हिंदी न्यूज़ – इसलिए सी-2 फार्मूले से एमएसपी नहीं तय कर रही सरकार! Why narendra modi government not deciding the MSP from the C-2 formula-BJP-ashok dalwai committee

मोदी  सरकार ने धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी ) लागत का डेढ़ गुना करने का बड़ा फैसला लिया है. सत्तारू़ढ़ दल भाजपा को उम्मीद है एमएसपी के खाद-पानी से वोटों की फसल काटने में मदद मिलेगी. वो इसे मास्टर स्ट्रोक मान रही है. कुछ फसलों पर उत्पादन लागत का 50 से 65 फीसदी तक मुनाफा कर दिया गया है तो बाजारा पर 97 फीसदी तक लाभ दिया गया है.

सत्ताधारी पार्टी की ओर से दावा किया गया है कि किसानों की सात दशक पुरानी मांग पूरी की गई है. लेकिन असली सवाल ये है कि क्या सरकार के इस फैसले से किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी? इस बारे में हमने डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के अध्यक्ष  डॉ. अशोक दलवाई से बातचीत की. डॉ. दलवाई 1984 बैच के आईएएस अधिकारी हैं. वो इन दिनों पीएम नरेंद्र मोदी की ड्रीम योजनाओं में शामिल किसानों की आय दोगुनी करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. पेश है डॉ. दलवाई से हुई बातचीत के खास अंश:

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सवाल: सरकार ने ए2+एफएल फॉर्मूले पर समर्थन मूल्य तय किया है और किसान संगठन सी-2 फार्मूले से मांग कर रहे हैं, वजह क्या है? अशोक दलवाई: ये तो सरकार का निर्णय है. समर्थन मूल्य वो कीमत होती है जिस पर सरकार किसानों से अनाज खरीदती है. ए2+एफएल फॉर्मूला पर सरकार ने लागत का डेढ़ गुना लाभ देने का फैसला किया है. यह फैसला ऐतिहासिक है. ऐसा अब तक नहीं हुआ. इसके तहत जमीन का किराया छोड़कर अन्य सभी चीजें शामिल की गई हैं. इसमें कि‍सान की ओर से किए गए सभी तरह के भुगतान चाहे वो कैश में हो या कि‍सी वस्‍तु की शक्‍ल में, को शामिल गया गया है. सिर्फ जमीन का किराया छोड़कर. इसके तहत उत्पादन लागत तय करने के लिए  बीज, खाद, कीटनाशक का खर्च, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च, परि‍वार के सदस्‍यों द्वारा खेती में की गई मेहतन का मेहनताना आदि जोड़ा गया है. इसमें जमीन का रेट छोड़कर और सभी चीजों की लागत है. ये मिनिमम प्रॉफिट है. बहुत सारे पर उससे ज्यादा है.

सवाल: सी-2 फार्मूले से एमएसपी तय करने में सरकार को दिक्कत क्या है?

अशोक दलवाई: ए2+एफएल फॉर्मूले में जमीन का किराया छोड़कर सबकुछ है. रही बात जमीन की तो आप जमीन किसी काम के लिए किराये पर देते हैं तब तो उस पर किराया मिलता है. आपने जमीन किसी को दे दी तो उसमें कृषि नहीं कर पाएंगे. यानी किसान नहीं रहेंगे. यदि किसान रहेंगे तो जमीन का इस्तेमाल करेंगे. जमीन आपकी अपनी है. फिर उसका किराया क्यों?  यदि सरकार सी-2 के आधार पर फसल की लागत तय करना शुरू कर दे तो बड़ी समस्या ये आएगी कि राष्ट्रीय स्तर पर किसी एक फसल का हम एक एमएसपी नहीं तय कर पाएंगे. क्योंकि हर जगह जमीन का रेट अलग-अलग है. कहीं जमीन महंगी तो कहीं सस्ती है.

सवाल: क्या एमएसपी लागत का डेढ़ गुना करने से किसानों की आय दोगुना करने में मदद मिलेगी?     

अशोक दलवाई: किसानों की आय बढ़ाने की रणनीति में सबसे अहम कंपोनेंट ये है कि कृषि उत्पाद का ठीक मूल्य मिले. समर्थन मूल्य बढ़ने से निश्चित तौर पर आय बढ़ेगी. किसानों की प्रोडक्टिविटी बढ़ जाए,  उत्पादन लागत कम हो, उत्पाद के लिए मार्केट और उचित मूल्य मिले, इसके लिए सरकार काम कर रही है. एग्रीकल्चर मार्केट हर समय परफेक्ट नहीं रह सकता है. ये पूरी दुनिया का फेनोमिना है. सप्लाई और डिमांड दोनों साइड से रिस्क होता है. इसीलिए हर साल सरकार मिनिमम सपोर्ट प्राइस अनाउंस करती है. इसका मतलब है प्राइस सिक्योरिटी. एमएसपी से भी ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि खरीद कितनी हुई. सरकार ने पिछले तीन-चार साल में खरीद पर ज्यादा ध्यान दिया है.

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सवाल: डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के गठन के बाद किसानों की आय कितनी बढ़ गई है?

अशोक दलवाई: अभी जानकारी नहीं है, क्योंकि हमारे देश में किसानों की इनकम कैलकुलेट करने का कोई सही सिस्टम नहीं है. वैकल्पिक रूप में एनएसएसओ (नेशनल सैंपल सर्वे आर्गनाइजेशन)  सर्वे करता है. अंतिम बार उसने 2012-13 में सर्वे किया था. हम सरकार को सुझाव दे रहे हैं कि कोई ऐसा तरीका विकसित हो जिससे हर साल किसानों की आय कितनी बढ़ी इसकी जानकारी मिले.

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