Gujarat Dalit activist Bhanu Vankar who immolated himself dies Rashtriya Dalit Adhikar Manch gives ultimatum to government – गुजरात: डीएम ऑफिस में दलित ने किया आत्मदाह, संगठन ने सरकार को दिया अल्टीमेटम

गुजरात के पाटन में कलेक्टर ऑफिस के सामने गुरुवार को आत्मदाह करने वाले दलित कार्यकर्ता भानु वानकर ने शुक्रवार को दम तोड़ दिया। 61 वर्षीय वानकर ने दलितों को भूमि आवंटन में सरकार द्वारा कथित विलंब के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए गुरुवार की दोपहर कलेक्टर ऑफिस के सामने आत्मदाह कर लिया था। इलाज के लिए उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को रात 10 बजे करीब वानकर की मौत हो गई। दलित कार्यकर्ता की मौत के बाद राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच (आरडीएएम) के कार्यकर्ताओं के अंदर काफी गुस्सा भर गया है। संगठन ने वानकर की मौत को ‘सरकारी हत्या’ करार दिया है। साथ ही शुक्रवार को प्रेस रिलीज जारी करते हुए संगठन ने सरकार को अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वानकर की ‘हत्या’ में जिस किसी का भी हाथ है उसकी पहचान शनिवार शाम चार बजे तक हो जानी चाहिए, अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे लोग अहमदाबाद-मेहसाणा हाइवे को जाम कर देंगे।

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वहीं गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से शुक्रवार को वानकर की मौत से पहले बयान जारी किया गया था, जिसमें कहा गया था, ‘दलित कार्यकर्ता द्वारा खुद को जलाए जाने से सीएम विजय रुपाणी काफी दुखी हैं, इसलिए यह ऐलान किया जा रहा है कि वानकर के पूरे इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी। इस पूरे मामले में सच्चाई को सामने लाने के उद्देश्य से जांच की जाएगी और इस पूरी तहकीकात की जिम्मेदारी गुजरात के चीफ सेक्रेटरी की होगी। सीएम ने कहा है कि जैसे ही जांच के बाद जानकारी सामने आएगी, इस घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।’

शुक्रवार को ही पाटन पुलिस ने इस मामले में कुछ ‘अज्ञात व्यक्तियों’ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। कांग्रेस विधायक अल्पेश ठाकोर, शैलेश परमार, नौशाद सोलंकी और कीरीट पटेल ने इस मामले में पाटन के एसपी और कलेक्टर से मुलाकात की थी, जिसके बाद एफआईआर दर्ज की गई। अल्पेश ठाकोर ने इंडियन एक्सप्रेस को जानकारी दी, ‘मुलाकात के दौरान कलेक्टर ने हमें आश्वासन दिया है कि भूमि आवंटन का काम एक हफ्ते के अंदर शुरू कर दिया जाएगा तो वहीं सरकार की ओर से अभी तक इस मामले में कुछ भी नहीं कहा गया है। अभी तक कोई आधिकारिक बयान क्यों नहीं आया? यह काफी बड़ा मामला है और हम इसे विधानसभा तक लेकर जाएंगे। दूसरों के हक के लिए लड़ने वाले व्यक्ति ने खुद को जला दिया। आजादी के इतने सालों के बाद भी हमारे सामने इस तरह की समस्याएं हैं, यह देश के लिए काफी शर्म की बात है।’

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