Arun Jaitley attacks on congress and Rahul gandhi over coca cola matter – अरुण जेटली का राहुल गांधी पर कसा तंज, बोले- कांग्रेस अध्यक्ष लिखेंगे ‘रिडिस्कवरी ऑफ कोका कोला’

केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के कोका कोला वाले बयान को लेकर उनके ऊपर जोरदार तंज कसा है। जेटली ने सोशल मीडिया पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर हमला करते हुए एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी इस देश को ‘रिडिस्कवरी ऑफ कोका कोला’ देंगे। जेटली ने कहा, ‘दो दिन पहले राहुल गांधी ने एक जनसभा को संबोधित किया था, जिसमें मौजूद लोगों को उन्होंने अपना ओबीसी समर्थक बताया था। इस सभा में राहुल गांधी ने शिकंजीवाला, ढाबावाला के उद्यमिता कौशल पर बात की थी। हालांकि तथ्य के मुताबिक उन्होंने जो कुछ भी कहा वह गलत था। ‘डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ लिखने वाले का परपोता अपनी सभी गलत जानकारियों के आधार पर एक दिन इस देश कोअपना सर्वोत्तम कार्य ‘रिडिस्कवरी ऑफ कोका कोला’ देगा।

इसके अलावा जेटली ने सवाल किया कि क्या कांग्रेस अपनी विचारधारा को पीछे छोड़ते जा रही है। जेटली ने अपने लेख का शीर्षक ‘क्या कांग्रेस विचारधाराहीन बन रही है? क्या मोदी-विरोध की एकमात्र विचारधारा है?’ दिया है। उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि कुछ दिनों पहले यूपीए के दौरान वित्त मंत्री रहे पी चिदंबरम ने दावा किया था कि पकौड़े तलना नौकरी नहीं है। अपने सभी सहयोगियों में से सबसे ज्यादा दिमाग रखने वाले चिदंबरम शायद मुद्रा योजना जिसकी मदद से कमजोर लोगों को करोड़ों का लोन दिया गया, उसे बेअसर करना चाह रहे थे।

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कांग्रेस को परिवारवाद वाली पार्टी बताते हुए जेटली ने कहा, ‘राजवंश पर विश्वास करने वाली पार्टी पर परिवार और व्यक्तित्व का प्रभुत्व है। विचारधारा कहीं पीछे छूट गई है। जब आपको सही लगता है आप ओबीसी का विरोध कर सकते हो। मौका पड़ने पर, जब जरूरत होती है तब आप मगरमच्छ के आंसू भी रो सकते हो। नेता की गलत जानकारियों वाले विचार पार्टी की विचारधारा बन गई है। ऐसा सिर्फ उस पार्टी के साथ हो सकता है जो विचारधाराहीन हो गई है, जो क्षेत्रीय दलों के साथ हो रही है। यह सब कुछ केवल उस व्यक्ति को लेकर पैदा हुए जुनून के कारण हो रहा है जिसका नाम है नरेंद्र मोदी।’ इसके साथ ही जेटली ने राहुल गांधी पर एक और तंज कसा। उन्होंने कहा कि परिवारवाद पर विश्वास करने वाली पार्टी के अंदर राजनीतिक पद पा लेना पैतृक हो सकता है, लेकिन बुद्धिमानी पैतृक नहीं होती।

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