IDBI Fraud CBI booked Syndicate Bank CEO former Aircel promoter several others – IDBI फ्रॉड: एयरसेल के पूर्व प्रमोटर पर सीबीआई का शिकंजा, सिंडीकेट और इंडियन बैंक के सीईओ के खिलाफ भी केस दर्ज

IDBI धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने सिंडीकेट बैंक के सीईओ, एयरसेल के पूर्व प्रमोटर और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। अधिकारियों ने गुरुवार (26 अप्रैल) को इसकी जानकारी। उन्होंने बताया कि एयरसेल के पूव्र प्रमोटर सी. शिवशंकरन की दो कंपनियों के साथ सिंडीकेट बैंक और इंडियन बैंक के प्रबंध निदेशकों और सीईओ के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इन सब पर 600 करोड़ रुपये के लोन को कथित तौर पर डिफॉल्ट कराने का आरोप है। यह लोन IDBI से ली गई थी। शिवशंकरन की कंपनियों ने फरवरी 2014 में 530 करोड़ रुपये का लोन लिया था। नॉन परफॉर्मिंग एसेट घोषित होने तक यह राशि बढ़कर 600 करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। IDBI के पूर्व मुख्य प्रबंध निदेशक और अब इंडियन बैंक के एमडी व सीईओ किशोर खरट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में IDBI के पूर्व डिप्टी एमडी और अब सिंडीकेट बैंक के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेलविन रेगो के खिलाफ भी केस दर्ज किया गया है।

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आरोपियों के 50 ठिकानों पर मारे गए थे छापे: जांच एजेंसी ने IDBI फ्रॉड मामले में आरोपियों के 50 ठिकानों पर छापे मारे थे। सीबीआई ने IDBI के कई वरिष्ठ अधिकारियों के आवास पर छापा मारकर महत्वपूर्ण सबूत जुटाए थे। इसके बाद इन तीनों के खिलाफ केस दर्ज किया गया। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज करने से पहले दिल्ली, फरीदाबाद, मुंबई, बेंगलुरु, बेलगाम, हैदराबाद, जयपुर और पुणे में आरोपियों के ठिकानों को खंगाला गया था। शिवशंकरन, किशोर खरट और मेलविन रेगो पर आपराधिक षडयंत्र रचने, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। इसके अलावा ब्रिटिश वर्जिन स्थित एक्सेल सनसाइन लिमिटेड के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि IDBI के 15 वरिष्ठ अधिकारियों (सेवानिवृत्त भी शामिल) और विभिन्न कंपनियों के 24 अन्य अधिकारियों को भी नामजद किया गया है। मालूम हो कि पंजाब नेशनल बैंक में हजारों करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा का मामला सामने आने के बाद कई बैंकों में फर्जी तरीके से लोन लेने के मामले सामने आ चुके हैं। आईडीबीआई के आंध्र प्रदेश स्थित शाखा में भी गलत तरीके से कर्ज देने का मामला सामने आया था। आरोपी ने मत्स्य पालन के नाम पर लोन लिया था। अधिकारियों ने मौके पर जाकर छानबीन किए बगैर ही लोन जारी कर दिया था। बाद में पता चला कि जिस तालाब के लिए कर्ज लिया गया था, वह सिर्फ कागजों पर ही है।

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