SC/ST Act: Your verdict ‘wrong’, Centre tells Supreme Court, next hearing on May 16 – एससी-एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार की गुहार- आपका फैसला गलत, रोक लगाएं, अदालत का इनकार

केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से आज (03 मई को) फिर गुहार लगाई कि अनुसूचित जाति-जनजाति कानून में किए गए संशोधनों पर तत्काल रोक लगाई जाय लेकिन कोर्ट ने ऐसा करने से साफ तौर पर मना कर दिया। केंद्र सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और जस्टिस उदय यू ललित की खंडपीठ के समक्ष दलील दी और कहा कि कोर्ट द्वारा दिया गया फैसला गलत है। लिहाजा, इस पर तुरंत रोक लगाई जाय और मामले को बड़ी पीठ में भेजा जाय मगर कोर्ट ने ऐसा करने से इनकार कर दिया। खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि वह भी इन समुदायों के अधिकारों के संरक्षण और उन पर अत्याचार करने वालों को दंडित करने के 100 फीसदी हिमायती है।

अटॉर्नी जनरल वेणुगोपाल ने कोर्ट से कहा कि शीर्ष अदालत ऐसे नियम या दिशा निर्देश नहीं बना सकती जो विधायिका द्वारा पारित कानून के विपरीत हो। वेणुगोपाल ने अनुसूचित जाति-जनजाति कानून से संबंधित मामले में शीर्ष अदालत के फैसले को बड़ी पीठ को सौंपने का अनुरोध करते हुए कहा कि इस व्यवस्था की वजह से जान माल का नुकसान हुआ है। इस पर खंडपीठ ने 20 मार्च को दिए अपने फैसले को सही ठहराते हुये कहा कि अनुसूचित जाति-जनजाति कानून पर अपनी व्यवस्था के बारे में निर्णय करते समय शीर्ष अदालत ने किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी पहलुओं और फैसलों पर विचार किया था।

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पीठ ने कहा कि वह सौ फीसदी इन समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने और उनपर अत्याचार के दोषी व्यक्तियों को दंडित करने के पक्ष में है। केन्द्र ने अनुसूचित जाति-जनजाति (अत्याचारों की रोकथाम) कानून, 1989 के तहत तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधानों में कुछ सुरक्षात्मक उपाय करने के शीर्ष अदालत के 20 मार्च के फैसले पर पुनर्विचार के लिए दो अप्रैल को न्यायालय में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करने का निश्चय किया था लेकिन उसने स्पष्ट कर दिया था कि वह इस मामले में और किसी याचिका पर विचार नहीं करेगी। यही नहीं, न्यायालय ने केन्द्र की पुनर्विचार याचिका पर फैसला होने तक 20 मार्च के अपने निर्णय को स्थगित रखने से इनकार कर दिया था। इस फैसले के बाद अनुसूचित जाति और जनजातियों से जुड़े अनेक संगठनों ने देश में दो अप्रैल को भारत बंद का आयोजन किया था जिसमें आठ व्यक्तियों की जान चली गयी थी। अब मामले की सुनवाई 16 मई को होगी।

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