tripura cm biplab deb says rabindranath tagore gave away nobel prize in protest of british rule – त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देव की फिर किरकिरी, बोले- टैगोर ने वापस कर दिया था नोबेल पुरस्कार

त्रिपुरा के सीएम बिप्लब देब ने एक बार फिर से ऐसा बयान दिया है, जिससे वह लोगों के निशान पर आ गए हैं। उदयपुर में रबिंद्रनाथ टैगोर की जयंती के मौके पर आयोजित हुए एक कार्यक्रम में बिप्लब देब ने कहा कि रबिंद्रनाथ टैगोर ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ विरोध जताते हुए अपना नोबेल पुरस्कार वापस कर दिया था। बता दें कि रबिंद्रनाथ टैगोर को 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार दिया गया था, लेकिन बिप्लब देब के इस बयान पर लोगों ने उनकी इतिहास की ज्ञान पर सवाल उठा दिए हैं। दरअसल गुरु रबिंद्रनाथ टैगोर ने जलियावांला बाग नरसंहार के विरोध में साल 1919 में ब्रिटेन सरकार से मिली नाइटहुड की उपाधि वापस की थी, जो कि उन्हें साल 1915 में दी गई थी। लेकिन बिप्लब देब ने दो एतिहासिक घटनाओं को मिक्स कर दिया है, जिससे बिप्बल देब की लोग खूब आलोचना कर रहे हैं।

सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर लोग बिप्लब देब के इस बयान का खूब मजाक उड़ा रहे हैं। बता दें कि ऐसा पहली बार नहीं है कि बिप्लब देब अपने बयानों को लेकर चर्चा में आए हों। इससे पहले बिप्लब देब ने एक बयान में कहा था कि इंटरनेट और सैटेलाइट कम्यूनिकेशन महाभारत काल में भी मौजूद था। साथ ही बिप्लब देब ने पूर्व मिस वर्ल्ड डायना हेडन के विश्व सुंदरी के खिताब जीतने पर भी सवाल खड़े किए थे और डायना हेडन की खूबसूरती को लेकर अनुचित टिप्पणी की थी। हालांकि बाद में बवाल होता देख बिप्लब देब ने अपने बयान पर माफी मांग ली थी। साथ ही हाल ही में बिप्लब देब ने यह कहकर भी खूब चर्चा बटोरी थी कि मैकेनिकल इंजीनियरों को सिविल सर्विस में नहीं जाना चाहिए, बल्कि इसके लिए सिविल इंजीनियर ज्यादा उपयुक्त हैं।

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बीती 29 अप्रैल को भी बिप्लब देब युवाओं को पान की दुकान खोलने की हिदायत दे चुके हैं। बिप्लब देब ने कहा था कि युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए राजनैतिक पार्टियों के पीछे नहीं भागना चाहिए। अगर ये युवा एक पान की दुकान खोल लें तो भी लाखों रुपए कमा सकते हैं। गौरतलब है कि पार्टी नेतृत्व भी बिप्लब देब के इन बयानों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुका है, लेकिन बिप्लब देब की बयानबाजी चालू है।

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