BSP chief Mayawati said her party’s alliance with Samajwadi Party was on for the 2019 Lok Sabha poll-यूपी: सपा, बसपा, कांग्रेस के पास भाजपा से 6 फीसदी ज्यादा वोट शेयर, 2019 में बढ़ सकती है मुश्किल

उत्तर-प्रदेश में सपा-बसपा गठबंधन को लेकर जारी तमाम अटकलों का बसपा मुखिया मायावती ने पटाक्षेप कर दिया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से गठबंधन जारी रहेगा। सीटों पर समझौता होने के बाद इसकी औपचारिक घोषणा भी होगी। एनडीटीवी से बातचीत में मायावती ने कहा-अभी लोकसभा चुनाव होने में समय है, दोनों दलों के बीच सीटों की संख्या पर फैसला होना है। इसके बाद गठबंधन की औपचारिक घोषणा होगी। मायावती ने कहा कि गठबंधन के बारे में राज्य की जनता को पहले से पता है, इस नाते अभी कोई घोषणा नहीं की गई।

2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी का कुल मिलाकर 41.8 प्रतिशत वोट शेयर था, जबकि बीजेपी और अपना दल ने 43.3 प्रतिशत वोट शेयर के दम पर 80 में से 73 सीटें जीतीं थीं। दोनों दल तब अलग-अलग चुनाव लड़े थे। समाजवादी पार्टी ने सिर्फ पांच सीटें जीती थीं, जबकि बसपा को एक भी सीट हासिल नहीं हुई थी। वहीं कांग्रेस ने 7.5 प्रतिशत वोट शेयर के साथ दो सीटें जीतीं थीं। अगर सपा-बसपा के साथ कांग्रेस भी गठबंधन में शामिल होती है तो तीनों दलों का कुल वोट शेयर बीजेपी के वोट शेयर से करीब छह प्रतिशत ज्यादा बैठेगा। माना जा रहा है कि तीनों दलों के साथ आने से 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

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मायावती ने कहा-सेकुलर ताकतें एकजुट हो रहीं हैं, जिससे बीजेपी और आरएसएस जैसी सांप्रदायिक शक्तियां चिंतित हैं। सांप्रदायिक शक्तियां सेकुलर ताकतों की एकजुटत होकर आगे बढ़ते देखना नहीं चाहतीं।
मार्च में गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीट के उपचुनाव में सपा-बसपा गठबंधन के बाद बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। बीजेपी के लिए सबसे चौंकाने वाली हार योगी आदित्यनाथ के गढ़ में गोरखपुर में रही। ये दोनो सीटें मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की प्रतिष्ठा से जुड़ीं थीं। मगर सपा-बसपा गठबंधन से दोनों दलों के लिए जातीय समीकरण सीट जिताने वाला साबित हुआ।

आगामी कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा उपचुनाव में बसपा मुखिया मायावती ने पार्टी काडर को समाजवादी पार्टी और रालोद उम्मीदवार के पक्ष में काम करने को कहा है।हालांकि लोकसभा उपचुनाव के बाद हुए गठबंधन के बाद में टूटने की भी अटकलें एक बार लगने लगीं थीं, जब राज्यसभा सीटों के चुनाव के दौरान सपा बसपा के इकलौते उम्मीदवार को भी जिताने में असफल रही थी। हालांकि मायावती ने बाद में प्रेस कांफ्रेंस कर ऐसी अटकलों को खारिज कर दिया था।

21 चीनी मिलों की नीलामी में हुए कथित घोटाले की सीबीआई जांच पर दबाव के सवाल पर मायावती ने कहा कि वह बीजेपी या कांग्रेस किसी के दबाव में नहीं आने वाली हैं। बहुजन समाज पार्टी हमेशा संघर्ष करने में यकीन रखती है।बता दें कि बसपा राज में 21 चीनी मिलों की नीलामी की गई थी। जिसमें 1179 करोड़ राजस्व को चूना लगने की बात है।

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