हिंदी न्यूज़ – सरकारी नौकरी में SC/ST आरक्षण: 12 साल पुराने फैसले पर संविधान पीठ करेगी सुनवाई

सरकारी नौकरी में SC/ST आरक्षण: 12 साल पुराने फैसले पर संविधान पीठ करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की फाइल फोटो




Updated: July 11, 2018, 10:51 PM IST

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए प्रमोशन में आरक्षण पर 12 साल पुराने अपने फैसले के खिलाफ अंतरिम आदेश पारित करने से बुधवार को इनकार कर दिया. यह मामला ‘ क्रीमी लेयर ’ लागू करने से जुड़ा हुआ था. कोर्ट ने कहा कि इस विषय पर सात न्यायाधीशों की पीठ गौर करेगी.

चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा , न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर एवं न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि वह केवल अंतरिम राहत देने के उद्देश्य से इस मामले में सुनवाई नहीं कर सकती क्योंकि इसे संविधान पीठ को पहले ही भेजा जा चुका है.

पीठ ने कहा, ‘‘ इस मामले को सुनवाई के लिए बड़ी पीठ के पास भेजा जा चुका है. एम नागराज मामले में पांच जजों के फैसले पर विचार के लिये सात जजों की पीठ गठित करने की जरूरत है. ’’

साल 2006 के एम नागराज फैसले में कहा गया था कि सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्गों के लिए पदोन्नति में क्रीमी लेयर की अवधारणा लागू नहीं की जा सकती. इससे पहले के दो मामलों- 1992 के इंदिरा साहनी और अन्य बनाम भारत संघ तथा 2005 के ईवी चिन्नैया बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में फैसले दिये गये थे. ये दोनों फैसले अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में क्रीमी लेयर से जुड़े थे.केन्द्र की ओर से पेश अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि इस मामले में सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा तत्काल विचार करने की जरूरत है क्योंकि रेलवे और सेना की लाखों नौकरियां विभिन्न फैसलों को लेकर पैदा भ्रम के कारण अटकी हुई हैं.

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