china introduced behaviour tracking system for controlling citizen behaviour – अपने नागरिकों के व्यवहार को नियंत्रित करने की कोशिश में है चीन

चीन की आबादी इस वक्त दुनिया के किसी भी देश से ज्यादा करीब 1.4 अरब है। लेकिन चीन अपने हर नागरिक की ​गतिविधि पर पूरी नजर रख रहा है। वह उन्हें उनके व्यक्तिगत व्यवहार के लिए निजी स्कोर भी जारी कर रहा है। लेकिन यदि किसी कारण से किसी इंसान का स्कोर काफी कम हो जाता है तो ये उस इंसान के लिए चिंता का कारण बन जाता है। बताया गया कि बीजिंग के रहने वाले लिउ हू ने हाल ही में फ्लाइट बुक करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कहा गया कि वह गैर-भरोसेमंद लोगों की लिस्ट में शामिल हैं। इसलिए उन्हें फ्लाइट का टिकट नहीं दिया जा सकता है। लिउ एक पत्रकार हैं और उन्होंने अपने कई ट्वीट में आपत्तिजनक बातें लिखी थी। इस पर अदालत ने उनसे माफी मांगने के लिए कहा। लेकिन बाद में कोर्ट ने पाया कि उनके माफी मांगने का तरीका ठीक नहीं था। इसलिए उन्हें गैर-भरोसेमंद लोगों की लिस्ट में डाल दिया गया।

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क्या हैं रेटिंग गिरने के नुकसान: लिउ ने बताया कि अब इस लिस्ट में नाम आने के बाद वह प्रॉपर्टी नहीं खरीद सकते हैं। उनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में नहीं जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आपको महसूस होगा कि हर वक्त चीन में आपको लिस्ट के हिसाब से नियंत्रित किया जा रहा हो। ये लिस्ट दिन प्रति दिन और लम्बी होती जा रही है। क्योंकि चीन के हर नागरिक को इसी के आधार पर सोशल क्रेडिट स्कोर जारी किया जा रहा है। ये अस्थिर रेटिंग है जो नागरिकों के व्यवहार के आधार पर तय की जाती है। ये माना जाता है कि सामुदायिक सेवा और चीन में बने उत्पाद खरीदने से आपकी रेटिंग बढ़ जाती है। जबकि धोखाधड़ी, टैक्स चोरी और सार्वजनिक स्थलों पर धू्म्रपान करने से ये गिर जाती है।

ऐसे दिया जा रहा है अंजाम: चीन में हर नागरिक पर निगाह रखने के लिए 6 करोड़ से ज्यादा सर्विलांस कैमरे लगाए गए हैं। ये काम इन्हीं कैमरों की मदद से अंजाम दिया जा रहा है। कैमरे लगाने की जिम्मेदारी चीन की सबसे बड़ी आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स कंपनी सेंसटाइम के पास है। ये कंपनी सरकार के लिए स्मार्ट कैमरों का निर्माण करती है। इन कैमरों की मदद से सरकार अपराधियों को पकड़ पाती है और आम आदमियों पर निगाह रख पाती है। सेंसटाइम के सीईओ हू ली ने बताया कि,’ सेंसटाइम का कैमरा एक बार में चार हजार वाहनों की पहचान कर सकता है। हम तस्वीर लेते ही बता सकते हैं कि उस शख्स की उम्र और नाम ​क्या है?

संदिग्ध है सरकार की मंशा: चीन की आ​र्थिक और राजनीतिक संस्कृति पर केन डेवोस्किन करीब तीस साल से अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ये नया स्कोरिंग सिस्टम कैसे काम कर रहा है ये अभी गुप्त रखा गया है। सरकार आसानी से इसका दुरुपयोग कर सकती है। मेरा मानना है कि सरकार अपने हिसाब से नागरिकों के व्यवहार में बदलाव चाहती है। जब सरकार ऐसा चाहती हो तो व्यवहार में तब्दीली लाने का इससे अच्छा तरीका कोई नहीं हो सकता है।

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