Karnataka Election 2018: Dalit leader may be next CM, Mallikarjun Kharge, G Parmeshwar, KH Muniyappa in CM Race, Congress, JDS, Karnataka poll result – कर्नाटक चुनाव: इनमें से एक दलित को आगे कर कांग्रेस चल सकती है आखिरी चाल

कर्नाटक चुनाव के नतीजे मंगलवार (15 मई) को आएंगे लेकिन उससे पहले राज्य में सियासी गहमागहमी चरम पर है। कांग्रेस और बीजेपी, दोनों धड़ों के लोग अपनी-अपनी जीत को लेकर सुनिश्चित हैं। साथ ही प्लान बी पर भी काम कर रहे हैं कि अगर त्रिशंकु विधानसभा हुई तो सरकार कैसे बनेगी। किंगमेकर जेडीएस को किन मुद्दों और शख्सियतों के बल पर अपने पाले में कर राज्य में सरकार बनाई जा सकती है। कांग्रेस ने इस दिशा में रविवार (13 मई) को संकेत दिए जब सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि अगर कोई दलित सीएम बनता है तो वो पद छोड़ने को तैयार हैं। शाम होते ही जेडीएस की तरफ से भी यह संकेत आए कि अगर सिद्धारमैया पद छोड़ते हैं तो जेडीएस कांग्रेस का हाथ थाम सकती है।

अब कांग्रेस खेमे में इस बात को लेकर भी मंथन जारी है कि ऐसी सूरत में किस चेहरे को आगे कर जेडीएस का समर्थन हासिल किया जाए। सूत्रों के मुताबिक अगर कांग्रेस ने राज्य में दलित कार्ड खेला तो लोकसभा में पार्टी के नेता और पूर्व रेल मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे पार्टी की पहली पसंद हो सकते हैं। खड़गे कर्नाटक के बीदर जिले से ताल्लुक रखते हैं और राजनीति में लंबा अनुभव रहा है। वो कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पिछले विधान सभा चुनाव यानी 2013 में भी उनके सीएम बनाए जाने की चर्चा थी लेकिन आखिर में बाजी सिद्धारमैया ने मार ली थी।

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राज्य में कांग्रेस के दूसरे बड़े दलित नेता के तौर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री के एच मुनियप्पा भी सीएम पद के लिए पार्टी की पसंद हो सकते हैं। वो गुलबर्गा जिले से आते हैं। कोलार से वो लगातार सात बार लोकसभा सांसद चुने गए हैं। पिछली यूपीए सरकार के दोनों कार्यकाल में मुनियप्पा मंत्री रहे हैं। कर्नाटक में दलितों के बीच उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। मुनियप्पा के अलावा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वर भी इस पद की रेस में हो सकते हैं। साल 2013 के चुनावों में जीत का श्रेय परमेश्वर को भी जाता था लेकिन तब वो चुनाव हार गए थे। इस वजह से सीएम पद की रेस में पिछड़ गए थे। इस बार दलित चेहरे को तौर पर उनका भी नाम रेस में शामिल हो सकता है।

इसके अलावा एक बात यह भी अहम है कि अगर कांग्रेस को जेडीएस से समर्थन लेना पड़ा तो इन नेताओं में जिसके भी जेडीएस से रिश्ते अच्छे होंगे, जेडीएस उसके ही नाम पर मुहर लगाएगी। बता दें कि मुनियप्पा को छोड़ दोनों नेता पहले जेडीएस से जुड़े रहे हैं।

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