मध्य इंडोनेशिया में 7.5 तीव्रता वाले बेहद शक्तिशाली भूकंप के झटके

जकार्ता: इंडोनेशिया के सुलावेसी द्वीप में शुक्रवार को 7.5 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद देश की आपदा राहत एजेंसी ने सुनामी की चेतावनी जारी की, हालांकि बाद में चेतावनी वापस ले ली गई. किसी के हताहत होने की फिलहाल कोई खबर नहीं है. अमेरिकी भूगर्भ सर्वे ने बताया कि मध्य सुलावेसी के डोंग्गाला कस्बे में दस किलोमीटर की गहराई पर तेज भूकंप आया. इसके कुछ घंटे पहले इसी क्षेत्र में कम तीव्रता का भूकंप आया था जिसमें कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई.

इस भूकंप की तीव्रता इस साल की शुरुआत में लोमबोक द्वीप में आए भूकंप से कहीं अधिक थी जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए थे. शु्क्रवार को आए भूकंप का केंद्र पालू शहर से 78 किलोमीटर की दूरी पर था. यह मध्य सुलावेसी प्रांत की राजधानी है. भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसका असर यहां से करीब 900 किलोमीटर दूर दक्षिण में द्वीप के सबसे बड़े शहर माकासर तक महसूस किया गया.

भूकंप के दौरान सतर्कता से जुड़ी कुछ जरूरी बातें:

– अगर आप किसी इमारत के अंदर हैं तो फर्श पर बैठ जाएं और किसी मजबूत फर्नीचर के नीचे चले जाएं. यदि कोई मेज या ऐसा फर्नीचर न हो तो अपने चेहरे और सर को हाथों से ढंक लें और कमरे के किसी कोने में दुबककर बैठ जाएं.

-अगर आप इमारत से बाहर हैं तो इमारत, पेड़, खंभे और तारों से दूर हट जाएं.

– अगर आप किसी वाहन में सफर कर रहे हैं तो जितनी जल्दी हो सके वाहन रोक दें और वाहन के अंदर ही बैठे रहें.

-अगर आप मलबे के ढेर में दब गए हैं तो माचिस कभी न जलाएं, न तो हिलें और न ही किसी चीज को धक्का दें.

-मलबे में दबे होने की स्थिति में किसी पाइप या दीवार पर हल्के-हल्के थपथपाएं, जिससे कि बचावकर्मी आपकी स्थिति समझ सकें. अगर आपके पास कोई सीटी हो तो उसे बजाएं.

कोई चारा न होने की स्थिति में ही शोर मचाएं. शोर मचाने से आपकी सांसों में दमघोंटू धूल और गर्द जा सकती है.

– अपने घर में हमेशा आपदा राहत किट तैयार रखें.

भूकंप आता कैसे है?

पृथ्वी की बाहरी सतह सात प्रमुख और कई छोटी पट्टियों में बंटी होती है. 50 से 100 किलोमीटर तक की मोटाई की ये परतें लगातार घूमती रहती हैं. इसके नीचे तरल पदार्थ लावा होता है और ये परतें (प्लेटें) इसी लावे पर तैरती रहती हैं और इनके टकराने से ऊर्जा निकलती है, जिसे भूकंप कहते हैं.

भारतीय उपमहाद्वीप को भूकंप के खतरे के लिहाज से सीसमिक जोन 2,3,4,5 जोन में बांटा गया है. पांचवा जोन सबसे ज्यादा खतरे वाला माना जाता है. पश्चिमी और केंद्रीय हिमालय क्षेत्र से जुड़े कश्मीर, पूर्वोत्तर और कच्छ का रण इस क्षेत्र में आते हैं.

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