Pakistan to sideline major power project under China-Pak Economic Corridor

इस्लामाबाद: पाकिस्तान सरकार ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत एक बड़ी बिजली परियोजना को रद्द करने का फैसला किया है, जिसे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के शासन ने आगे बढ़ाया था. मीडिया ने सोमवार को यह जानकारी दी. पाकिस्तानी मीडिया ‘द डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक पर्दे के पीछे चल रहे सरकारी अधिकारियों के साथ चर्चा से संकेत मिल रहे हैं कि पाकिस्तान ने आधिकारिक तौर पर चीन को सूचित कर दिया है कि उसे 1,320 मेगावाट वाले रहीम यार खान बिजली परियोजना में कोई दिलचस्पी नहीं है क्योंकि अगले कुछ सालों के लिए पर्याप्त विद्युत क्षमता पर पहले से ही काम हो रहा है.

पाकिस्तान ने चीन से सीपीईसी सूची से परियोजना को औपचारिक रूप से हटाने का अनुरोध किया है. एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “पिछले महीने हुई आठवीं संयुक्त समन्वय समिति (जेसीसी) की बैठक के दौरान, योजना और विकास मंत्री मखदूम खुसरो बख्तियार के नेतृत्व में एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने सीपीईसी सूची से रहीमयार खान आयातित ईंधन बिजली संयंत्र (1,320 मेगावाट) को हटाने का प्रस्ताव दिया था.”

परियोजना को मूल रूप से पूर्व मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली पंजाब सरकार के काएद-ए-आजम थर्मल कंपनी द्वारा आयातित कोयला आधारित संयंत्र के रूप में आगे बढ़ाया गया था. एक प्रमुख व्यवसायी ने इस परियोजना का प्रस्ताव दिया था और उसके इस परियोजना के प्रमुख प्रायोजकों में से एक होने की उम्मीद थी. आपको बता दें कि ये चीन के लिए किसी झटके से कम नहीं है क्योंकि उसके सीपीईसी के तहत पाक में निवेश का एक बड़ा हिस्सा बिजली परियोजना से जुड़ा था.

क्या है सीपीईसी
बेल्ट एंड रोड (बीआरआई) चीन के इतिहास की सबसे महत्वकांक्षी योजना है. इसके तहत ‘ड्रैगन’ विश्व भर में अपना प्रभुत्व कायम करना चाहता है. पश्चिमी जगत की मीडिया के अनुसार चीन इस परियोजना में खरबों रुपयों का निवेश दो वजहों से कर रहा है. एक तो विश्व भर में अपना प्रभुत्व कायम करने के अलावा चीन इसके सहारे अपनी धीमी पड़ती अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकना चाहता है. वहीं दूसरा, उनका ये भी मानना है कि पहले से विश्वभर में हो रहे चीनी निवेश और बढ़ते प्रभुत्व को बीआरआई के रूप में बस एक नया नाम दे दिया गया है.

भारत इस योजना का प्रखर विरोधी रहा है और इसके विरोध के पीछे सबसे बड़ी वजह चीन पाकिस्तान कॉरिडोर (सीपीईसी) रही है. दरअसल, इसी योजना के तहत पाकिस्तान में होने वाले चीनी निवेश को सीपीईसी का नाम दिया गया है. चीन ने जानकारी साझा करते हुए विश्व को बताया कि इसके तहत पाकिस्तान में 46 बिलियन डॉलर (लगभग 56,81,00,00,00,000 पाकिस्तानी रुपए) का निवेश किया गया है.

वहीं, भारत ने इस बात पर भी विरोध जताया है कि वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर- इस योजना क पुराना नाम) को लेकर भारत का कोई विरोध नहीं है, लेकिन इससे भारत को ख़तरा है क्योंकि पाकिस्तान में इसके तहत जो सड़क बनाई जानी है वो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से होकर गुजरती है. भारत की इस चिंता पर चीन का यही रुख रहा है उन्होंने इस मामले पर अपनी पलकें भी नहीं झपकाई हैं.

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