हिंदी न्यूज़ – How a Party With Single Digit Vote Share Can Decide Chhattisgarh Poll Outcome-चार फीसदी वोट शेयर वाली पार्टी कैसे छत्तीसगढ़ में प्रभावित कर सकती है परिणाम!

प्रकाश चंद्र होटा

बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती और कांग्रेस से बागी अजीत जोगी दोनों के बारे में यह जाना जाता है कि वे राजनीति में काफी साहसिक हैं. इसके बाद भी यह उम्मीद किसी को नहीं थी कि आगामी छत्तीसगढ़ विधानसभा में दोनों के बीच कोई समझौता हो जाएगा. दोनों के बीच गठबंधन आखिरी मिनट तक गोपनीय रहा. मायावती यह नहीं चाहती थीं कि कांग्रेस या समाजवादी पार्टी को कुछ पता चले.

लखनऊ में अजीत और मायावती ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस की और यह ऐलान किया कि उन्होंने छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के मद्देनजर गठबंधन बना लिया है. बीजेपी 35 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, जबकि जोगी की जनता कांग्रेस 55 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. मायावती ने यह भी ऐलान किया कि अगर यह गठबंधन सत्ता में आया तो अजीत जोगी सीएम होंगे.

जोगी और मायावती की इस घोषणा के बाद राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. हालांकि, छत्तीसगढ़ में जनता कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी भी खुश है. इस ऐलान के पहले कांग्रेस यह कोशिश कर रही थी कि बसपा से छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में गठबंधन हो जाएगा. जोगी की जनता कांग्रेस संग बसपा के गठबंधन का ऐलान मायावती ने इस बात के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि सीट साझा करने के मुद्दे पर वह कमजोर नहीं पड़ेंगी. न ही विधानसभा चुनाव में और न ही साल 2019 के लोकसभा चुनाव में.यह भी पढ़ें: जब जब प्रधानमंत्री छत्तीसगढ़ आएंगे, तब तब कांग्रेस उनका विरोध करेगी: सिंहदेव

सूत्रों की मानें तो कांग्रेस छत्तीसगढ़ में बसपा को सिर्फ 5 सीटें देने की तैयार थी. उसी दिन मायावती ने मध्य प्रदेश के 22 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया, जिससे यह माना जा रहा है कि वह सीटों को साझा करने के मुद्दे पर बातचीत करने की रणनीति है, ताकि उन्हें ज्यादा सीटें मिल सकें.

अजीत जोगी के लिए यह गठबंधन उन्हें एक ओर जहां कांग्रेस से लड़ने की ताकत देगा वहीं बीजेपी भी उन्हें हल्के में नहीं लेगी.  रमन सिंह की सरकार में वन मंत्री महेश गागडा ने News18 से कहा, ‘कांग्रेस और बीजेपी के खिलाफ उनका एकजुट होकर लड़ने का दावा अब खोखला है.’

गागडा ने कहा. ‘अब तक, कांग्रेस अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति मतदाताओं के मसीहा होने का दावा कर रही थी. लेकिन, मायावती और अजीत जोगी के साथ मिलकर, कांग्रेस को एससी वोटों के लिए काफी मेहनत करनी पड़ेगी. इससे बीजेपी को लाभ मिलेगा.’

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हालांकि, कांग्रेस ने कहा कि गठबंधन पार्टी बीजेपी को बेदखल करने में मदद करने के लिए उनकी स्थिति को मजबूत करेगा. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष भूपेश बघेल ने कहा कि रूट लेवल के कार्यकर्ता बसपा के साथ गठबंधन पर सहमत नहीं थे. उन्होंने कहा इससे बीजेपी जोगी का भी चेहरा उजागर हुआ है और वह हमेशा अपने दोस्त (रमन सिंह) की मदद करना चाहते रहे हैं.

छत्तीसगढ़ एआईसीसी, प्रभारी पन्ना लाल पुनिया ने अटकलों को खारिज कर दिया कि गठबंधन कांग्रेस की संभावनाओं को नुकसान पहुंचाएगा. उन्होंने कहा, ‘आने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की संभावना पर असर नहीं पड़ेगा.’

कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों ने News18 को बताया कि राज्य इकाई बसपा के साथ गठबंधन करने के इच्छुक नहीं थी, क्योंकि साल 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मुकाबले कांग्रेस का वोट 1 प्रतिशत से भी कम था और पार्टी इस बार एक और आक्रामक चुनाव अभियान शुरू करने की उम्मीद कर रही है. एक नेता ने कहा, ‘एंटी-इनकंबेंसी कारक भी मजबूत है.’

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हालांकि, बसपा के पिछले रिकॉर्ड से पता चलता है कि कांग्रेस के वोट हिस्सेदारी से कांग्रेस को अपना लक्ष्य हासिल करने में काफी मदद मिलेगी. छत्तीसगढ़ राज्य 1 नवंबर 2000 को बना था, और साल 2003 के पहले विधानसभा चुनाव में बसपा ने 54 सीटों पर चुनाव लड़ा था और दो सीटें हासिल की थी. पार्टी का वोट शेयर 4.45 प्रतिशत था.

साल 2008 के चुनाव में, बसपा ने सभी 90 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया और 6.11 प्रतिशत मत सिल किया. तब भी बसपा के दो विधायक विधानसभा गए. साल 2013 में, बसपा ने फिर से सभी 90 सीटों से चुनाव लड़ा, लेकिन वोटों का प्रतिशत 4.27 हो गया.90 विधायकों के मौजूदा सदन में, बसपा के पास एकमात्र सदस्य है.

हालांकि, एक ऐसे राज्य में जहां प्रतियोगिता हमेशा हेड-टू-हेड रही है और जीत का मार्जिन भी कम हो, तो यह भाग्य पलटने के लिए पर्याप्त होगा. दूसरी तरफ, अजीत जोगी की राजनीतिक पार्टी की अभी तक कोई परीक्षा नहीं हुई है क्योंकि कांग्रेस छोड़ने के बाद साल 2016 में इसका गठन हुआ था.

एक अन्य दिलचस्प तथ्य यह है कि मायावती और जोगी दोनों अनुसूचित जाति के मसीहा होने का दावा करते हैं.

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छत्तीसगढ़ में एससी के लिए 10 आरक्षित सीटें हैं, जिनमें से बीजेपी ने पिछली बार नौ बार जीती थी और कांग्रेस सिर्फ एक. इसलिए गठबंधन बीजेपी को कुछ हद तक नुकसान पहुंचा सकता है.

इसके अलावा, आदिवासियों के लिए 29 सीटें आरक्षित हैं और अन्य सीटों में एससी आबादी 10 प्रतिशत से अधिक है. लेकिन जोगी भी राज्य में एक दर्जन से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मुस्लिम और ईसाई आबादी पर कुछ वर्चस्व रखते हैं. यह सब कांग्रेस वोट बैंक में सेंध लगाने में मदद करेगा.

कांग्रेस अपने विपक्ष में 15 साल रहने के लिए जोगी को दोषी ठहराती है. सोनिया गांधी द्वारा 2000 में उन्हें राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया था. तीन साल बाद, बीजेपी ने कांग्रेस को हरा दिया और तब से सत्ता में है. राज्य इकाई हार के लिए जोगी के तीन साल के कार्यकाल को दोषी ठहराती है.

जोगी ने क्षेत्रीय राजनीति की भावना को छेड़छाड़ करके बीजेपी से सत्ता छीनने के प्रयास में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर बीजेडी और टीएसआर जैसी सभी क्षेत्रीय ताकतों को एक साथ लाकर कांग्रेस का मुकाबला करने की भी कोशिश की. हालांकि, बसपा के साथ गठबंधन करने के लिए उनके इस कोशिश को राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने का प्रयास माना जा रहा है.

जोगी ने क्षेत्रीय राजनीति की भावना को छेड़छाड़ करके बीजेपी से सत्ता को छीनने के प्रयास में अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई और राष्ट्रीय स्तर पर बीजेडी और टीएसआर जैसी सभी क्षेत्रीय ताकतों को एक साथ लाकर कांग्रेस का मुकाबला करने की भी कोशिश की. हालांकि, बसपा के साथ गठबंधन करने के लिए उनके नवीनतम उद्यम को राष्ट्रीय स्तर पर भूमिका निभाने का प्रयास माना जाता है.

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