PM Modi Putin Visits Russia For Two Days Eastern Economic Forum Indian Economy Investment

मास्को: रूस के दो दिनी दौरे पर रवाना हो रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी इस दो दिन की यात्रा में भारतीय अर्थव्यवस्था की ताकत के लिए कुछ नए नुस्खे तलाशने की कोशिश करेंगे. रूस के व्लादिवोस्तक में हो रही ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम बैठक में बतौर खास मेहमान शरीक होने पहुंच रहे भारतीय प्रधानमंत्री की कोशिश जहां नए निवेश अवसर तलाशने की होगी, वहीं भारतीय हुनर के लिए नया बाजार खोजने का भी प्रयास होगा.

भारत के पुराने और भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार रूस के घर जा रहे पीएम मोदी का दौरा दो दिन का है तो मकसद भी दोहरा है. ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की बैठक में विशेष अतिथि के तौर पर शिरकत के साथ ही पीएम मोदी रूसी राष्ट्रपति के साथ 20वीं सालाना शिखर बैठक करेंगे. रवानगी से पहले मंगलवार को जारी बयान में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं अपने मित्र राष्ट्रपति पुतिन के साथ हमारी द्विपक्षीय साझेदारी के संपूर्ण सरगम के साथ-साथ पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए उत्सुक हूं. मैं पूर्वी आर्थिक मंच में शामिल होने वाले अन्य वैश्विक नेताओं से मिलने, और इसमें भाग लेने वाले भारतीय उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करने के लिए भी उत्सुक हूं.

रूसी शिप बिल्डिंग यार्ड देखने जाएंगे पीएम मोदी

व्लादिवोस्तक पहुंचने के बाद मोदी बुधवार दोपहर मेजबान पुतिन एक साथ रूसी शिप बिल्डिंग यार्ड देखने जाएंगे. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक दोनों नेता एक साथ आइस ब्रेकर पोत पर भी नजर आएंगे. आइस ब्रेकर पोत पर पीएम मोदी की मौजूदगी अच्छी तस्वीर ही नहीं बल्कि आर्कटिक के तेल-गैस खजाने तक पहुंचने की भारतीय इच्छा की भी निशानी है. रूस की मदद से भारत आर्कटिक के तेल-गैस खोज व खनन में शरीक होना चाहता है.

विदेश सचिव विजय गोखले के मुताबिक पीएम मोदी की 36 घंटे की रूस यात्रा छोटी मगर सक्रिय संपर्क वाली है. इस दौरान द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुलाकातों में आर्थिक व रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने पर जोर होगा. गोखले के मुताबिक, पीएम मोदी ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम को 5 सितंबर को संबोधित करेंगे. साथ ही भारत-रूस बिजनेस फोरम में भी शरीक होंगे. इस फोरम के लिए 50 सदस्यीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल भारत से रूस गया है.

ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम में विशेष आमंत्रण पर जा रहे हैं पीएम

रूसी राष्ट्रपति के निमंत्रण पर पीएम मोदी विशेष आमंत्रित के तौर पर ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम(ईईएफ) में शामिल हो रहे हैं. इसके लिए राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी को न्यौता 5 अक्टूबर 2018 को ही अपनी भारत यात्रा के दौरान दे दिया था. यानी भारत में लोकसभा चुनावों से सात महीने पहले. आर्थिक संपर्क बढ़ाने के लिए रूसी राष्ट्रपति ने ईईएफ की तीन साल पहले शुरुआत की थी. इस बैठक में मंगोलिया, मलेशिया और जापान के नेता भी पहुंचेगे.

पीएम मोदी की इस यात्रा के पहले गुजरात, गोवा, हरियाणा और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री व्लादिवोस्तक का दौरा कर चुके हैं. इस दौरान दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय कारोबारी संवाद और कई समझौतों पर दस्तखत भी हो चुके हैं. विदेश मंत्रालय के मुताबिक रूस के सुदूर पूर्व इलाके में भारत व्यापारिक सहयोग की संभावनाएं देख रहा है. कोकिंग कोल, तेल व गैस, डायमंड, टिंबर के अलावा कृषि और मानव संसाधन निर्यात की संभावनाएं हैं. विदेश सचिव के अनुसार इस इलाके में काम करने वालों की कमी के चलते भारतीय कामगारों के लिए अवसर हो सकते हैं जिनका भारत लाभ उठाना चाहता है.

अपने पूर्वी इलाके की आर्थिक रफ्तार बढ़ाने में जुटे रूसी राष्ट्रपति पुतिन भारत के साथ भागीदारी बढ़ाने के इच्छुक हैं. ऐसे में पीएम मोदी की कोशिश भारतीय कंपनियों के लिए नई निवेश संभावनाएं जुटाने की होगी. कारोबारी रिश्तों को मजबूत करने की कड़ी में मोदी फार ईस्ट एग्जिबिशन स्ट्रीट भी जाएंगे. यह रूसी कंपनियों और उत्पादों की एक ऐसी नुमाइश है जहां भारतीय कंपनियां भी भागीदार हैं. आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक पीएम इस प्रदर्शनी में रूसी एमआई-171-ए2 मल्टीरोल हैलीकॉप्टर व कामोव-226 हैलीकॉप्टर का प्रदर्शन भी देखेंगे. महत्वपूर्ण है कि भारत रूस से कामोव-226 हैलीकॉप्टर खरीद का पहले ही करार कर चुका है. इसके अलावा पीएम रूस के कामचटका क्षेत्र में चल रहे टाटा पावर कोयला खनन व प्रिमोरये इलाके में जारी भारतीय केजीके समीह के खनन परियोजना संबंधी स्टॉल को भी देखेंगे.

कारोबार के साथ ही भारत को रणनीतिक पैठ भी देता है व्लादिवोस्तक

रूस का व्लादिवोस्तक बंदरगाह दक्षिण चीन सागर से घिरा है. ऐसे में इस इलाके में कारोबारी पहुंच भारत को चीन व जापान के करीब नई रणनीतिक पैठ भी मुहैया कराता है. विदेश सचिव गोखले ने भी इसकी तस्दीक करते हुए कहा कि रूस के इस क्षेत्र इलाके के साथ पहले भारत का संपर्क अधिक सक्रिय नहीं था. लेकिन अब भारत इसे बढ़ाना चाहता है. इसकी न केवल कारोबारी अहमियत है बल्कि यह भारत की एशिया-प्रशांत रणनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है.

व्लादिवोस्तक में होने वाली मोदी और पुतिन की मुलाकात बीते चार महीनों में तीसरी मुलाकात होगी. इससे पहले दोनों नेता किर्गीजस्तान की राजधानी में हुए एससीओ शिखर सम्मेलन और जापान के ओसाक में हुई जी-20 शिखर बैठक के हाशिए पर मिले थे. भारत और रूस के बीच 1999 से द्विपक्षीय शिखर बैठकों की परंपरा चली आ रही है.

विदेस मंत्रालय के मुताबिक सालाना शिखर बैठक के दौरान दोनों नेता जहां द्विपक्षीय और बहुपक्षीय मुद्दों पर बात करेंगे. वहीं कारोबारी रिश्ते मजबूत करने और निवेश बढ़ाने पर भी जोर होगा. भारत की कई परियोजनाओं में रूस निवेश हिस्सेदारी का इच्छुक है.

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