BJP president Amit Shah has achieved karnatka fort through his valour – अमित शाह के बूथ मैनेजमेंट ने दिलवाई कर्नाटक में भाजपा को जीत

मंगलवार (15 मई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा था कि कड़ी मेहनत और समर्पण के मामले में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ​अमित शाह का उदाहरण दिया था। उस समय अमित शाह कर्नाटक चुनाव के नतीजों को भाजपा के पक्ष में मोड़ने के लिए दिन—रात एक कर रहे थे। शाह ने कर्नाटक चुनावों के दौरान राज्य में 34 दिन बिताए हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक इस दौरान उन्होंने 28 जिलों में 57,135 किमी की यात्रा की है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने चुनावों से पहले ही पार्टी के लिए कार्यकर्ताओं का नेटवर्क तैयार कर लिया था। चुनाव से जुड़ी हर संभावित तैयारी अमित शाह दो महीने पहले ही कर चुके थे। उन्होंने प्रचार के वक्त सिर्फ प्रचार किया। करीब 59 जनसभाएं की और 25 से ज्यादा रोड शो किए। भाजपा सूत्रों का कहना है, अमित शाह की मौजूदगी के कारण कार्यकर्ता पिछले साल हुए दो उपचुनावों को हारने की टीस भूल गए।

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शाह ने चुनाव से पहले ही तय कर दिया था कि हर विधानसभा क्षेत्र में कार्यकर्ताओं का नेता कौन होगा। शाह की नजर बूथ लेवल के कार्यकर्ताओं पर भी रही। शाह बूथ लेवल कार्यकर्ताओं के सम्मलेन में भी शामिल हुए। उन्होंने कार्यकर्ताओं को वोटरों तक पहुंचने और मोदी सरकार के कामों को जनता तक पहुंचाने का जिम्मा दिया। इसके लिए शाह ने बूथ लेवल से लेकर जिला स्तरीय बैठकों में भी भाग लिया।

लिंगायत वोटरों को अपने पक्ष में करने के लिए शाह ने कई मठों की यात्रा की। उस वक्त स्थानीय नेता हमेशा तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उनके मंत्रियों पर जुबानी हमले नहीं कर रहे थे। लेकिन जैसे ही अमित शाह ने सिद्धारमैया सरकार पर हमले करना शुरू किया कि सिद्धारमैया सरकार अहिंदा (दलित) नहीं है, वह अहिंदू (हिंदू विरोधी) हैं।

उन्होंने लिंगायत वोटों को भाजपा के साथ जोड़े रखने के लिए लगातार मेहनत की। समुदायों को समर्थन पाने के लिए उन्होंने लगातार रैलियां की। शाह इस दौरान कहीं भी मुख्यमंत्री उम्मीदवार और लिंगायत समुदाय से आने वाले बीएस येदियुरप्पा के भरोसे नहीं दिखे। शाह ने पूरे प्रदेश में प्रचार की कमान अप्रैल के पहले हफ्ते में अपने हाथ में ले ली थी।

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