yogi adityanath government cabinet reshuffle soon dalit backward leaders may gets oppertunity – खराब रिपोर्ट कार्ड वाले एक दर्जन मंत्रियों की योगी सरकार से हो सकती है छुट्टी, जल्द होगा मंत्रिमंडल का विस्तार

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार जल्द ही अपने मंत्रीमंडल में फेरबदल कर सकती है। मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स के अनुसार, यह फेरबदल जून के पहले हफ्ते में संभव है। माना जा रहा है कि यह फेरबदल कुछ मंत्रियों के खराब रिपोर्ट कार्ड और 2019 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। इस फेरबदल के तहत करीब 1 दर्जन मंत्रियों की छुट्टी हो सकती है। बताया जा रहा है कि मंत्रियों के एक साल के कामकाज की समीक्षा की जाएगी और फिर उसके आधार पर मंत्रियों को मंत्रीमंडल से हटाया जाएगा, या फिर उनके विभागों में बदलाव किया जा सकता है। खबर है कि मंत्रीमंडल से हटाकर कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

जातीय, सामाजिक समीकरण साधने की होगी कोशिश: बता दें कि योगी सरकार के कई मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, वहीं कई मंत्रियों के कामकाज से प्रदेश और केन्द्रीय नेतृत्व खुश नहीं है। ऐसे में सरकार आगामी मंत्रीमंडल में फेरबदल कर अपनी छवि सुधारने की कोशिश कर सकती है। खबर है कि मंत्रीमंडल के पुनर्गठन में नए बने एमएलसी और भाजपा के केन्द्रीय संगठन में अहम भूमिका निभाने वाले उत्तर प्रदेश के नेताओं को मंत्रीमंडल में जगह दी जा सकती है। सूत्रों के अनुसार, सरकार आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर जातीय और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए मंत्रीमंडल में फेरबदल करने जा रही है। मंत्रीमंडल विस्तार के साथ ही निगमों, आयोग और विभिन्न बोर्ड के अध्यक्ष और सदस्यों के खाली पद भी जल्द भरे जाएंगे। इन नामित पदों की संख्या करीब 350 के आसपास बतायी जा रही है। खबर है कि राज्यमंत्री का दर्जा प्राप्त इन नामित पदों पर नियुक्ति के लिए सरकार ने एक फार्मूला तय किया है, जिसके तहत पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों को 50 फीसदी पद और दलितों और अति-दलितों को 15 फीसदी पदों पर नामित किया जा सकता है। वहीं बचे हुए 35 फीसदी पदों पर अगड़ी जातियों को प्राथमिकता दी जाने की संभावना है।

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सपा-बसपा की काट खोजने की कोशिश: फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्रियों की संख्या 47 है, जिसे पुनर्गठन के बाद बढ़ाकर 60 किए जाने की संभावना है। सरकार में अभी कोई दलित चेहरा नहीं है, ऐसे में संभावना है कि किसी दलित चेहरे को मंत्रीमंडल में जगह दी जा सकती है। इसके अलावा यादव चेहरे को भी मंत्रीमंडल में शामिल किया जा सकता है। बता दें कि साल 2017 के चुनावों में भाजपा ने 11 यादवों को टिकट दिया था, जिसमें से 9 ने जीत दर्ज की थी। एक यादव नेता गिरीश चंद यादव फिलहाल मंत्रीमंडल में हैं और यह संख्या बढ़ायी जा सकती है। वहीं अच्छा प्रदर्शन करने वाले कई राज्यमंत्रियों को प्रमोट कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया जा सकता है। दलितों और यादवो को मंत्री बनाकर यूपी सरकार सपा और बसपा के गठबंधन की काट खोजने की कोशिश कर रही है।

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