facts of mahendra singh dhoni performance – धुरंधर धोनी: महेंद्र में अब भी ‘सिंह’ वाली बात

संदीप भूषण

आलोचकों ने जब भी कानाफूसी शुरू की, इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने जबरदस्त वापसी से सबको भौचक कर दिया। जी हां, बात कर रहे हैं भारत के सफलतम कप्तानों की सूची में शामिल रांची के शेर महेंद्र सिंह धोनी की। लगभग 37 साल के इस धुआंधार बल्लेबाज ने भारत को हर वह ट्रॉफी दिलाई जिसकी चाहत में देशवासियों ने कई साल गुजार दिए। हालांकि जब से उन्होंने भारतीय टीम की कप्तानी को अलविदा कहा तब से यह चर्चा जोरों पर है कि क्या धोनी 2019 विश्व कप टीम के ग्यारह खिलाड़ियों में शामिल होंगे? समय-समय पर खराब फॉर्म ने इस सवाल को और हवा दी लेकिन आइपीएल के मौजूदा सत्र में उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि अभी भी धोनी धुरंधर हैं। वे जितनी सहजता से गेंद को सीमा पार पहुंचा रहे हैं, उतनी ही तेजी से स्टंपिंग भी कर रहे हैं। आज निगाह डालते हैं उन तथ्यों पर जो धोनी को 2019 विश्व कप टीम के एकादश का प्रबल दावेदार बनाते हैं।

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धोनी ने जब टैस्ट को अलविदा कहा

शुरू करते हैं उस लम्हें से जब धोनी ने टैस्ट क्रिकेट को अलविदा कहा था। 30 दिसंबर 2014 की तारीख भारतीय क्रिकेट के लिए एक बड़ा नुकसान लेकर आई। सुनते-सुनाते बात यही थी कि धोनी में शायद अब वह बात नहीं। उनकी फिटनेस पर भी सवाल खड़े हुए लेकिन वे कहां रुकने वाले। 2015 में उन्होंने 20 मैच की 17 पारियों में 45.71 की औसत और 86.84 के स्ट्राइक रेट से 640 रन अपने खाते में जोड़े। इस दौरान उनका उच्चतम स्कोर 92 (नाबाद) रहा। यह एक नमूना था उनके लिए जो यह मान रहे थे कि धोनी थक चुके हैं।

2016 रहा खराब, 2017 में किया कमाल

2016 के शुरू से ही धोनी के बल्ले ने रन उगलना बंद कर दिया। आलोचक तो पहले से ही ताक में थे, पर प्रशंसक भी यही मानने लगे कि धोनी को एकदिवसीय क्रिकेट से भी संन्यास ले लेना चाहिए। ऐसा हो भी क्यों नहीं, उस पूरे साल धोनी ने 13 मैच की 10 पारियों में 27.80 की औसत से महज 278 रन ही बनाए। उनके नाम इस साल सिर्फ एक अर्धशतकीय पारी रही।

हालांकि एक कहावत है कि हर रात की सुबह होती है। धोनी के जीवन में भी 2017 का साल सुबह बनकर आया और उन्होंने 29 मैच की 22 पारियों में 60.62 की औसत से 788 रन बनाए। साथ ही स्टंपिंग में भी 13 शिकार धोनी ने किए और 26 कैच लिए। अब क्या था, आलोचक भी यह मानने लगे कि यह वही धोनी हैं जो 30 साल में थे।

विकेट के पीछे गजब की फुर्ती

एक तरफ धोनी का बल्ला रन उगल रहा था तो दूसरी तरफ भारतीय टीम में विकेटकीपिंग के मामले में धोनी का कोई सानी नहीं। कई विकल्प उनके सामने खड़े किए गए लेकिन सब फेल रहे।
उम्र के इस पड़ाव में भी धोनी की फुर्ती के कायल भारतीय दिग्गज ही नहीं बल्कि विदेशी भी हो गए। वे यह मानने लगे कि ऐसा विकेटकीपर बल्लेबाज भारत को खोजने काफी समय लगेगा। उन्होंने अब तक विकेट के पीछे 297 बल्लेबाजों को लपका है और 107 की गिल्लियां उड़ाई हैं।

आइपीएल 2018 में धोनी पुराने रंग में लौटे

आइपीएल की नीलामी से पहले ही यह साफ हो गया था कि चेन्नई सुपरकिंग्स की वापसी के साथ ही धोनी एक बार फिर उनके कप्तान होंगे। फ्रेंचाइजी का उन पर अटल विश्वास यह साबित करता है कि धोनी में अब भी काफी क्रिकेट और कप्तान बाकी है। सत्र के शुरुआत से ही धोनी पुराने रंग में दिखे। वही तेजी से रन बनाने की ललक और संयम के साथ टीम को जिताने का जज्बा। 12 मैचों में 413 रन स्कोर बोर्ड पर टांगने वाले धोनी के लिए अब यह कहना कि थक चुके हैं, शायद आलोचकों के लिए भी काफी मुश्किल है।

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