On the issue of Rohingya refugees, Bangladesh has asked India for help – रोहिंग्या मुद्दे पर बांग्लादेश ने मांगी भारत से मदद

रोहिंग्या शरणार्थियों के मुद्दे पर बांग्लादेश ने भारत से मदद मांगी है। बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने गुरुवार को कहा कि उनका देश चाहता है कि जितनी जल्द हो सके रोहिंग्या शरणार्थी अपने देश म्यांमा लौट जाएं और इसके लिए म्यांमा पर दबाव बनाने में भारत सरकार अहम भूमिका निभा सकती है। पश्चिम बंगाल के शांतिनिकेतन में विश्व भारती विश्वविद्यालय के 49वें दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील करते हुए उन्होंने कहा, ‘रोहिंग्या मुसलमानों ने बांग्लादेश में शरण ली हुई है। हमने उन्हें इंसानियत के नाते जगह दी। हम चाहते हैं कि जितनी जल्द हो सके, वे अपने देश लौट जाएं। मैं चाहती हूं कि आप (भारत) म्यांमा से हमारी बातचीत करवाने में मदद करे ताकि वे रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस अपने देश ले जा सकें।’ समारोह के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शेख हसीना ने तीस्ता मुद्दे पर भी बातचीत की। उन्होंने इस मुद्दे के हल के लिए प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा जताया। वार्ता में बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी शामिल थीं।

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प्रधानमंत्री मोदी और शेख हसीना ने लगभग आधा घंटा तक द्विपक्षीय बैठक की। इस दौरान शेख हसीना और मोदी के बीच रोहिंग्या और तीस्ता जल संधि के अलावा विभिन्न द्विपक्षीय मुद्दों पर बातचीत हुई। भारत में बांग्लादेश उच्चायोग के वरिष्ठ अधिकारी मोहम्मद शहरयार आलम के अनुसार, ‘बैठक में क्षेत्र की सुरक्षा और राजनीति से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।’ उन्होंने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों की म्यांमा वापसी के संबध में बांग्लादेश और भारत की एक जैसी राय है। खासकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज द्वारा म्यांमा की यात्रा के बाद उनके द्वारा दिए गए आश्वासन के संदर्भ में। सुषमा स्वराज ने रोहिंग्या शरणार्थियों की सुरक्षित व मर्यादापूर्ण वापसी के संबंध में भारत की राय प्रकट की थी।’ तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे पर चर्चा के बारे में उन्होंने कहा, ‘हमारे प्रधानमंत्री ने कहा कि चर्चा के माध्यम से इन मुद्दों को हल किया जा सकता है। हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर पूरा भरोसा है। इस मुद्दे पर ट्रैक टू डायलॉग पहले से ही चल रहा है।’

दीक्षांत समारोह के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शेख हसीना के साथ विश्वविद्यालय परिसर में 25 करोड़ रुपए की लागत से नए बने ‘बांग्लादेश भवन’ का उद्घाटन किया। इस मौके पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और वहां के राज्यपाल केशरीनाथ त्रिपाठी ने भी शिरकत की। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि शायद यह पहला मौका है, जब किसी दीक्षांत समारोह में दो देशों के प्रधानमंत्री पहुंचे हैं। भारत और बांग्लादेश एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘भारत और बांग्लादेश दो अलग देश हैं जो सहयोग और आपसी समझदारी से जुड़े हैं। चाहे उनकी संस्कृति हो या लोकनीति- दोनों देशों के लोग एक दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं।’ मोदी ने कहा कि बांग्लादेश भवन इसका एक उदाहरण है। बांग्लादेश के 150 प्रतिनिधि दीक्षांत समारोह में भाग लेने के लिए आए हुए हैं।  इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भाषण में कहा, ‘हमने मानवीय आधार पर रोहिंग्या शरणार्थियों को शरण दी है। हम चाहते हैं कि म्यांमा सरकार उन्हें वापस लें। हमारी 16 करोड़ की जनसंख्या है। जरूरी हुआ तो हम उनके (रोहिंग्यों के) साथ अपना खाना भी साझा करेंगे।’ म्यांमा के रखाइन प्रांत से भागकर लगभग 11 लाख रोहिंग्या शरणार्थी बांग्लादेश पहुंचे हैं। भारत में भी कुछ रोहिंग्या शरणार्थी पनाह लिए हुए हैं। इन सबकी वापसी के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में बातचीत हो रही है। सिद्धांतत: म्यांमा की सरकार एक निश्चित अवधि के भीतर अपना नागरिकों की वापसी के लिए तैयार हुआ है। हालांकि, इसकी विस्तृत कार्ययोजना अभी नहीं बनी है।

अपने भाषण में शेख हसीना ने भारत को बांग्लादेश का पुराना मददगार बताया और याद दिलाया कि किस प्रकार 1971 के मुक्तियुद्ध में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने स्वाधीन बांग्लादेश को अस्तित्व में लाने में अहम भूमिका निभाई थी। शेख हसीना ने याद दिलाया कि तब पूर्वी पाकिस्तान कहे जाने वाले आज के बांग्लादेश में पाकिस्तान की सरकार ने बांग्ला और रवींद्र संगीत जैसी सांस्कृतिक विरासत पर प्रतिबंध लगा दिया था। पाकिस्तानी सेना ने कत्लेआम मचाया। भारत के दखल से पाकिस्तान अपने इरादे में कामयाब नहीं हो सका और बांग्लादेश बना। शेख हसीना ने अपने भाषण में कविगुरु रवींद्रनाथ टैगोर को याद किया। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने दोनों देशों के राष्ट्रगान लिखे हैं- भारत का ‘जन-गण-मन-अधिनायक’ और बांग्लादेश का ‘आमार शोनार बांग्ला’।

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