RCom reduces employee base by 52,000 to 3,400: know here why anil ambani’s company fired 48600 employee – अन‍िल अंबानी की आरकॉम से गई 48600 कर्मचार‍ियों की नौकरी, बचे केवल 3400

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस कम्युनिकेशंस से 48600 कर्मचारियों की नौकरी जा चुकी है। अब कंपनी में काम करने के लिए केवल 3,400 कर्मचारी ही बचे हैं। कंपनी में कुल 52,000 कर्मचारी थे जिनमें से 94 फीसदी कर्मचारियों की नौकरी चली गई है। कंपनी का वायरलेस ऑपरेशनल बिजनेस हायपर कॉम्पटीशन, बड़ी जरूरतों और वित्तीय तनाव से पूरी तरह से बदल गया है। एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया और रिलायंस जियो के सस्ते प्लान्स के वॉर में वायरलेस सेक्टर की सभी महत्वपूर्ण फाइनेंशियल मेट्रिक को डाउन कर दिया है। ट्राई द्वारा जारी की गई एक नई रिपोर्ट में साफ है कि वायरलेस बिजनेस बड़ी तेजी से नीचे जा रहा है। इसमें सालान 21% राजस्व की गिरावट देखी जा रही है।

सालाना आधार पर कुल मार्केट केवल 26,000 करोड़ रुपए तक का रह गया है। आरकॉम ने कहा कि उसने खुद को एक B2B प्लेयर में बदल दिया है और भारत में 35,000 से अधिक B2B ग्राहकों के साथ स्थिर उद्यम संचार सेवाओं और भारत में तेजी से बढ़ती डेटा सेंटर की जगह पर पूरी तरह फोकस है। इस साल जनवरी में कंपनी ने अपना मोबाइल सेवा कारोबार बंद कर दिया और ‘बी2बी’ (बिजनस-टू-बिजनस) स्तर पर दूरसंचार सेवाएं दे रही है। कंपनी ने कहा कि बी2बी इकाई उद्योग में मौजूदा प्राइस वॉर से बचा हुआ है।

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आरकॉम ने यह भी कहा, “एयरटेल, आइडिया, वोडाफोन और क्षेत्र में आयी नई कंपनी रिलायंस जियो के बीच शुल्क में कटौती की होड़ से वायरलेस क्षेत्र में वित्तीय लेखाजोखा प्रभावित हुआ है। अब जब 18 जनवरी को आरकॉम बी2सी (बिजनस टू कंज्यूमर) सेवा से बाहर हो गई है, ऐसे में कंपनी पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।” एक समय रिलांयस के 12 करोड़ ग्राहक थे, लेकिन अब आरकॉम के पास दुनियाभर में सिर्फ 35,300 बीटूबी ग्राहक है, जिसमें से कंपनी के सबमरीन केबल ग्राहक भी शामिल है। कंपनी के सबमरीन केबल के पूरे विश्व में कुल ग्राहक 300 ग्राहक हैं।

रिलायंस जियो, ऐयरटेल, आइडिया और वोडाफोन जैसी बड़ी कंपनियों में प्राइस वार छिड़ा हुआ है। ये कंपनियां लगातार अपने यूजर्स के लिए सस्ते और बेहतरीन प्लान पेश कर रही हैं। इस तरह कंपनियों के इस प्राइस वॉर से लोगों को तो फायदा हो रहा है, लेकिन इस प्राइस वॉर के चक्कर में एयरसेल और रिलायंस कम्यूनिकेशन जैसी कंपनियों को मोबाइल नेटवर्क के मार्केट से अपने हाथ खींचने पड़े।

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