पहलवानों को लगानी होगी लंबी कूद, आसान नहीं एशियाई खेलों की चुनौती – Preparations of Indian wrestlers among wrestlers from more than 30 countries in Asian Games

मनोज जोशी

पिछले दिनों गोल्डकोस्ट के मैट पर उतरने वाले हर भारतीय पहलवान के गले में पदक था, जिनमें पांच पहलवानों को पोडियम पर सबसे ऊपर खड़े होने का अवसर मिला। भारत का यह प्रदर्शन 23 देशों के पहलवानों के बीच था। वह बात अलग है कि इनमें से 16 देश ऐसे थे, जिन्होंने इस प्रतियोगिता में पांच या इससे भी कम पहलवान उतारे थे। अब भारतीय पहलवानों की आगे की चुनौती आसान नहीं है। उन्हें अगस्त में जकार्ता (इंडोनेशिया) में एशियाई खेलों में उतरना है, जहां 30 से ज्यादा देशों के पहलवान लेंगे। गोल्डकोस्ट में भारत को कनाडा और नाइजीरिया से ही टक्कर मिल पाई। वहीं एशियाई खेलों में भारतीय पहलवानों को ईरान, मंगोलिया, जापान, चीन, दोनों कोरिया और पांच पूर्व सोवियत देशों के पहलवानों से जूझना होगा। इतना ही नहीं, इस बार पुरुषों में जापान के युकी ताकाहाशी और ईरान के हसन याजदानी जैसे वर्ल्ड चैंपियनशिप के कई पदक विजेता भी कड़ी चुनौती रखेंगे। बहरहाल राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले सभी खिलाड़ियों को एशियाई खेलों के ट्रायल में उतरना होगा।

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57 किलो में इस बार वर्ल्ड चैंपियन जापान के युकी ताकाहाशी, मौजूदा एशियाई चैंपियन उत्तर कोरिया के कांग कुम सोंग और वर्ल्ड चैंपियनशिप के ब्रॉञ्ज मेडलिस्ट मंगोलिया के एरडेनबात बेखबेयार कड़ी चुनौती पेश करने वाले हैं। राष्ट्रमंडल खेलों में गोल्ड जीतने वाले राहुल आवारे की बेखबेयार से कुश्तियां खासी चर्चित रही हैं। मंगोलिया इस वजन में पिछले साल की एशियाई चैंपियनशिप के सिल्वर मेडलिस्ट जंदानबुदिन जानाबाजार को उतार सकता है। 65 किलो में राष्ट्रमंडल खेलों में बजरंग से काफी उम्मीदें हैं। वह इन दिनों जिन योगेश्वर दत्त की एकेडमी में कड़ा अभ्यास कर रहे हैं, उन्हीं योगेश्वर ने पिछले एशियाई खेलों में भारत को 28 साल बाद इन खेलों का स्वर्ण पदक दिलाया था। बजरंग को योगेश्वर की कामयाबी दोहराने के लिए पहले ट्रायल में अव्वल आना होगा और फिर तीन बार के एशियाई चैंपियन कजाकिस्तान के दौलेत नियाजबेकोव, एशियाई चैंपियनशिप के रनर्स अप जापान के दाइची ताकातानी और पूर्व एशियाई चैंपियन ईरान के मेईसम नासिरी की चुनौती तोड़नी होगी। नासिरी के साथ बजरंग की कुश्तियां काफी चर्चित रही हैं। वह उन्हें हरा चुके हैं और उनसे हार भी चुके हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों में तीन स्वर्ण जीतने वाले इकलौते भारतीय सुशील कुमार अगर फिट रहते हैं तो 74 किलो में उन्हें ट्रायल में अव्वल रहने के बाद रियो ओलिपिंक के पदक विजेता मंगोलिया के गैनजोरिग, पिछले चैंपियन उज्बेकिस्तान के बेकजोद अब्दुराखामोनोव और एशियाई चैंपियन किर्गिस्तान के एवलोएव से कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है। 86 किलो में राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक विजेता सोमवीर के वजन में ओलिपिंक और वर्ल्ड चैंपियन ईरान के हसन याजदानी हैं। देखना दिलचस्प होगा कि मंगोलिया इस वजन में वर्ल्ड चैंपियनशिप के पूर्व रजत पदक विजेता मंगोलिया के पुरविजे उनूरबात को उतारता है या एशियाई चैंपियनशिप के रजत विजेता ओरगोदोलिन को। इस वजन में कजाकिस्तान, चीन और उज्बेकिस्तान के पहलवान भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई उपलब्धियां हासिल कर चुके हैं।

97 किलो वजन में जहां दो बार के एशियाई चैंपियन उज्बेकिस्तान के मैगोमद इब्रागिमोव सहित ईरान, साउथ कोरिया, जापान और किर्गिस्तान के पहलवानों के रूप में कई आला दर्जे के पहलवान हैं। इस वर्ग में मौसम खत्री ने पिछले दिनों रजत पदक जीता था। वहीं सुपर हैवीवेट वर्ग में एशियाई चैंपियन उज्बेकिस्तान के डेविट मोजमानाशिवली की चुनौती सबसे मज़बूत है जो पहले जॉर्जिया की ओर से यूरोपीय चैंपियनशिप और लंदन ओलिपिंक में भाग ले चुके हैं। इस वजन में ईरान, मंगोलिया, जापान और कतर के पहलवानों की चुनौती भी आसान नहीं है। सुमित ने इस वजन में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीता था।

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