सैकड़ों साल पहले बनी थी सिल्क रोड, इस वजह से पड़ा ये नाम

The Silk Road: इतिहास में कुछ नाम ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान सदियों पुरानी होती है. यूं तो दुनिया में करोड़ों सड़कें हैं, जिनमें हज़ारों सड़कें ऐसी हैं जो ऐतिहासिक हैं, लेकिन जो नाम, जो पहचान, जो शोहरत, जो प्रसिद्धि सिल्क रोड को मिली, दुनिया में किसी रोड को ये आन-बान-शान, ये तमग़ा नहीं मिला. दरअसल, ये वो सड़क थी जो ईस्ट को वेस्ट से जोड़ थी. ये सड़क सिर्फ सड़क नहीं थी, बल्कि सांस्कृति आदान प्रदान का भी मार्ग था और ये काम इस सड़क से सदियों तक होता रहा.

क्या आप जानते हैं कि इसका नाम सिल्क रोड क्यों पड़ा और इसकी अवधारणा कहां से आई? ऐसा नहीं है कि सिल्क रोड नाम है तो इन मार्गों से सिर्फ सिल्क की ट्रेडिंग होती थी. बल्कि ये रोड ये चीन को अनेक भागों से जोड़ता था और विविध प्रकार की चीजों का इस मार्ग के जरिए व्यापार किया जाता था.

आज से सैकड़ों साल पहले सिल्क रोड का निर्माण किया गया था और इसके जरिए दुनिया के अनेक देश आपस में जुड़े हुए थे. ऐसा भी नहीं है कि सिल्क रोड के तहत सिर्फ थल मार्ग आते थे. इस कॉरिडोर के जरिए जल और थल दोनों ही मार्गों के जरिए ट्रांसपोटेशन की व्यवस्था थी और यह ईस्ट एशिया, साउथ ईस्ट एशिया, ईस्ट अफ्रीका, वेस्ट अफ्रीका और साउदर्न यूरोप तक व्यापार मार्ग को बढ़ाता था.

सिल्क रोड का स्वर्णिम काल?
चीन के दूसरे शासक हान वंश (207 ईसा पूर्व–220 ईस्वी) के थे. सिल्क रोड की शुरूआत और विकास इनके राज्यकाल में सबसे अधिक हुआ. ये भी कह सकते हैं कि सिल्क रोड का स्वर्णिम काल हान वंश के शासनाकाल में ही रहा. सिल्क रोड के माध्यम से उस समय न सिर्फ व्यापार और संस्कृति का आदान- प्रदान किया जाता था बल्कि यह सेनाओं के एक जगह से दूसरे जगह जाने का भी सबसे सुगम मार्ग था. इसी काल में द ग्रेट वॉल ऑफ चाइना का निर्माण हुआ.

चीन और भारत के भी शक्तिशाली राज्यवंश सेंट्रल एशिया में अपने सैनिक भेजकर वहां के विद्रोगी शासकों को अपने राज्य में मिलने पर मजबूर कर देते थे. भारत की तरफ से अंतिम फौज की टुकड़ी सिल्क रोड के जरिए तब भेजी गई थी जिस समय हान वंश के शासकों के बुरे दिन चल रहे थे. उन्हें बचाने के लिए भारत के शासकों ने 1 सेंचुरी एडी में सैनिकों की टुकड़ी भेजी थी.

सिल्क रोड के जरिए चीन के शासकों ने 618-908 ईस्वी तक मजबूत रूप से सेंट्रल एशिया पर शासन किया था. सिल्क रोड ने उस समय से ही चीन, कोरिया, जापान, इंडिया, ईरान, अफगानिस्तान, यूरोप और अरेबिया में सभ्यता के विकास में अहम भूमिका निभाई है. इस कॉरिडोर के माध्यम से धर्म, तकनीक, संस्कृति और समस्याओं के रूप में बीमारियों का भी एक देश से दूसरे देश में जाना हुआ करता था.

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