हिंदी न्यूज़ – क्या राहुल गांधी से मिलने के बाद मानेंगे बंगाल कांग्रेस के बाग़ी नेता?- Will Rahul Gandhi be able to persuade rebel leaders in Bengal?

2019 में मोदी को टक्कर देने का दम भर रही कांग्रेस पार्टी को अपना घर संभालना मुश्किल हो रहा है. पश्चिम बंगाल में कांग्रेस के 10 से ज़्यादा विधायक तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का दामन थामने को अमादा है. बंगाल में इस भारी टूट को रोकने की कोशिश कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कर रहे हैं. शुक्रवार को राहुल गांधी दिल्ली में कांग्रेस के वॉर रूम यानी 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर पश्चिम बंगाल के नेताओं की बैठक बुलाई है.

बैठक में प्रभारी गौरव गोगोई, सभी सांसदों,एमएलए, प्रदेश अध्यक्ष अधीररंजन चौधरी और वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया है. सूत्रों की माने, तो राहुल गांधी इस बैठक में सभी नेताओं से वन टू वन बात करेंगे. वहीं, इस बैठक में ये भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल गांधी विधायकों को पार्टी छोड़ कर जाने से रोक पाते हैं या नहीं?  प्रदेश में पार्टी का एक धड़ा ये भी मानता है कि 2019 में महागठबंधन को सफल प्रयोग मान रही कांग्रेस को पश्चिम बंगाल में इसका ख़ामियाज़ा उठाना पड़ रहा है.

टीएमसी ही कांग्रेस के विधायकों को धमका कर और धनबल पर अपनी तरफ करने की कोशिश लगातार कर रही है. हालिया पंचायत चुनाव के नतीजे भी कांग्रेस के पश्चिम बंगाल में कमज़ोर होने की कहानी कह रही है.

क्यों हुई बंगाल में कांग्रेस की ये हालत?अतीत में पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के दमदार नेताओं की लंबी चौड़ी फेहरिस्त रही है. इनमें सिद्धार्थ शंकर रे, प्रणब मुखर्जी, प्रियरंजन दासमुंशी के नाम शामिल हैं. ममता बनर्जी ने भी अपनी पार्टी बनाने से पहले खुद भी कांग्रेस की युवा तेज तर्रार नेता के तौर पर अपनी पहचान बनाई थी.

प्रियरंजन दासमुंशी का निधन हो चुका है. पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आरएसएस के कार्यक्रम में जाना भी पार्टी को प्रदेश में बैकफुट पर ला दिया है. बंगाल के बुद्धिजीवी वर्ग ये मानते हैं कि कांग्रेस के संकटमोचन रहे पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का आरएसएस के कार्यक्रम में जाना न चाह कर भी कांग्रेस के विरोध में चला गया, जिसकी आशंका उनकी बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने भी जताई थी.

वहीं, पिछले विधानसभा चुनाव में वामदल के साथ जाना भी कांग्रेस की बड़ी ग़लती बताई जाती है. वाम दल के पतन और ममता बनर्जी के उदय के समय कांग्रेस के पास एक अच्छा मौक़ा था पार्टी को निचले स्तर पर मज़बूत करने का, लेकिन कांग्रेस के कन्फ़्यूज़्ड फ़ैसले ने पार्टी को लगातार प्रदेश में कमज़ोर कर दिया है.

अब ये नौबत आ गई है कि पार्टी टूट के कगार पर है और आलाकमान ये फ़ैसला नहीं ले पा रहे है कि उसे 2019 के मुताबिक़ अपनी राजनीति आगे बढ़ानी है या विधानसभा चुनाव के हिसाब से काम करना है.

ये भी पढ़ें:

कांग्रेस प्रवक्‍ता प्रियंका चतुर्वेदी को ट्विटर पर धमकी देने वाला शख्स गिरफ्तार
वॉयलेट लाइन पर लाजपत नगर-जंगपुरा के बीच मेट्रो पर गिरी रेलिंग, पैदल निकाले जा रहे यात्री

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *