Government likely to withdraw tax notice on free banking services- ग्राहकों के लिए राहत, फ्री बैकिंग सेवाओं पर टैक्स का आदेश हो सकता है वापस

वित्त मंत्राल के हस्तक्षेप के बाद कर विभाग बैंकों को जारी वह नोटिस वापस ले सकता है, जिसमें बैंकों से ग्राहकों को प्रदान की गई मुफ्त सेवाओं पर सर्विस टैक्स का भुगतान करने को कहा गया था। बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई वित्त मंत्रालय की हस्तक्षेप के बाद होने वाली है।वित्त सेवा विभाग ने बैंकों का पक्ष पेश किया है, जिसमें कहा गया है कि रेवेन्यू डिपार्टमेंट को बैंकों ने टैक्स का विरोध किया है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हमने रेवेन्यू डिपार्टमेंट से बात की है, उनसे इस मामले को आगे न बढ़ाने का अनुरोध किया है।

वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय के कुछ अधिकारियों ने निजी बैंकों आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और ऐक्सिस और पब्लिक सेक्टर के बैंकों मसलन एसबीआई आदि को नोटिस जारी कर सर्विस टैक्स जुर्माना सहित भरने को कहा था। इस नोटिस में जुलाई 2012 से जून 2017 के बीच बकाए टैक्स के भुगतान का निर्देश दिया गया था। वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक महानिदेशालय की ओर से अन्य बैंकों को भी नोटिस जारी करने की तैयारी चल रही थी, इस बीच वित्त मंत्रालय ने हस्तक्षेप कर कार्रवाई से रोक दिया।

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नोटिस में मिनिमम बैलेंस, एटीएम से निकारी, चेक बुक्स से लेन-देन, एकाउंट स्टेटमेंट, इंटरनेट बैकिंग, डेबिट कार्ड्स और पिन चेंज आदि फ्री सुविधाओं पर सर्विस टैक्स की मांग की गई थी। इंडियन बैंक्स एसोसिएशन ने एक कंसल्टेंट के जरिए सभी बैंकों की तरफ से पक्ष रखने की तैयारी की है।

पिछले साल जीएसटी खुफिया निदेशालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन(ईपीएफओ) को नोटिस जारी किया था। जिसमें उन्हें 2016-17 के बीच पीएफ विभाग के रिकॉर्ड की जांच कराने को कहा गया था और सेवा कर के भुगतान पर संभावित डिफॉल्ट पर जवाब देने को कहा था।

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