप्ताह की उम्र में तीन खुराक

खसरा, दो खुराक : पहली खुराक 9-12 महीने और दूसरी खुराक 16-24 महीने की उम्र में.

टीटी (टेटनस टोक्सॉयड) दो खुराक : 10 साल और 16 साल की उम्र में.

टीटी : गर्भवती महिला के लिए दो खुराक या एक खुराक अगर पहले 3 साल के भीतर टीका लगाया जाता है.

(एजेंसियों के इनपुट के साथ)

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