Jammu and Kashmir: 45 Youth including MBA and PhD Scholar join Militant Groups this Year – एमबीए, पीएचडी कर आतंकी बन रहे कश्‍मीरी युवा, इस साल 45 ने उठाए हथियार

जम्मू-कश्मीर के नौजवान कागज और कलम पकड़ने के बाद बंदूकें व गोला-बारूद थाम रहे हैं। वे मास्टर इन बिजनेस मैनेजमेंट (एमबीए) और डॉक्टरेट ऑफ फिलॉसफी (पी.एच.डी) जैसी डिग्रियां हासिल करने के बाद आतंकी बन रहे हैं। अधिकारियों की मानें तो 2018 के आंकड़े बताते हैं कि अभी तक कुल 45 युवक हथियार उठा चुके हैं। आतंकी संगठनों का दामन थामने वाले युवक सबसे अधिक दक्षिणी कश्मीर से निकले हैं।

पढ़ने-लिखने के बाद इन 45 में से 12 शोपियां से थे, जबकि 9 कुलगाम से नाता रखते थे। वहीं, अनंतनाग से सात, पुलवामा से चार और अवंतीपोरा से तीन युवक आतंकी संगठनों के साथ जुड़े। रिपोर्ट्स में इसके अलावा दावा किया गया कि आज (तीन मई) तीन और युवकों ने हथियार उठाए। हालांकि, इन तीन के बारे में अभी तक किसी प्रकार की पुष्टि नहीं हो सकी है।

उधर, उत्तरी कश्मीर में भी कुछ ऐसे ही हालात नजर आए थे। यहां के हंदवाड़ा से एक, कुपवाड़ा से दो, बंदीपोरा, सोपोर और श्रीनगर से एक-एक युवकों के बीते दिनों गायब होने की खबरें सामने आई थीं। आतंकी बनने वालों में 26 वर्षीय जुनैद अशरफ सहराई भी है, जो कश्मीर वि.वि. से एमबीए कर चुका है। जुनैद के पिता मो.अशरफ सहराई तहरीक-ए-हुर्रियत के अध्यक्ष हैं, जो कि अलगाववादी पार्टी है और अक्सर पाकिस्तान का समर्थन करती नजर आती है।

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डिग्री हासिल कर आतंकी बनने वालों की सूची में 26 वर्षीय मन्नान बशीर वानी का नाम भी है, जो कुपवाड़ा से ताल्लुक रखता है। वह पीएचडी शोधार्थी है। वह इससे पहले अलीगढ़ मुस्लिम वि.वि. से पढ़ा है। ऐसे में सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “स्थिति थोड़ी मुश्किल साबित हो रही है। हम आतंकियों से लड़ते हैं, उन्हें मार गिराते हैं और सरेंडर करने पर मजबूर करते हैं। लेकिन अगले दिन सोशल मीडिया पर फिर किसी नए आतंकी के पनपने का प्रमाण मिल जाता है। यह प्रक्रिया रोकी जानी चाहिए।”

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