Interesting facts about MNS chief Raj Thackeray life family and shiv sena politics -किसके कहने पर और क्यों बदला था मनसे सुप्रीमो राज ठाकरे ने अपना नाम?

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(एमएनएस) मुखिया राज ठाकरे का असली नाम बहुत कम लोग जानते हैं। वजह कि उन्होंने एक वाकये के बाद अपना नाम बदल लिया था।जिसके बाद से उनकी पहचान राज ठाकरे के रूप में ही बन गई। नाम कैसे और क्यों बदला, इसकी जानकारी देने से पहले बता दें कि उनका मूल नाम स्वरराज श्रीकांत ठाकरे था। मगर बाद में उन्होंने नाम बदलकर राज श्रीकांत ठाकरे कर लिया। श्रीकांत उनके पिता का नाम रहा। इस प्रकार वह राज ठाकरे के नाम से ही चर्चित हुए।

राज ठाकरे के पिता श्रीकांत ठाकरे एक म्यूजिक डायरेक्टर थे।उन्होंने अपनी पत्नी सहित बच्चों के नाम म्यूजिकल रखे। पत्नी को जहां मधुवंती नाम दिया, वहीं बेटे को स्वराज। मधुवंती हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक राग है। स्वरराज का मतलब होता है कि स्वरों का बादशाह।बेटी का नाम उन्होंने जयजयवंती रखा, यह भी एक राग है। बचपन में स्वरराज ने तबला, गिटार और वायलिन सीखना शुरू किया। संगीत से उन्हें प्यार तो था मगर इससे ज्यादा प्यार कार्टून बनाने से था। स्वरराज ठाकरे परिवार की साप्ताहिक पत्रिका ‘मार्मिक’ के लिए कार्टून बनाते थे। जब वह स्कूल में पढ़ते थे।एक दिन उनके चाचा बाला साहब ठाकरे ने कहा-मैंने एक कार्टूनिस्ट के रूप में अपना करियर बाल ठाकरे के रूप में किया, तुम राज ठाकरे नाम से अपना करियर शुरू कर सकते हो।और इस तरह से स्वरराज ठाकरे ने अपना नाम राज ठाकरे कर लिया।

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राज ठाकरे का जन्म 14 जून 1968 को बाल ठाकरे के छोटे भाई श्रीकांत ठाकरे के बेटे के रूप में लिया।बाल ठाकरे की पत्नी मीना ठाकरे की बहन से ही उनके छोटे भाई श्रीकांत की शादी हुई थी। राज ठाकरे ने शुरुआती पढ़ाई बाल मोहन विद्यामंदिर मुंबई से की। फिर मुंबई के मशहूर जेज स्कूल ऑफ आर्ट्स मुंबई से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की।पढ़ाई पूरी करने के बाद एक युवा नेता के तौर पर उन्होंने चाचा बाल ठाकरे के सानिध्य में राजनीति शुरू की।  1996 में राज ठाकरे ने एक चर्चित म्यूजिकल कंसर्ट कराया, जिसमें मशहूर पॉप स्टार माइकल जैक्शन और महान गायिका लता मंगेशकर ने शिरकत किया।इस कंसर्ट से काफी संख्या मे युवा शिवसेना के नजदीक आए।धीरे-धीरे राज ठाकरे शिवसेना में बाल ठाकरे के बाद सबसे प्रभावी नेता के तौर पर उभरने लगे। लोग मानकर चलने लगे कि बाल ठाकरे के वारिस भतीजे राज ठाकरे ही होंगे। वजह कि बाल ठाकरे के तेवर से लेकर उनकी हर अदा राज ठाकरे में दिखती थी। राज ठाकरे भी अपने चाचा बाल ठाकरे की हर स्टाइल को कॉपी करते थे।उन्हीं की तरह चाल-ढाल से लेकर बयानबाजी सब करते थे।

राज की महत्वाकांक्षाएं भी समय के साथ बढ़तीं गईं, वह खुद को बालासाहब का वारिस मानकर चल रहे थे। मगर राज ठाकरे तब निराश हुए जब जनवरी 2003 में बाल ठाकरे ने अपने बेटे उद्धव ठाकरे को अपना वारिस घोषित कर दिया।आखिरकार 2006 में राज ठाकरे ने शिवसेना से इस्तीफा दे दिया।फिर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना(मनसे) गठित की। उनकी यह पार्टी 2008 में तब चर्चा में आई, जब पार्टी कार्यकर्ताओं ने यूपी और बिहार के लोगों पर मुंबई में जुल्म ढाना शुरू किया। मनसे ने मराठी मानुष का नारा दिया। पार्टी का मानना था कि यूपी और बिहार से आए भारी तादाद में लोगों ने महाराष्ट्र में मराठियों के हितों को प्रभावित करने का काम किया है। मनसे ने 2014 के लोकसभा में दस सीटों पर चुनाव लड़ा, मगर एक सीट पर भी सफलता नहीं मिली।

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