Tripura Chief Minister Biplab Deb decided to demolish Political Party offices built on government land – त्रिपुरा: राजनैतिक दलों के दफ्तरों पर बुलडोजर चलवाना चाहते हैं सीएम, भड़के विपक्षी

भाजपा शासित त्रिपुरा में राज्य सरकार के फैसले ने विपक्षी दलों की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने सरकारी जमीन पर बने विभिन्न दलों और ट्रेड यूनियन के कार्यालयों को ढहाने का निर्णय लिया है। सरकार ने इसे अवैध निर्माण करार दिया है। विपक्षी दलों माकपा और कांग्रेस ने इसका विरोध किया है। माकपा ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार अगर ऐसा करती है तो वह विरोध नहीं करेगी, बल्कि कानूनी रास्तों से इससे निपटेगी। वेस्ट त्रिपुरा जिले के कलेक्टर मिलिंद रामटेक ने इस बाबत 30 अप्रैल को जानकारी दी थी। उन्होंने कहा था, ‘वेस्ट त्रिपुरा जिले में 78 जगहों पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण किए गए हैं। सभी पक्षकारों को नोटिस दिया जा चुका है। ऐसे सभी निर्माण को 6 मई के बाद ढहाया जा सकता है।’ इस अभियान के तहत ही राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियन को भी नोटिस जारी किए गए हैं। विपक्षी दलों ने सरकारी जमीन या वनक्षेत्र की जमीन पर कार्यालय बनाने की बात भी स्वीकार की है।

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माकपा के राज्य सचिव बिजन धर ने बताया कि त्रिपुरा सरकार ने 99 स्थानों पर पार्टी कार्यालय को ढहाने का नोटिस दिया है। उन्होंने कहा, ‘यह बात सही है कि पार्टी कार्यालय या ट्रेड यूनियन के दफ्तर सरकारी जमीन या वन भूमि पर बनाए गए हैं। लेकिन, इनका निर्माण बहुत पहले किया गया था। निर्माण को ढहाने का निर्णय दुर्भावना से ग्रस्त है। राज्य में विपक्षी दलों की राजनीतिक गतिविधियों को रोकने का प्रयास है। सरकार ऐसा करती है तो हमलोग उसका प्रतिरोध नहीं करेंगे। हमलोग कानून का सहारा लेंगे।’ कांग्रेस ने भी त्रिपुरा सरकार के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है। त्रिपुरा प्रदेश कांग्रेस समिति के बिराजीत सिन्हा ने अलग से प्रेस कांफ्रेंस कर सरकार के फैसे पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस को 35 कार्यालयों को ढहाने का नोटिस मिला है। इस बात से इनकार नहीं है कि कांग्रेस के कई कार्यालय सरकारी जमीन पर बने हुए हैं। सरकार हमें राजस्व मुहैया कराने के लिए कह सकती है। राज्य सरकार को राजनीतिक दलों के लिए जमीन भी आवंटित करनी चाहिए।’ बता दें कि भाजपा ने दशकों से वाम मोर्चा शासित त्रिपुरा में पहली बार सरकार बनाई है।

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