IRCTC brings new software solution for hygienic food on trains – ट्रेनों में घटिया खाने से मिलेगी निजात! IRCTC लाया नया सॉफ्टवेअर

भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम (आरआरसीटीसी) यात्रियों को बढ़िया और स्वास्थ्यवर्धक खाना मुहैया कराने के लिए अब एक नए सॉफ्टवेयर के जरिये काम ले रहा है। कई बार खाने में मिले कीड़ों की शिकायतों के बाद आईआरसीटीसी ने यह कदम उठाया है। इस सॉफ्टवेयर की मदद से सीसीटीवी कैमरों के जरिये आईआरसीटीसी की रसोइयों पर निगरानी रखी जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आईआरसीटीसी की 16 बेस किचन में हाई डेफिनीशन कैमरे लगाए गए हैं। कैमरों को आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस विजन डिटेक्शन वाले बड़े मॉनीटर्स से जोड़ा गया है। आईआरसीटीसी के मुताबिक सॉफ्टवेयर के दिल्ली मुख्यालय में 16 किचन की लाइव गतिविधियां कैद की जाती हैं। अगर निर्धारित प्रकिया के मुताबिक कोई चीज नहीं घटती हैं तो उसकी जानकारी मशीन में स्वत: दर्ज हो जाती है। कॉकरोच, कीड़े या चूहों के पाए जाने की सूरत में अधिकारियों के पास अपने आप एक अलर्ट जाता है। अगर कोई रसोइया मानकों के अनुरूप काम करता हुआ नहीं पाया जाता है, मसलन किसी रसोइये ने खाना बनाते वक्त अगर सही यूनीफॉर्म नहीं पहनी है तो उसकी शिकायत भी सिस्टम में दर्ज हो जाती है।

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अच्छी बात यह है कि अगर तय समय में अधिकारी शिकायत पर संज्ञान नहीं लेते हैं को वह अपने आप आईआरसीटीसी के उच्चाधिकारियों पास चली जाएगी। दिल्ली की WOBOT नाम की कंपनी ने यह सिस्टम तैयार किया है। उम्मीद की जा रही है कि आईआरसीटीसी के द्वारा अमल में लाए गए नए सिस्टम से यात्रियों को मिलने वाले खाने को लेकर शिकायतें कम होंगी और उन्हें सेहतमंद और गुणवत्तापूर्ण खाना मिल सकेगा। बता दें कि हाल ही में चंडीगढ़ के उपभोक्ता विवाद निवारण फोरम ने एक महिला यात्री को खराब खाना परोसे जाने के एवज में रेलवे को उसे 10 हजार रुपये का हर्जाना देने को कहा था। कई जगह शिकायत करने के बाद आखिरकार उपभोक्ता फोरम से महिला को न्याय मिला था।

शालिनी जैन नाम की महिला यात्री 3 जुलाई 2016 को अपने दो बच्चों के साथ कालका-नई दिल्ली शताब्दी ट्रेन से चंडीगढ़ से दिल्ली जा रही थीं, तब ट्रेन में दिए गए खाने में उन्होंने कीड़ा मिलने की शिकायत की थी। शालिनी के मुताबिक संबंधिक स्टाफ ने उन्हें शिकायत दर्ज करने वाला रजिस्टर देने से मना कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन रेल मंत्री सुरेश प्रभु को भी शिकायत भेजी थी, लेकिन वहां भी कोई कार्रवाई न होती देख वह मामले को चंडीगढ़ के उपभोक्ता फोरम ले गई थीं। भारत के नियंत्रक और महालेखापरीक्षक (सीएजी) ने भी पिछले वर्ष जुलाई में अपनी ऑडिट रिपोर्ट में खाने में गड़बड़ियां पाई थीं।

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