On Third Front Union Minister Rajyavardhan Rathore said all will wiped out at once – नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्षी एकजुटता पर केंद्रीय मंत्री बोले- अच्छा है सारी गंदगी एक साथ साफ हो

कर्नाटक चुनाव नतीजों के बाद विपक्षी एकजुटता को लेकर फिर से चर्चाएं गरमा गई हैं। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता राज्‍यवर्धन सिंह राठौड़ ने चौंकाने वाला बयान दिया है। उन्‍होंने नरेंद्र मोदी को रोकने के लिए तीसरे मोर्चे की संभावना पर बेहद तल्‍ख टिप्‍पणी की है। राज्‍यवर्धन ने कहा, ‘कांग्रेस अध्‍यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी की यह लगातार तीसरी हार है। उन्‍होंने खुद को प्रधानमंत्री का उम्‍मीदवार भी घोषित कर दिया है। अब ऐसे में यदि सभी विपक्षी पार्टियां एकजुट होना चाहती हैं तो हमारे लिए भी यह ठीक है क‍ि देश की जितनी गंदगी है वो एक साथ हटे।’ कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर सामने आई है, लेकिन बहुमत से दूर है। ऐसे में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी. देवेगौड़ा की पार्टी जनता दल सेक्‍युलर (जेडीएस) किंग मेकर की भूमिका में आ गई है। जेडीएस और मायावती की पार्टी बसपा के बीच चुनाव पूर्व गठबंधन हुआ था। बसपा इन दिनों भाजपा के खिलाफ है। ऐसे में यह देखना भी दिलचस्‍प होगा कि नए राजनीतिक समीकरण के बीच जेडीएस किसको अपना समर्थन देती है।

भाजपा के खिलाफ मोर्चेबंदी के तहत यूपीए प्रमुख सोनिया गांधी के आवास पर विपक्ष के कई दलों के शीर्ष नेताओं की बैठक भी हो चुकी है। हालांकि, मुख्‍य न्‍यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ कांग्रेस के महाभियोग प्रस्‍ताव पर विपक्षी दल बंट गए थे। खासकर तृणमूल कांग्रेस ने इसका स्‍पष्‍ट तौर पर विरोध किया था। पार्टी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्‍यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मसले पर कांग्रेस के खिलाफ राय रखी थी। बता दें क‍ि व‍ह शुरुआत से ही फेडरल फ्रंट की वकालत करती रही हैं। माना जाता है कि उनके प्रयासों के चलते ही उत्‍तर प्रदेश उपचुनावों में सपा और बसपा के बीच चुनवी गठजोड़ हुआ था। इसमें सपा गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा सीटों पर जीत हासिल करने में सफल रही थी। यह न केवल सीएम योगी आदित्‍यनाथ, बल्कि भाजपा के लिए भी बड़ा झटका था। इस बीच, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और तेलंगाना राष्‍ट्र समिति के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव के बीच भी मुलाकात हुई। इस दौरान वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों की संभावित रणनीति पर चर्चा हुई थी। विपक्षी दलों के तमाम प्रयासों के बावजूद फेडरल फ्रंट या तीसरा मोर्चा अभी तक कोई आकार नहीं ले सका है।

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