Aligarh Muslim University gave Pakistan the first Prime Minister and second President-अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ने दिया था पाकिस्तान को पहला प्रधानमंत्री और दूसरा राष्ट्रपति

भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे के जनक कहे जाने मो. अली जिन्ना की तस्वीर को लेकर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय सुर्खियों में है।इसी बहाने इस विश्वविद्यालय की ऐतिहासिकता और देश-दुनिया में इसके योगदान के बारे में भी चर्चा चल पड़ी है। दिल्ली से करीब 130 किमी दूर 1155 एकड़ में बसे 143 बरस के इस विश्वविद्यालय से कई हस्तियों के गहरे ताल्लुकात रहे हैं। सर सैय्यद अहमद खान की ओर से 1875 में स्थापित इस विश्वविद्यालय को 1920 में केंद्रीय विश्वविद्यालय की मान्यता मिली। ओलंपिक में भारतीय हाकी टीम को गोल्ड मेडल दिलाने वाले मेजर ध्यानचंद, जफर इकबाल की जादुई स्टिक यहां के मैदान पर चली है तो दर्जनों की संख्या में यहां से निकले छात्र बाद में पद्मभूषण, पद्मविभूषण जैसे पुरस्कारों के हकदार बने। शिक्षा, खेल, गीत-संगीत, अभिनय ही नहीं बल्कि राजनीति में इस विश्वविद्यालय ने तमाम हस्तियां दीं। भारत, पाकिस्तान, मालदीव के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़कर निकले।
पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय से पढ़कर निकले। वह 14 अगस्त 1947 से 16 अक्टूबर 1951 के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे, बाद मे उनकी हत्या हो गई थी। लियाकत ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से बीएससी और एलएलबी की। बाद में वह ऑक्सफोर्ड से एलएलएम करने चले गए थे। पाकिस्तान के दूसरे राष्ट्रपति अयूब खान का भी अलीगढ़ विश्वविद्यालय से नाता रहा।
1960 के दशक में पाकिस्तान सेना में फील्ड मार्शल के बाद वह 1958 से 1969 तक राष्ट्रपति रहे।अब्दुल कयूम पाकिस्तानी सेना के पहले कमांडर इन चीफ और सबसे कम उम्र के जनरल थे। पहले सैन्य कमांडर रहे, जिन्होंने सरकार के खिलाफ सैन्य विद्रोह कर सत्ता पर कब्जा किया। पाकिस्तान के हरीपुर जिले के रेहाना गांव निवासी अयूब के दादा सना में नान कमीशन्ड ऑफिसर थे। गांव में शुरुआती पढ़ाई करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दाखिला लिए। हालांकि पढ़ाई अधूरी कर रॉयल मिलिट्री अकादमी में एडमिशन ले लिया। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान उन्होंने कप्तान के तौर पर बर्मा में युद्ध लड़ा। जब विभाजन हुआ तो पाकिस्तानी सना से जुड़े। 17 जनवरी 1951 को अयूब खान पाकिस्तानी सेना के कमांडर इन चीफ बने। यहां पढ़कर पाकिस्तान के कई मंत्री और गवर्नर भी निकले। आजादी से पहले तालीम का मरकज होने के कारण  पाकिस्तानी छात्रों का पसंदीदा विश्वविद्यालय रहा है। हालांकि पाकिस्तानी छात्रों की यहां तालीम हासिल करने में रुचि के पीछे उस समय मुस्लिम लीग के विश्वविद्यालय पर प्रभाव के भी आरोप लगते रहे।

AMU ALLUMINI अलीगढ़ मुस्लिम विवि की वेबसाइट पर उपलब्ध प्रमुख पुरातन छात्रों की तस्वीर

और भी तमाम हस्तियों का रह है नाताः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से तमाम हस्तियों का नाता रहा है। इसें भारत के पूर्व राष्ट्रपति जाकिर हुसैन, बांग्लादेश के पूर्व प्रधानमंत्री मंसूर अली, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद आमीन दीदी, देश के पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री अब्दुल्ला शेख मोहम्मद आदि राजनीतिक हस्तियां यहां पढ़कर निकलीं हैं।

खिलाड़ीः पूर्व हाकी ओलंपियन जफर इकबाल, मेजर ध्यानचंद, पूर्व क्रिकेटर लाला अमरनाथ,मुश्ताक अली, सीएस नायडू,वजीर अली, ओलंपियन अब्दुल कयूम, अख्तर हुसैन, जोगेंदर सिंह, फिरोज खान आदि ओलंपियन इस विश्वविद्यालय से निकले हैं।

कला क्षेत्र: निर्माता-डायरेक्टर मुजफ्फर अली, आर चंद्र, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रहमान, गीतकार शकील बदायुंनी, तलत महमूद, राही मसूम रजा आदि हस्तियां अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय की छात्र रह चुकी हैं।

दिए कई जजः अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर मौजूद पुरातन छात्रों(अलुमिनाई) की सूची के मुताबिक यहां से जस्टिस बहारुल इस्लाम, जस्टिस फजल अली, जस्टिस सगहीर अहमद और जस्टिस आरपी सेठी जैसे सुप्रीम कोर्ट के जज निकले तो विभिन्न राज्यों के हाईकोर्ट में 47 अन्य जज। एलएलबी और एलएलएम संकाय की यह सफलता मानी जा सकती है।

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